आये थे शासन को ताकत दिखाने, खुद ही भिड़ गए

भोपाल: कर्मचारियों की मांगों को लेकर शासन को अपनी ताकत का अहसास कराने राजधानी पहुंचे कर्मचारी नेता आपस में ही भिड गए।हालात को काबू में करने प्रशासन को सशस्त्र सुरक्षा बल और पुलिस बल तैनात करना पड़ा। दरअसल राजधानी के जंबूरी मैदान में कर्मचारियों ने एक दिवसीय महाआंदोलन किया था। यह आंदोलन मप्र संविदा संयुक्त संघर्ष मंच ने बुलाया था। इसमें दो दर्जन से अधिक कर्मचारी संघ व 34 विभागों के हजारों कर्मचारियों ने हिस्सा लिया।

आपस में भिड़ने की वजह मंच पर बैठने, मुख्यमंत्री से मिलने के लिए अकेले-अकेले जाने, सरकार से मिले हुए एक तथाकथित संघ के जिंदाबाद के नारे लगाने और अनिश्चितकालीन हड़ताल का कहकर बुलाने व अचानक आंदोलन खत्म करने की घोषणा करना बताया जा रहा हैं। हालांकि बाद में स्थिति संभल गई। लेकिन प्रदेश के दूर-दराज जिलों से आए कर्मचारियों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा। जंबूरी मैदान में दोपहर 12 बजे तक आंदोलन में भाग लेने के लिए सैकडों की संख्या में कर्मचारी पहुंच चुके थे। इसके बाद सरकार के खिलाफ नारेबाजी का दौर शुरू हुआ। कर्मचारियों ने अपनी-अपनी समस्या बताई।

सूत्रों के मुताबिक इस दौरान कुछ कर्मचारी नेताओं ने एक संघ के जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए। इस संघ को सरकार से जुड़ा हुआ संघ माना जाता है, इसके बैनर भी आंदोलन स्थल पर लगे हुए थे। इसको लेकर कर्मचारी भड़क गए। उनका कहना था कि इस संघ की वजह से हम 15 सालों से सुविधा और वेतनमान से वंचित है। इस मामले को जैसे-तैसे शांत किया तो कुछ कर्मचारी नेता मंच पर बैठने को लेकर आपस में भिड़ गए। इसके बाद मांगों को लेकर एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिलने की बात आई।

जिसमें कुछ संघों के नेता चले गए और कुछ को तवज्जों नहीं मिली। इसको लेकर जमकर खींचतान हुई। इस बारे में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ अध्यख सौरभ सिंह चौहान का कहना है कि आंदोलन शांतिपूर्वक हुआ। बीच में कुछ कर्मचारी तुरंत मांगों के निराकरण को लेकर आक्रोशित हो गए थे जिन्हें शांत कराया गया। आंदोलन एक ही दिन के लिए बुलाया था।

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