आर्थिक तंगी से हैं परेशान तो आटा है इसका असली समाधान

नई दिल्ली: सामान्य भाषा में ये टोटके कहलाते हैं लेकिन वास्तव में ये कुछ ऐसे शास्त्रीय उपाय हैं जो आपके जीवन की इन समस्याओं को बड़ी आसानी से दूर कर सकते हैं। यहां हम धन से जुड़ी समस्याओं के निवारण के लिए आटे और तुलसी से जुड़े कुछ आसान से उपाय बता रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र की मानें तो आर्थिक तंगी दूर करने में ये जादुई असर करते हैं…

शनिवार को चक्की में आटा पिसवाएं और पिसवाने से पहले इसमें 100 ग्राम काले चने, 100 ग्राम तुलसी, 2 दाने केसर के डाल दें। इसके अलावा कोशिश करें कि चक्की का पिसवाया हुआ आटा ही घर के सभी सदस्य इस्तेमाल करें और इसे शनिवार को ही पिसवाएं। इस उपाय से बहुत जल्दी ही आर्थिक तंगी दूर होगी और घनागमन के नए स्रोत खुलेंगे। इसके अलावा इस से सदस्यों के बीच कलह और मनमुटाव की स्थिति भी खत्म होती है और घर में खुशहाली आती है।

गेहूं के आटे में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर बृहस्पतिवार को गाय को खिलाएं। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होकर जल्द ही धन का आगमन होगा। अगर घर में पैसा नहीं रुकता तो इससे वह भी ठीक हो जाएगा। इसके अलावा प्रतिदिन चींटियों को आटा देना भी लाभकारी होता है।

शनिवार को काले कुत्ते को सरसों तेल में चुपड़ी रोटी खिलाना ना सिर्फ आपको शनि से संबंधित परेशानियों से मुक्त करता है, बल्कि यह आपको ऋण मुक्त भी करता है। इतना ही नहीं इससे आपकी हर मनोकामना पूरी होती है।

तीसरा उपाय है तुलसी के पौधे के नीचे दीपक जलाना। हर दिन सुबह-शाम घर में तुलसी के पौधे के नीचे घी का दीपक जलाना आपकी हर मनोकामना पूरी करती है और आर्थिक समस्याएं भी दूर करती है। मान्यता है कि इससे लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और हर तरह ही धन समस्या दूर होती है।

इसके अलावा शनिवार को सुबह पीपल के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाना धनागमन की परेशानियां खत्म करती हैं। ध्यान रहे कि दीपक हमेशा आटे या मिट्टी का ही हो।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
Loading...
E-Paper