एकीकृत प्राकृतिक खेती: उत्तर प्रदेश में किसान के सतत विकास में एक कदम

लखनऊ: मनोज कुमार सिंह कृषि उत्पादन आयुक्त उ.प्र. सरकार नें मुख्य अतिथि के रूप में सामाजिक संस्था आईकेयरइंडिया और कृषि-स्टार्टअप द्वारा मिलकर शुरू किये गये मिशन किसानशाला (एकीकृत प्राकृतिक खेती – उत्तर प्रदेश में किसान के सतत विकास में एक कदम) की रैथा गाँव बक्शी का तालाब छेत्र, लखनऊ का शुभारम्भ किया । इस अवसर पर जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी लखनऊ भी मौजूद थे । डा. पी.के.सेठ पूर्व निदेशक आई.आई.टी.आर. और संस्थापक सीईओ बायोटेक पार्क लखनऊ, डा. राना प्रताप सिंह डीन शैक्षणिक अफेयर्स बी.बी.ए.यू. एवं आई.सी.ए.आर., के.वी.के. व् अन्य संस्थानों के वैज्ञानिकों तथा बहुत संख्या में किसानों और ग्रामीण महिलायों ने भी हिस्सा लिया ।

किसानशाला का उदेश्य, किसानों के साथ के साथ जमीनी स्तर पर काम करते हुए उनको गुणवत्तापूर्ण कृषि सामिग्री (बीज, पौध, जैविक उत्पाद इत्यादि) और साल भर विशेषज्ञ सेवाएं (मिट्टी की गुणवत्ता जाँच, विविधिकरण, सूक्ष्म / लघु मत्स्यपालन, कृषि तकनीकी, कृषि प्रबंधन, जलवायु-स्मार्ट कृषि, वैज्ञानिक कृषि विधियाँ जैसे कि सहफसल, फसल चक्र, एकीकृत कीट व बीमारी प्रबंधन, फलदार बागीचे की स्थापना एवं प्रबंधन इत्यादि) उपलब्ध कराना है । अनूप गुप्ता के नेतृत्व और अतुल कुमार गुप्ता (पूर्व मुख्य सचिव उ.प्र.) के परामर्श में संस्था ने पिछले तीन साल के अथक प्रयास के बाद इस मिशन को साकार रूप दिया है ।

कृषि उत्पादन आयुक्त ने इस पहल में गहरी दिलचस्पी दिखाई और पूरा समर्थन देने का वादा किया । किसानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह आज के समय की जरूरत है और राज्य एवं केंद्र सरकारों के लक्ष्य और दूरदर्शिता के अनुरूप है । किसानशाला के उद्देश्य मिट्टी की गुणवत्ता बनाये रखने, किसानों की फसल लगत कम करने और उनकी वार्षिक आय बढाने एवं पूरे वर्ष आमदनी के स्रोत बने रहने से ग्रामीण युवाओं को कृषि की ओर आकर्षित करने में मददगार साबित होंगें । उन्होंने कहा कि किसानों को अपने परिद्रश्य में बड़े बदलाव हेतु इस मिशन से सकारात्मक भावना से जुड़ना चाहिये और कम से कम ३०० दिन की खेत में मेहनत के लिए तैयार रहना होगा ।

कृषि उत्पादन आयुक्त ने किसानशाला के माध्यम से किसानों को उन्नत किस्म के फलों के पेड़ और मछली की नर्सरी से किसानों को अच्छी किस्म की मछली देकर मत्स्य पालन कि तरफ भी उनको अग्रसर करने की बात रखी । प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, किसानों के उत्थान और कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर स्वरोजगार के अवसर पैदा करने के लिए राज्य भर में इस तरह के सैकड़ों क्लस्टर्स को विकसित करने के लिए मिशन किसानशाला को नीति-स्तरीय समर्थन और इस पहल की निरंतर समीक्षा का भी आश्वासन दिया । वहां पर किसानों की तरफ से कुछ सवाल रक्खे गए जैसे कि किसानशाला से उनको कैसे लाभ मिल सकता है, जिला प्रशासन का उसमे क्या सहयोग रहेगा इत्यादि ।

