ईडी की जाँच में हुआ खुलासा, कार्ति ने एक दिग्गज नेता के खाते में ट्रांसफर किए थे 1.8 करोड़

नई दिल्ली: व्यावसायी और कांग्रेस नेता कार्ति चिदंबरम के खिलाफ धनशोधन मामले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों ने दावा किया है कि कार्ति ने एक प्रभावशाली नेता के बैंक अकाउंट में 1.8 करोड़ रुपये स्थानांतरित किए थे। ईडी अफसरों ने बताया कार्ति ने रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैंड (आरबीएस) की चेन्नई शाखा में अपने अकाउंट से नेता के खाते में पैसे स्थानांतरित किए थे। अधिकारियों ने बताया कि जिस शख्स को रुपये ट्रांसफर किए गए, वह एक कद्दावर नेता है। उन्होंने अपने दशकों के राजनीतिक कैरियर में केंद्र सरकार में अनेक अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। हालांकि अफसरों ने उस नेता की पहचान जाहिर नहीं की। अधिकारियों ने कहा कि नेता की पहचान जाहिर करने से जांच प्रभावित हो जाएगी।

पूर्व वित्तमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति को सीबीआई ने 28 फरवरी को चेन्नई से गिरफ्तार किया था। उन पर पीटर मुखर्जी और इंद्राणी मुखर्जी के आईएनएक्स मीडिया से रिश्वत लेने का आरोप है। ईडी के अफसरों ने रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैंड से हुई लेनदेन के खुलासे को इस मामले की जांच में बड़ा टर्निंग पॉइंट बताया है। उन्होंने कहा कि एजेंसी उस दिग्गज नेता को समन करने पर विचार कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक 16 जनवरी 2006 से लेकर सितंबर 2009 के बीच उस नेता को 5 किस्तों में पैसे ट्रांसफर किए गए।

ईडी भी कार्ति चिदंबरम से पूछताछ का मन बना रहा है। फिलहाल कार्ति पूछताछ के लिए सीबीआई की कस्टडी में हैं और ईडी को उनकी कस्टडी के खत्म होने का इंतजार है, जिसके बाद वह उनसे पूछताछ के लिए रिमांड की मांग करेगा। ईडी उनसे यह जानना चाहता है कि उनके और उस वरिष्ठ नेता के बीच लेनदेन की क्या वजहें थीं और उनके व्यावसायिक रिश्ते कैसे हैं। ईडी के एक अधिकारी ने बताया कि उनके पास कार्ति के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं। अधिकारी ने कहा तमाम लोगों ने दावा किया है कि उन्होंने कार्ति को पैसे दिए हैं, क्योंकि उनके पास संपर्क थे और वह चीजों को ‘सेट’ कर सकते थे।

कार्ति ने आरबीएस की चेन्नई शाखा के अपने अकाउंट (नंबर 397990) से एक बड़े राजनेता के अकाउंट में पैसे ट्रांसफर किए थे और इससे दोनों के बीच संभावित सांठ-गांठ का शक गहरा रहा है। आईएनएक्स मीडिया के प्रमोटर्स पीटर और इंद्राणी मुखर्जी ने ईडी के सामने दिए अपने बयान में खुलासा किया था कि उन्होंने कार्ति को करीब 7 लाख डॉलर (3.1 करोड़ रुपये) अदा किए थे। दोनों ने यह भी दावा किया था कि कार्ति को ये रकम इसलिए चुकाई गई ताकि आईएनएक्स मीडिया में विदेशी निवेश को फॉरन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) से मंजूरी मिल जाए।

एफआईपीबी वित्तमंत्रालय के अंतरगत काम करता है और कार्ति के पिता पी. चिदंबरम उस समय वित्तमंत्री थे। पीटर और इंद्राणी एफडीआई को मंजूरी के लिए मार्च 2007 में एफआईपीबी गए थे और उन्हें 2 महीने के भीतर ही यह मंजूरी मिल गई थी। बाद में आय कर विभाग को पता चला कि आईएनएक्स मीडिया के प्रमोटर्स के पास 305 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश था, जबकि उन्हें सिर्फ 4.6 करोड़ रुपये के विदेशी निवेश की ही मंजूरी मिली थी। ईडी को दिए गए बयान के मुताबिक उस वक्त पीटर और इंद्राणी ने इस ‘मामले को सेट’ करने के लिए कार्ति से संपर्क किया था।

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