…इसे कहते हैं आपदा को अवसर में बदलना

लखनऊ: आपदा को अवसर में बदलने की कला किसी को सीखनी हो तो वह हम भारतीयों से सीखे । कोरोना के आपदा काल में विश्व जनसँख्या दिवस से शुरू हुए जनसँख्या स्थिरता पखवारे के दौरान परिवार कल्याण कार्यक्रमों को जन-जन तक पहुंचाने वाले जागरूकता कार्यक्रमों में आड़े आ रहीं बाधाओं को अपनी तरकीबों से चुटकी में दूर कर दिया । इन प्रयासों से जहाँ कोरोना से हमारी प्रथम पंक्ति की आशा कार्यकर्ता और एएनएम सुरक्षित रहेंगी वहीँ पूरी दमदारी के साथ वह परिवार नियोजन का सन्देश भी जन-जन तक पहुंचा सकेंगी ।

दो गज की दूरी, मास्क और छोटा परिवार जरूरी :
​रायबरेली के स्वास्थ्य विभाग ने एक ऐसी पहल की है, जिसकी हर कोई तारीफ़ कर रहा है । जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय कुमार शर्मा और अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी व परिवार नियोजन कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. ए. के. चौधरी का कहना है कि कोरोना को देखते हुए विभाग ने ऐसा मास्क तैयार कराया है, जिस पर कोरोना से बचाव के साथ परिवार नियोजन का सन्देश प्रिंट कराया गया है । यह मास्क पहनकर आशा और एएनएम कार्यकर्ता जब घर-घर छोटे परिवार के बड़े फायदे की अलख जगाने पहुंचेंगी तो वह अत्यंत प्रभावी साबित होगा । इस बार की जनसँख्या स्थिरता पखवारे की थीम- “आपदा में भी परिवार नियोजन की तैयारी – सक्षम राष्ट्र और परिवार की पूरी जिम्मेदारी” से भी यह प्रयोग बहुत जुड़ाव वाला साबित होगा । प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी इस तरह का नया प्रयोग किया जा रहा है ।

पंचायत प्रतिनिधियों की भी लेंगे मदद :
​फिरोजाबाद, मैनपुरी समेत कई अन्य जिलों के जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षर से पंचायत प्रतिनिधियों को पत्र भेजकर कोरोना से बचाव के साथ परिवार नियोजन कार्यक्रमों में भी मदद की अपील की गयी है । पत्र में जिक्र है कि पंचायत प्रतिनिधियों की गाँव के विकास में अहम् भूमिका है लेकिन बिना परिवार नियोजन के हम सही अर्थों में विकास के उद्देश्यों को प्राप्त नहीं कर सकते । इसलिए आइये हम सभी “परिवार नियोजन जीवन बचाता है” इस मूल मन्त्र को ध्यान में रखते हुए यह प्रण करें कि कोविड-19 महामारी के साथ-साथ परिवार नियोजन कार्यक्रम में भी केंद्र व राज्य सरकार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और उत्तर प्रदेश तकनीकी सहयोग इकाई (यूपी टीएसयू) के साथ मिलकर कार्य करेंगे ।

गर्भ निरोधक साधन पीपीआईयूसीडी को बढ़ावा :
​इसी तरह लम्बे समय तक अनचाहे गर्भ से मुक्ति चाहने वाली महिलाओं में प्रसव पश्चात लगने वाले पोस्ट पार्टम इंट्रायूटेराइन कंट्रासेप्टिव डिवाइस (पीपीआईयूसीडी) को बढ़ावा देने को लेकर भी नई पहल की जा रही है । इसके तहत संस्थागत प्रसव के 48 घंटे के अन्दर सर्वाधिक महिलाओं को पीपीआईयूसीडी के फायदे बताने के साथ ही उन्हें इसे अपनाने के लिए प्रेरित करने वाले डाक्टर और स्टाफ नर्स का नाम केंद्र पर डिस्प्ले किया जाएगा और उन्हें चैम्पियन घोषित किया जाएगा ।

जरूरी है बात करना :
​परिवार नियोजन और गर्भ निरोधक साधनों के बारे में खुलकर बात करने से कतराने वालों को ध्यान में रखते हुए “जरूरी है बात करना” मुहिम भी शुरू हो रही है । इसके जरिये लोगों की झिझक को दूर कर इस पर खुलकर बात होगी ताकि वह इसके फायदे के बारे में खुद सोचें और अपनी इच्छानुसार परिवार नियोजन के साधनों को अपनाने में दिलचस्पी दिखाएँ। इस तरह से इस आपदा काल में भी लोगों ने परिवार कल्याण कार्यक्रमों को पूरी धार देने की अलग-अलग अंदाज में तैयारी कर रखी है ताकि अभियान कमजोर न पड़ने पाए और हर साल की अपेक्षा इस साल और मजबूती के साथ जन-जन तक छोटे परिवार के बड़े फायदे की अलख जगाने में कामयाब हो सकें।

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