इस आइलैंड पर रहती है जलपरियां, साल में सिर्फ एक ही दिन मिलती हैं, जाने की इजाजत !

इस रहस्यमयी दुनिया में कई जगहें ऐसी हैं जो आज भी विचार करने लायक हैं और उनपर विश्वास कर पाना बहुत मुश्किल होता हैं। ऐसी ही एक जगह है आइनहैलो द्वीप जो कि स्कॉटलैंड में स्थित हैं। यह आइलैंड अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता हैं और दूरी तरफ यह कई खंडहरों से भी भरा हैं। किस्से-कहानियों की माना जाए तो इस द्वीप पर बुरी आत्माओं का साया है। कोई भी व्यक्ति इस द्वीप की आने की अगर कोशिश करता है तो ये बुरी आत्माएं द्वीप को हवा में गायब कर देती हैं। कहा तो यह भी जाता है कि इस द्वीप पर जलपरियां रहती हैं, जो गर्मी के मौसम में ही पानी से बाहर निकलती हैं।

स्कॉटलैंड के हाईलैंड्स विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डेन ली के मुताबिक, इस आइलैंड पर हजारों साल पहले भी लोग रहा करते थे, लेकिन वर्ष 1851 में यहां प्लेग की बीमारी फैल गई, जिसकी वजह से यहां रहने वाले लोग यह द्वीप छोड़कर चले गए। अब यह द्वीप बिल्कुल वीरान पड़ा हुआ है। यहां कई पुरानी इमारतों के मलबे मिले हैं। पुरातत्वविदों के मुताबिक, खुदाई में यहां पाषाण काल की भी कई दीवारें मिली हैं।

यह द्वीप कब बना, इसकी जानकारी किसी के पास भी नहीं है। पुरातत्वविदों का कहना है कि यह शोध करने वाली जगह है। अगर इसपर शोध किया जाए तो इतिहास के कई ऐसे रहस्य खुल जाएंगे, जो लोगों को हैरान कर देंगे। आइनहैलो द्वीप ओर्कने आइलैंड से महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित है, जहां लोग रहते हैं, लेकिन इसके बावजूद आइनहैलो द्वीप पर आना बिल्कुल भी आसान नहीं है। यहां तक कि नाव के जरिए भी यहां तक पहुंच पाना संभव नहीं है, क्योंकि यहां बहने वाली नदियों में इतने ज्यादा ज्वार भाटे आते हैं कि वो रास्ता ही रोक देते हैं।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
Loading...
E-Paper