इस बार होली मनेगी स्वेटर में, गेहूं की फसल पर हो सकता है असर

लखनऊ : एक-दो दिन खिली धूप देखकर अगर आप यह सोच रहे हैं कि ठंड अब बस विदाई की ओर है तो आप पूरी तरह गलत हैं। हर साल मकर संक्रांति के बाद से ठंड के तेवर ढीले पड़ने लगते हैं। लेकिन, इस इस साल ठंड मार्च तक रहेगी। इसके साथ ही मौसम में तब्दीली के चलते गेहूं की फसल के अलावा सब्जियों की पैदावार भी प्रभावित रहेगी।

अमेरिका के मौसम अनुमान सेंटर ने एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से मार्च तक ला-नीना ज्यादा सक्रिय रहेगा। इससे प्रशांत महासागर का तापमान कम ही बना रहेगा। इससे समूचा विश्व कड़ाके की ठंड का सामना करता रहेगा। हमारा देश भी इससे अछूता नहीं रहेगा। मौसम वैज्ञानिकों का तो यहां तक कहना है कि इस बार जून तक हल्की रजाई या कंबल ओढ़ना पड़ सकता है।

इतना ही नहीं कई बार तो बेमौसम बारिश भी होने का अनुमान जताया गया है। इससे एक बात तो साफ है कि ट्रेन और फ्लाइट लेट होने का सिलसिला अभी लंबे समय तक जारी रहने वाला है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि जनवरी से मार्च के बीच सेंट्रल इंडिया में कड़ाके की ठंड के साथ बर्फबारी और घना कोहरा भी रहेगा।

जबकि मार्च से मई के महीने में बेमौसम बारिश के आसार व्यक्त किए गए हैं। इस बार मई से जुलाई के बीच केरल समेत लगभग सभी दक्षिणी राज्यों में अच्छी बारिश होगी, जबकि जुलाई से सितंबर के बीच समूचे देश में बदरा झूमकर बरसेंगे।

इन समस्याओं का करना होगा सामना

घने कोहरे और धुंध अभी कुछ दिन तक और नहीं छंटने के कारण ट्रेनों और फ्लाइटों के कैंसिल होने के साथ ही उनके लेट होने का सिलसिला जारी रहेगा। शीत लहर चलने से बीमारियों की दर में भी इजाफा होगा।

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