उद्यमिता में बौद्धिक संपदा अधिकारों का महत्व

पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) के उत्तर प्रदेश चैप्टर ने 3 अगस्त 2021 को जी.सी.आर.जी ग्रुप ऑफ़ इंस्टीटियुशन के साथ “उद्यमिता में बौद्धिक संपदा का महत्व ” पर एक इंटरैक्टिव वेबिनार सत्र का आयोजन किया। इस सत्र का उद्देश्य भारत में युवा पीढ़ी के बीच पर बौद्धिक संपदा अधिकार एवं नवाचार की महत्वता बताना था।

अतुल श्रीवास्तव, रेजिडेंट डायरेक्टर, पी एच डी चैंबर, उत्तर प्रदेश ने अपने संबोधन में सभी वक्ताओ का स्वागत करते हुए बताया की नवाचार एवं बौद्धिक संपदा वैश्विक परिदृश्य की जरुरत है और इसको बढ़ावा देने के लिये पी एच डी चैंबर हरसंभव लोगो की मदद कर रहा है इस विषय पर विस्तार में चर्चा की।

प्रत्युष श्रीवास्तव, डायरेक्टर, ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, जी.सी.आर.जी ग्रुप ऑफ़ इंस्टीटियुशन ने अपने संबोधन में कहा कि आज के समय में नवाचार बहुत आवश्यक है और उसमें बौद्धिक संपदा का अहम दायित्व है इस विषय पर जोर देते हुए कहा कि छात्र, प्रोफेसर एवं रिसर्च स्कॉलर को बौद्धिक संपदा के अधिकारों को समझना बहुत जरूरी है जिससे वह अपने नवाचार को बौद्धिक संपदा के अधिकारों से सुरक्षित एवं आरक्षित कर सके ।

डॉ मंदिरा रॉय, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, औमिराह आई पी ने कांसेप्ट ऑफ आई पी आर और बौद्धिक संपदा के अधिकारों को कैसे पहचाने और इन्हे कैसे बनाएं पर प्रस्तुति देते हुए बौद्धिक संपदा के महत्व एवं प्रकार पर विस्तार से चर्चा की । सागर चौधरी ,आईपी अटार्नी, चौधरी एंड एसोसिएट्स ने प्रस्तुति देते हुए बताया की बौद्धिक संपदा देश की प्रगति में भी अति आवश्यक है और बौद्धिक संपदा के अधिकारों के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि छात्रों प्रोफेसर एवं रिसर्च स्कॉलर को अपने विचारों के लिए बौद्धिक संपदा प्राप्त करने के लिए विशेषज्ञों के साथ जुड़ने के लिए शीघ्रता से प्रयास करना चाहिए और उन्होंने पेटेंट के महत्व के बारे में प्रकाश डालते हुए उन्होंने विस्तार में बताया की कैसे उत्पाद और प्रक्रिया दोनों का पेटेंट कराया जा सकता है तथा आज कि युवा पीढ़ी को बताया कि बौद्धिक संपदा का कैसे लाभ उठा कर उद्यमिता को बढ़ाये। बौद्धिक संपदा का संरक्षण करने के उपाए बताये व यह व्यवसाय में किस प्रकार से लाभदायक सिद्ध हो सकता है इसके बारे में जानकारी दी।

श्री राजेश कुमार सहायक निदेशक MSME- DI, कानपुर ने अपने संबोधन भारत सरकार द्वारा बौद्धिक संपदा के तहत दी जा रही सब्सिडी एवं पैकेज जैसे ट्रेड मार्क रजिस्ट्रेशन के लिये 10000, डोमेस्टिक पेटेंट के लिये 1 लाख, फॉरेन पेटेंट के लिये 5 लाख एवं ज्योग्राफिकल इंडिकेशन के लिये 2 लाख तक की सब्सिडी भारत सरकार द्वारा दी रही है इस विषय में जानकारी साझा की और वील मैन्युफैक्चरिंग, पीएमएस, डिजिटल एमएसएमई उद्यम रजिस्ट्रेशन एवं चैंपियन पोर्टल की महत्वता के बारे में विस्तार में बताया और साथ में निर्यात को बढ़ावा देने के लिये भारत सरकार की योजनाओ एवं MSME के लिये भारत सरकार की योजनाओ पर प्रकाश डाला ।

पीएचडी चैंबर के रेजिडेंट डायरेक्टर अतुल श्रीवास्तव, ने इस सत्र का अच्छी तरह से संचालित किया। सिद्धांत मिश्र, निदेशक, सिद्धि कंस्ट्रक्शन ने सभी प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्तियों और प्रतिभागियों को इस सार्थक सत्र के लिए अपना बहुमूल्य समय देने के लिए धन्यवाद प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया।

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