उमर अब्दुल्ला की याचिका पर फैसला सुरक्षित

नई दिल्ली: हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब्दुल्ला ने पत्नी पायल अब्दुल्ला को अंतरिम गुजारा भत्ता देने संबंधी आदेश व मामले की सुनवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। निचली अदालत ने पायल की अर्जी पर अंतरिम गुजारा भत्ता देेने का निर्देश उमर को दिया था।

जस्टिस संगीता ढींगरा सहगल ने उमर अब्दुल्ला व पायल अब्दुल्ला के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया। मुख्यमंत्री ने 17 नवंबर को याचिका दायर की थी। कोर्ट ने पायल से 24 नवंबर तक जवाब मांगा था। याची के वकील ने कहा कि पायल अब्दुल्ला अपना कारोबार करती हैं और राजधानी में उनका अपना घर है। इन तथ्यों के मद्देनजर उन्हें गुजारा भत्ता तभी मिल सकता है जब वह यह साबित करें कि वह अपना खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं।

पायल के दोनों बेटे बालिग हो चुके हैं। लिहाजा वे पिता से गुजारा भत्ता लेने के अधिकारी नहीं हैं। उमर ने निचली अदालत के नौ सितंबर 2016 को समन जारी करने के आदेश को चुनौती दी थी। निचली अदालत में इस मामले की सुनवाई नौ दिसंबर को होनी है। निचली अदालत ने 30 अगस्त 2016 को उमर व पायल के तलाक की याचिका खारिज कर दी थी। इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका विचाराधीन है।

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