आर्थिक गतिविधियों को पटरी पर लाने के लिए भारत सरकार ने उठाए कई कदम, विकास में 20 फीसदी का उछाल, ‘इंडो-यूएस इकोनॉमिक समिट’ में बोले राजनाथ सिंह

नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (IACC) द्वारा आयोजित ‘इंडो-यूएस इकोनॉमिक समिट’ में हिस्सा लिया. वह इस समिट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए शामिल हुए. उन्होंने कहा, “कोविड-19 के कारण दुनिया भर में औद्योगिक गतिविधि, ट्रेवल और टूरिज्म सेक्टर में लगभग एक ठहराव आ गया है.”

उन्होंने कहा, ”यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब पूरी दुनिया वैश्विक महामारी के साथ-साथ कई आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है.” उन्होंने आगे कहा, ”भारत में अब तक 75 करोड़ से अधिक टीकाकरण किए जा चुके हैं. हम जल्द ही 100 करोड़ टीकाकरण का आंकड़ा पार करेंगे.”

रक्षा मंत्री ने कहा, ”भारत सरकार की तरफ से ऐसे कदम उठाए गए हैं जिसने आर्थिक गतिविधियों को फिर से पटरी पर लाने का काम किया है. पिछले साल जहां विकास में 24 फीसदी की कमी देखी गई थी वहीं इस साल की पहली तिमाही में 20 फीसकी का उछाल देखा गया है. राजनाथ सिंह ने कहा कि शीत युद्ध के बाद के युग में भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग मजबूत हुआ. यह सहयोग आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक युद्ध के दौरान और भी मजबूत हुआ.

इसी के साथ उन्होंने ये भी कहा कि विदेशी ओईएम ‘मेक इन इंडिया’ अवसर को भुनाने के लिए एक संयुक्त उद्यम या प्रौद्योगिकी समझौते के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से या भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी कर सकते हैं. राजनाथ सिंह ने कहा कि मेरा मानना ​​​​है कि भारत-अमेरिकी व्यापार सहयोग के लिए खरीदार-विक्रेता संबंध से अधिक सार्थक और टिकाऊ आर्थिक और व्यावसायिक सहयोग की ओर बढ़ने का समय आ गया है.

इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को कहा था कि दुनिया में हर जगह अनिश्चितता है और अफगानिस्तान में मौजूदा घटनाक्रम इसका एक उदाहरण है. राजनाथ सिंह ने सतह से हवा में मार करने वाली मध्यम दूरी की मिसाइल एमआरएसएएम को भारतीय वायुसेना (IAF) में शामिल करने के लिए राजस्थान के जैसलमेर में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था, ‘‘चाहे वह दक्षिण चीन सागर हो, हिंद महासागर क्षेत्र, हिंद-प्रशांत क्षेत्र या पश्चिम एशिया हो, हम हर जगह अनिश्चितता देख सकते हैं. अफगानिस्तान में मौजूदा घटनाक्रम इसका एक उदाहरण है.’’

उन्होंने कहा कि वैश्विक परिदृश्य बहुत तेजी से और अप्रत्याशित तरीके से बदल रहा है. सिंह ने कहा, ‘‘इस बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच, राष्ट्रों के बीच समीकरण भी उनके हितों के अनुसार तेजी से बदल रहे हैं.’’

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