इधर भूख हड़ताल पर बैठे अन्ना, उधर सुप्रीम कोर्ट लोकयुक्त को लेकर सख्त

नई दिल्ली: भ्रष्टाचार से निपटने के लिए कई राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति अभी तक नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख दिखाया है। शीर्ष अदालत ने 12 राज्यों के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी कर लोकायुक्त न नियुक्त करने की वजह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। बता दें कि जम्मू-कश्मीर, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, मिजोरम, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, दिल्ली और पश्चिम बंगाल ऐसे राज्य है जहां अभी तक लोकयुक्त की नियुक्ति नहीं हो पायी है। याद रहे लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम-2013 की धारा-63 के तहत सभी राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति अनिवार्य है।

शुक्रवार को जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस आर भानुमति की बेंच ने इन राज्यों के अलावा ओडिशा के मुख्य सचिव से भी लोकायुक्त की नियुक्ति पर जवाब मांगा है। बेंच ने कहा कि ओडिशा में भ्रष्टाचार रोकने के लिए ओम्बुड्समैन है या नहीं, शीर्ष अदालत को इसकी कोई जानकारी नहीं है।इसकी जानकारी शीघ्र मुहैया कराई जाय। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ,अधिवक्ता और दिल्ली के भाजपा नेता अश्वनी कुमार उपाध्याय की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है। जहित याचिका में राज्य सरकारों पर लोकायुक्त संस्था को जानबूझकर कमजोर करने और उन्हें पर्याप्त बजट व सुविधाएं न देने का आरोप लगाया गया है।

इसमें यह भी सवाल उठाया गया है कि लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम 16 जनवरी, 2014 को लागू हो गया था, लेकिन केंद्र सरकार ने अब तक लोकपाल की नियुक्ति नहीं की है। इसी मुद्दे पर सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे शुक्रवार से दिल्ली के रामलीला मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़तालपर बैठे हैं। अन्ना हजारे किसी भी सूरत में एक मजबूत लोकपाल चाह रहे हैं ताकि भ्रष्ट नेताओं पर अंकुश लगाए जा सके। बता दें कि वर्तमान मोदी सरकार ने भी अभी तक लोकपाल की नियुक्ति नहीं कर पायी है जबकि सरकार में आने से पहले बीजेपी लोकपाल लाने की बात कर रही थी।

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