इस गाँव की महिलाएं नही पहन सकती साड़ी के साथ ब्लाउज़, क्योकि यहाँ मर्द…

नई दिल्ली: भारतीय संस्कृति विश्व की प्राचीनतम संस्कृतियों में से एक है . भारत अनेक परम्पराओ और संस्कृति का देश है . भारत में अनेक प्रकार की भारत के रीति-रिवाज़, भाषाएँ, प्रथाएँ और परंपराएँ मौजूद है . आज हम भारत के ऐसे गाँव के बारें में बताने जा रहे है जहाँ की औरते ब्लाउज ही नहीं पहनती है महिलाएं साड़ी के साथ ब्लाउज कभी नहीं पहनती है . यहाँ की परंपरा के हिसाब से महिलाओं को ब्लाउज पहनने की कोई बहु अनुमति नहीं है.

छत्तीसगढ राज्य के आदिवासी अंचलों में काम करती महिलाएं साड़ी के साथ ब्लाउज कभी नहीं पहनती है. इतना ही नहीं इस पुरातन परंपरा के अंतर्गत औरते ना तो स्वयं ब्लाउज पहनती है और ना ही गाँव की किसी और औरतो को इसे पहनने देती हैं, जिन जगहों में यह लोग रहते है वहां के रहने वाले स्थानीय लोग शुरू से अपनी परंपरा को नियम के साथ निभाते चले आ रहे हैं. भारत के छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्र की औरते साड़ी के साथ ब्लाउज़ नहीं पहनती हैं .

इस जगह में रहने वाले स्थानीय लोग लग भग एक हजार से अधिक वर्षो से इस परंपरा को नियम के साथ निभाते चले आ रहे हैं. इस तरह की स्थानीय आदिवासी औरतो का मानना है कि यह काम करने के लिए बहुत सुविधा होता है. अब आज कल के फैशन ने इन इलाकों में भी दस्तक दे दी है. अब यहां की लड़कियां साड़ी के साथ ब्लाउज भी पहनने लगी हैं. अब इस परंपरा को बचाने में वृद्ध लोग लगे हुए हैं.

आपको बता दें कि अब यह मात्र एक परम्परा ही नही रह गयी है बल्कि शहरों में अब बिना ब्लाउज के साड़ी पहनने का फैशन चल पड़ा है. कुछ मॉडलों ने इसके समर्थन में बिना ब्लाउज के साड़ी पहनकर सोशल साइट्स पर अपनी तस्वीरें पोस्ट भी कर रही हैं, जिसकी लोग बहुत तारीफ भी कर रहे हैं .

 

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper