उपचुनावों में तय होगा प्रदेश को चाहिए ‘कमल’ या ‘कमल नाथ’

भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बीच ट्विटर पर एक दूसरे के ऊपर व्यंग्य बाण छोड़ने का सिलसिला पूरी तल्खी के साथ लंबे समय से निरंतर जारी है। धीरे धीरे इसकी मार और धार पैनी होती जा रही है। बीते सप्ताह से सोशल मीडिया माध्यमों से यह बात उभर कर सामने आ रही है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के बेटे सांसद नकुलनाथ उपचुनावों में कांग्रेस के युवा आइकॉन होंगे और युवाओं का नेतृत्व करेंगे। इसके बाद फेसबुक पर उनके समर्थन में अभियान अनेक कार्यकर्ताओं द्वारा प्रारंभ कर दिया गया है। प्रदेश के गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा कहां हाथ आए अवसर को गंवाने वाले थे उन्होंने इस पर एक तीखा तंज कर डाला ।

डॉ मिश्रा ने एक तीर से दो निशाने साधते हुए पिता-पुत्र दोनों की घेराबंदी करते हुए कहा कि कांग्रेस में बुजुर्गों का नेतृत्व करेंगे कमलनाथ, युवाओं का नकुलनाथ, बाकी कांग्रेस अनाथ। लगता है डॉ मिश्रा का तीर निशाने पर लगा और तत्काल इसका उत्तर ट्वीट के माध्यम से नकुलनाथ ने दे दिया। पलटवार करते हुए नकुल ने लिखा है कि अनाथ प्रदेश को नाथ चाहिए…..कमल नहीं, कमलनाथ चाहिए। भाजपा का चुनाव निशान कमल का फूल है प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री का नाम कमलनाथ है। 2018 के विधानसभा चुनाव में दो कमल की लड़ाई में जिनका नाम कमल है वह कांग्रेस के नाथ बने और डेढ़ दशक के बाद प्रदेश में कांग्रेस सत्ता में वापस लौटी लेकिन दलबदल के कारण 15 महीने ही सत्ता में रह सकी। 27 विधानसभा उपचुनावों में भाजपा को भरोसा है कि शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में चल रही उसकी सरकार को जन समर्थन मिलेगा तो कांग्रेस को भरोसा है कि फिर से कमलनाथ कोई कमाल करेंगे और कांग्रेस की सरकार बन जाएगी।

कांग्रेस विधानसभा उपचुनावों को बूथ स्तर पर लड़ने की रणनीति बना रही है। हर बूथ को मजबूत करना चाह रही है, इसलिए प्रत्येक बूथ पर पांच- पांच कार्यकर्ताओं की तैनाती कर रही है और एक बूथ प्रभारी भी होगा। दूध का जला छांछ भी फूंक-फूंक कर पीता है । इसी तर्ज पर सावधानी के साथ छांट-छांट कर चुनिंदा कार्यकर्ताओं की टोलियां बनाई जा रही हैं। दायित्व सौंपने के पूर्व उन्हें शपथ दिलाई जा रही है कि वे मन, वचन और कर्म के साथ पार्टी का निष्ठापूर्वक काम करेंगे। हर हाल में पार्टी के साथ रहेंगे। पार्टी के पूर्व प्रदेश प्रभारी महासचिव दीपक बाबरिया ने मंडलम और सेक्टर स्तर पर कांग्रेस की संरचना की शुरुआत की थी। अब नई चुनौतियों को देखते हुए क्षेत्रीय कांग्रेस का गठन कर रही है जिसमें उसके अंतर्गत ही बूथ, मंडलम और सेक्टर में पदस्थ किए गए कांग्रेस कार्यकर्ता काम करेंगे।

कमलनाथ छिंदवाड़ा में क्षेत्रीय कांग्रेस का प्रयोग सफलतापूर्वक कर चुके हैं और अब उपचुनाव वाले क्षेत्रों में कांग्रेस इसी आधार पर अपनी रणनीति बना रही है। हर बूथ पर प्रत्येक कार्यकर्ता को 200 से 250 मतदाताओं को साधते हुए उन्हें पार्टी के पक्ष में मतदान के लिए प्रेरित करना होगा। विभाग प्रकोष्ठ की समन्वयक अर्चना जायसवाल का कहना है कि कांग्रेस उपचुनाव बूथ पर ही लड़ेगी एक बूथ पर 5 कार्यकर्ताओं को साधने का काम सौंपा गया है। डैमेज कंट्रोल के दौरान कांग्रेस विधायकों ने वफादारी की कसमें लीं, हर हाल में साथ रहने का वायदा किया और उसके बाद 2 विधायकों ने और कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया। फिर भी पार्टी को अभी भी लग रहा है कि शपथ लेने वाले कार्यकर्ता निष्ठावान रहेंगे इसलिए उन्हें शपथ दिलाई जा रही है। कमलनाथ और कांग्रेस नेताओं में जबरदस्त आत्मविश्‍वास है कि फिर उपचुनाव के बाद उनकी ही सरकार बनेगी। इसका आधार क्या है यह तो वही जानते हैं।
और अंत में………

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ट्विटर के माध्यम से शिवराज सरकार की घेराबंदी करने का कोई अवसर हाथ से नहीं जाने दे रहे हैं और उन्होंने आज दो ट्वीट के माध्यम से सरकार को घेरा है। बेरोजगारी के मुद्दे पर उन्होंने लिखा है कि केंद्र व राज्य की भाजपा सरकार इस कोरोना महामारी के दौर में रोजगार को लेकर कितने ही बड़े-बड़े दावे करें लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है। रोजगार के अभाव में युवा जान दे रहे हैं। भिंड जिले में 120 दिनों में बेरोजगारी के तनाव में 28 युवाओं की खुदकुशी का आंकड़ा चौंकाने वाला है।

एक अन्य ट्वीट में सलूजा ने कहा है कि शिवराज सरकार के आते ही फर्जीवाड़े और घोटाले वापस शुरू हो गए हैं। निकाय व पंचायतों में सत्यापन में हुए खुलासे में 95 लाख फर्जी लोगों के नाम सामने आए हैं। आखिर इन लोगों का राशन किसकी जेब में गया। आपदा में भी अवसर….। राशन घोटाले में उनके निशाने पर ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ पार्टी छोड़ कर गए वे विधायक हैं जिन्हें अब फिर से उपचुनाव लड़ना है। कमलनाथ सरकार में सिंधिया समर्थक प्रद्युम्न सिंह तोमर के पास खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग था तो शिवराज सरकार बनने के बाद यह विभाग गोविंद सिंह राजपूत के पास आया। ताजे विस्तार के बाद यह विभाग दल बदल कर भाजपा में जाने वाले बिसाहूलाल सिंह को सौंपा गया। है।

अरुण पटेल/सुबह सबेरे से साभार

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
Loading...
E-Paper