अतुल कु. गुप्ता, पूर्व मुख्य सचिव उ.प्र. ने कहा कि एक गैर सरकारी संगठन और वैज्ञानिक समुदाय के साथ साझेदारी में राज्य में अपनी तरह का यह पहला कृषि स्टार्टअप होगा जो किसानों की आजीविका में सुधार के लिए जमीनी मुद्दों पर काम करेगा । यह किसानों के हित में होगा और ग्रामीण युवाओं के लिये बड़ी संख्या में रोजगार और सूक्ष्म उद्यमिता के अवसर पैदा करते हुए खेती की ओर उनकी रुचि जागृत करने में मदगार साबित होगा ।

आलोक रंजन, पूर्व मुख्य सचिव उ.प्र. ने कहा कि मिशन किसानशाला की अवधारणा ग्रामीण छेत्र की सूक्ष्म-अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सक्षम है । ग्रामीण युवाओं और महिलाओं की भागीदारी उनकी जमीनी स्तर पर कौशल विकास और गाँव के अन्दर ही बेहतर स्वरोजगार के अवसरों में सहायक होगी ।

जिलाधिकारी लखनऊ ने किसानशाला परियोजना की सराहना की और कृषि एवं मत्स्य पालन छेत्र में कुछ सफल उदहारण भी दिए | उन्होंने किसानशाला के प्राक्रतिक खेती, क्लस्टर माध्यम से किसानों को जोड़ने और प्रयत्नशील किसानों और युवाओं को आगे बढाकर पुरे छेत्र को मजबूत करने की कार्ययोजना कि काफी तारीफ की और जिला और ब्लॉक स्तर पर हर संभव मदद का आश्वासन दिया । जिला स्तर पर इस तरह के और किसान क्लस्टर्स विकसित करने कि दिशा में बक्शी का तालाब छेत्र में शुरू किये गये दोनों क्लस्टर्स को सफल बनाने हेतु संबंधित विभागों का सहयोग सुनिश्चित करने का भी आशवासन दिया । उन्होंने आश्वस्त किया कि पहल करने वाले पात्र किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ प्राथमिकता से मिलेगा ।

संस्थापक अनूप गुप्ता ने किसानों की आजीविका में सुधार के लिए जैव प्रौद्योगिकी को शामिल करने सहित एकीकृत प्राकृतिक खेती की वैज्ञानिक पद्धतियों का समृद्ध ज्ञान हासिल किया है । उनके विचार में, गलत जानकारी वाले प्राकृतिक खेती को टिकाऊ नहीं पाते हैं । उपयुक्त वैज्ञानिक विधियों और विविधीकरण को अपनाने से उत्पादकता, गुणवत्ता और आय में वृद्धि और लागत और जोखिम कम हो सकते हैं । यह मिट्टी के स्वास्थ्य को बहाल करने के लिए भी अद्भुत रूप से काम कर सकता है । किसानों की वर्तमान वार्षिक आय से समझौता किये बिना, जोखिमों को कम करने और उनकी आय में लगातार वृद्धि करने हेतु उनकी टीम प्राकृतिक खेती और विविधीकरण की वैज्ञानिक पद्धतियों के अनुकूल होने में किसानों की सीधे उनके खेत के स्तर पर लगातार मदद करेगी । उन्होंने कहा कि पी.एच.एस.एस. फाउंडेशन के साथ एक अनुबंध के अंतर्गत क्लस्टर किसानों को कम लागत वाली जैव प्रौद्योगिकी सेवाएं प्रदान करने के लिए एक संयुक्त अनुसंधान प्रयोगशाला स्थापित की जायेगी ।

आईकेयरइंडिया संस्था पिछले दस वर्षों से अंकुरम कार्यक्रम पर काम कर रहा है, जो मुख्य रूप से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए सहयोग और सामुदायिक जुड़ाव के माध्यम से “सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के रूपांतरण” पर केंद्रित है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चों के समग्र विकास की ओर अग्रसर है । यह कार्यक्रम साठ-हजार से अधिक वंचित बच्चों के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव लाया है । इस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इस बड़े परिवर्तन में युवा शक्ति और इसकी रणनीतिक भागीदारी को लाया गया है ।

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