इस दीपावली 3.5 लाख दीयों से जगमग होगी अयोध्या

फैजाबाद: भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या इस दीपावली 3.5 लाख दीपकों की ज्योति से जगमग होगी। विगत वर्ष से अयोध्या में शुरू हुई दीपोत्सव की परम्परा इस साल और भी भव्य रूप से मनाई जाएगी। पिछले साल दीपोत्सव की तैयारियां बहुत जल्दबाजी में हुई थीं, इसलिए केवल एक दिन ही कार्यक्रम आयोजित हो सका था। इस बार कार्यक्रम तीन दिन तक मनाया जाएगा, इसके लिए 4 महीने पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। हालांकि इस पर भी कार्यक्रम की तिथि तय होने में तीन महीने लग गए। बाकी तैयारियां इसी बचे समय में ही करनी है इसलिए साढ़े तीन लाख दीपों का निर्माण करवाने में दिक्कतें आ रही हैं। ये दीप 70 कुम्हार बना रहे हैं। घाटों के सुंदरीकरण का काम भी अभी तक अधूरा है। अयोध्या के जयसिंहपुर गांव के 70 कुम्हारों को पहले चरण में साढ़े तीन लाख दीप तैयार करने का ऑर्डर मिला है।

यूनिवर्सिटी के वीसी डॉ. मनोज दीक्षित के मुताबिक कुम्हार 30 मिली तेल की क्षमता वाले दीप बना रहे हैं। इस बार 9 हजार लीटर सरसों का तेल दीपों को जलाने में लगेगा। ये दीप 3 घंटे तक जलेंगे। पिछले साल दीप बड़े आकार के थे, जिसमें 55 मिली सरसों का तेल भरा गया था। एक लाख 872 दीप जलाए गए थे, जिस पर 15 हजार लीटर सरसों का तेल लगा था। वीसी डॉ। मनोज दीक्षित ने बताया कि केवल दीप बनाने से लेकर जलाने तक में 22 लाख रुपये खर्च हो जाएंगे। पिछले साल यूनिवर्सिटी ने डोनेशन से इस कार्यक्रम का आयोजन किया था। उस समय 17 लाख का खर्च आया था। जल्दी में कार्यक्रम की तैयारी करने के कारण दीप की कीमत डेढ़ रुपये प्रति दीप के हिसाब से देनी पड़ी थी।

कार्यक्रम स्थल राम की पैड़ी पर 9 रंगोली फाइन आर्ट विभाग बनाएगा। रंगोली में अवध का कल्चर प्रदर्शित किया जाएगा। रंगोली की पेंटिंग के बीच में यह दीप रखा जाएगा। पैड़ी के दोनों तरफ साढ़े तीन लाख दीप जलाए जाएंगे। इसी के साथ गिनेस बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड में नाम दर्ज करवाने की भी कोशिश होगी। राम की पैड़ी पर सरयू में वॉटर फ्लोरिंग शो होगा। रूसी-भारतीय मैत्री संघ दिशा व अयोध्या शोध संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में दीपोत्सव कार्यक्रम में रूसी कलाकार भगवान राम की लीला का मंचन करेंगे। ये सभी 12 कलाकार रूसी राम के नाम से प्रसिद्ध गेनादी पेचनीकोव के शिष्य हैं। रूस में सन 1960 से रामलीला का इतिहास मिलता है । गेनादी ने 20 वर्ष रामलीला का मंचन किया है। रूसी-भारतीय मैत्री संघ ‘दिशा’ ने पद्मश्री गेनादी पेचनीकोव की याद में करीब चालीस वर्ष बाद यर्शोफ थियेटर के कलाकारों के माध्यम से दोबारा रामलीला का मंचन शुरू किया है। इस रामलीला की पहली प्रस्तुति 4-6 नवंबर को अयोध्या में होगी।

जिस दीप को जलाकर दीपोत्सव का शुभारंभ किया जायेगा, उसे बेहद ही खास तरीके से डिजाइन किया जा रहा है। दीप बनाने जिम्मेदारी अवध यूनिवर्सिटी के फाइन आर्ट्स विभाग को सौंपी गई है। विभाग के कोऑर्डिनेटर डॉ। विनोद कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक इस गोलाकार दीप की उंचाई साढे पांच फुट की होगी। दीप के पहले से लेकर आखिरी चरण तक क्रमशः 9 दीप, 7 दीप, 5 दीप, 3 दीप बनेंगे। सबसे उपर बड़े आकार का अकेला दीप रहेगा। रामायण में जिस जगह प्रभु राम के वनवास के बाद लौटने पर उनके स्वागत में भव्य दीपोत्सव के आयोजन का जिक्र मिलता है। वहां दीपोत्सव का भव्य पर्व मना कर वैसा ही माहौल बनाना। दीपोत्सव के लिए में सरकार ने करीब 5 करोड़ का बजट तय किया है। 4 नवंबर को कार्यक्रम की शुरुआत भरतकुंड से होगी, जहां भरतजी ने 14 साल भगवान राम की खड़ाउ रखकर पूजा की थी।

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