एकदम फिल्मी है सचिन पायलट की लव स्टोरी, सीएम की बेटी पर आ गया दिल, लेकिन…

नई दिल्ली: सचिन पायलट इन दिनों सुर्खियों में हैं, बताया जा रहा है कि सीएम अशोक गहलोत के साथ मतभेद के बाद उनके तेवर बगावती है, हालांकि सूत्रों का दावा है कि राहुल गांधी अपने विश्वसनीय लोगों के द्वारा सचिन को मनाने की कोशिश कर रहे हैं, खैर आज हम उनके राजनीतिक नहीं बल्कि व्यक्तिगत जीवन के बारे में आपको बताएंगे, सचिन ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारुख अब्दुल्ला की बेटी सारा से लव मैरिज की है।

लंदन में पढाई
सचिन पूर्व केन्द्रीय मंत्री राजेश पायलट के बेटे हैं, उन्होने अपनी शुरुआती पढाई एयरफोर्स बाल भारती स्कूल नईदिल्ली से की, फिर डीयू के सेंट स्टीफंस कॉलेज से ग्रेजुएशन किया, इसके बाद एमबीए करने के लिये लंदन चले गये, जहां उनकी मुलाकात जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारुक अब्दुल्ला की बेटी साराह से हुई, दोनों की दोस्ती हुई, फिर दोनों डेट करने लगे।

दिल्ली लौट गये
लंदन से पढाई पूरी करने के बाद सचिन पायलट वापस दिल्ली लौट गये, और नौकरी करने लगे, साराह लंदन में ही पढाई कर रही थी, दूर होने के बावजूद दोनों फोन और दूसरे माध्यमों से एक-दूसरे के संपर्क में रहे, दोनों के बीच प्यार बना रहा, जिसके बाद दोनों ने अपने रिश्ते के बारे में घर वालों को बताने का फैसला लिया। जैसे ही दोनों ने इस रिश्ते के बारे में घर वालों को बताया तो दोनों के परिवार वालों ने इसका विरोध किया, क्योंकि दोनों का मजहब अलग था।

सचिन ने घर वालों को मनाया
पहले तो सचिन के घर वालों ने इस शादी से साफ मना कर दिया, लेकिन उन्होने अपने घर वालों को मनाया, वहीं साराह के लिये भी राह आसान नहीं थी, क्योंकि उनके पिता ने तो इस मसले पर बात ही करने से साफ मना कर दिया, लेकिन साराह ने हार नहीं मानी, वो लगातार रोती रहती थी, जिसके बाद सचिन ने दुनिया की परवाह किये बिना शादी का फैसला लिया। जनवरी 2004 में दोनों ने शादी कर ली, इस शादी में अब्दुल्ला परिवार की ओर से कोई शामिल नहीं हुआ, हालांकि बाद में जब सचिन मनमोहन सरकार में मंत्री बने, तो फारुक अब्दुल्ला ने उन्हें दामाद के रुप में एक्सेप्ट किया, फिर दोनों परिवारों का रिश्ता शुरु हो गया।

पिता के निधन के बाद राजनीति में आये
सचिन पायलट लंदन से पढाई कर लौटने के बाद नौकरी कर रहे थे, लेकिन अचानक एक एक्सीडेंट में उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद पार्टी के कहने पर वो सक्रिय राजनीति में आये, 2004 लोकसभा चुनाव में उन्होने दौसा सीट से बड़ी जीत हासिल की, इसके बाद राजस्थान में पार्टी ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी, 2018 विधानसभा चुनाव में उनकी अगुवाई में ही पार्टी ने जीत हासिल की थी, जिसके बाद वो सीएम पद के लिये अड़े हुए थे, लेकिन पार्टी हाईकमान ने उन्हें डिप्टी सीएम पद की जिम्मेदारी दी।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
Loading...
E-Paper