इस बार ऑर्गेनिक रंगों के साथ होली को बनाएं खास, ऐसे करें घर पर तैयार

नई दिल्ली: मार्च में भारत के सबसे प्रिय त्योहारों में से एक होली का आगमन होता है। हर कोई रंगों के त्योहार को पसंद करता है, लेकिन बाजार में उपलब्ध सिथेंटिक कलर कई प्रकार से हमारी त्वचा को नुकसान पहुंचाते हैं। इन सिंथेटिक रंगों में रासायनिक तत्व मिले होने से ये त्वचा के लिए हानिकारक होते हैं। इसलिए अब लोग होली में सिथेंटिक रंगों की बजाए ऑर्गेनिक कलर को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। इन्हीं में से शुमार हैं मुंबई के सोसायटी में रहने वाले कुछ लोग, जिन्होंने फूलों से तैयार किया है खास ऑर्गेनिक कलर।

प्राचीन समय में रंग, होली के मौसम के दौरान खिलने वाले फूलों और जड़ी-बूटियों का उपयोग करके बनाए जाते थे। इस वजह से प्राकृतिक होने के अलावा ये रंग त्वचा के लिए भी फायदेमंद थे। हालांकि, हाल के दिनों में बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए, आजकल हानिकारक रसायनों के साथ रंगों का उपयोग किया जाता है। लेकिन इन सबके बीच आजकल ऑर्गेनिक कलर की भी काफी डिमांड बढ़ गई है। हालांकि, गैर-जैविक रंगों की तुलना में ये उत्पाद अक्सर महंगे होते हैं, जिसके कारण सस्ते के चक्कर में लोग अधिक हानिकारक विकल्प को चुन लेते हैं। आपको बता दें कि आम भाषा में गुलाल रंग के नाम से जाने जाते ये सूखे रंग कई तरह के जहरीले रसायनों या वजनी मैटल आदि से तैयार होते हैं।

मुंबई के कांदिवली ईस्ट में रिवेरा टावर्स के निवासियों ने खुद को एक ऐसी ही समस्या का सामना करते हुए पाया। जिसके बाद साल 2019 में, यहां के कुछ निवासियों ने सस्ती विकल्पों की तलाश शुरू करने के लिए पहल की। अपार्टमेंट में रहने वाले एक शख्स अमूल्य मंगेश ने बताया कि “हमारे सोसायटी में लगभग 260 घर हैं। हम सभी को त्योहार मनाने से रोकने के लिए नहीं कह सकते, न ही हम उन्हें केवल जैविक रंग खरीदने के लिए मजबूर कर सकते हैं। इसलिए, सभी ने इस पर चर्चा किया और फिर हमने सूखे फूलों का उपयोग करके रंग बनाने की पारंपरिक विधि का पालन करने का फैसला किया।

ट्रायल के आधार पर, कुछ वॉलेंटियर्स ने अपने पूजा घर को सजाने के लिए फूलों को जमा करना शुरू कर दिया। रंग के अनुसार फूलों को अलग करके, उन्हें छत पर सुखाकर और फूड ब्लेंडर का उपयोग करके उन्हें पीसकर रंग बनाया गया। हालांकि ये रंग सिंथेटिक लोगों की तरह चमकदार नहीं दिखते थे। निवासियों का कहना है कि वे यह जानकर संतुष्ट थे कि वे उपयोग करने के लिए सुरक्षित हैं और यह आसानी से धुल सकते हैं।

जनवरी 2020 में, सोसायटी के वयस्क वॉलेंटियर्स ने परिसर में स्थित घरों और मंदिरों से फूल एकत्र करने की जिम्मेदारी ली। एक निवासी सुजाता कन्नन बताती हैं कि सोसायटी के भीतर तीन मंदिर हैं। पुजारी की मदद से हम माला और खुले फूल इकट्ठा करने में सक्षम थे। जबकि युवा वॉलेंटियर्स ने रंगों के अनुसार फूलों और पत्तियों को अलग करने की जिम्मेदारी उठाई। इन फूल के ढेर को छत पर बिछाया गया और कुछ दिनों तक सूखने दिया गया। सूखे फूलों को फूड ब्लेंडर्स का उपयोग करके पीसकर रंग बनाया गया और एक एयर-टाइट कंटेनर में रखा गया। दो महीने के भीतर सभी 260 घरों में जश्न मनाने के लिए उनके पास पर्याप्त रंग तैयार हो गए थे।

वहीं, अमूल्य ने बताया कि COVID-19 महामारी के कारण होली आने से पहले ही सरकार ने सभी आयोजनों पर रोक लगा दी है। इसके इतर सोसायटी के निवासियों और बच्चों ने रंग बनाने में काफी उत्साह दिखाया और मज़े किए। एहतियात के तौर पर, सोसायटी ने होली के उत्सव को रद्द कर दिया, लेकिन इसके बजाय एक छोटी पूजा आयोजित की गई है, जहां इन रंगों का इस्तेमाल किया जाएगा।

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