एक अकेले राहुल और नब्बे पत्रकार…

– ब्रजेश राजपूत

इंदौर में राहुल गांधी ने पत्रकार चर्चा के लिए जुटे पत्रकारों के सवालों के ऐसे जवाब दिए कि वहां मौजूद ज्यादातर लोग कांग्रेस अध्यक्ष के मुरीद हो गए। इस बीच कई बार तो ऐसे सवाल दागे गए कि वहां मौजूद स्थानीय नेताओं की हवाइयां उड़ गईं, लेकिन राहुल गांधी के चेहरे पर उनकी चिरपरिचित मुस्कान थी।

एक पत्रकार के तौर पर नेताओं से मिलना-जुलना और उनकी राजनीति को समझना हमेशा अच्छा लगता है। ऐसे में जब कहा गया कि इंदौर में राहुल गांधी पत्रकारों से मिलेंगे तो इंदौर जाने की ललक बढ़ गई। इंदौर के रेडिसन ब्लू के बड़े हाल में नौ बड़ी टेबल लगाकर राहुल से पत्रकारों की चर्चा के इंतजाम किए गए थे। हर टेबल पर आठ-दस पत्रकार थे। राहुल तय समय से करीब आधे घंटे बाद आए। राहुल का पहनावा वही था, जो आमतौर पर सभाओं में दिखता है बेतरतीबी से पहना हुआ सादा सफेद कुर्ता-पायजामा और नीले घिसे हुए स्पोट्र्स शूज। आते ही देरी से आने के लिए क्षमा मांगी और जिस टेबल पर सीनियर पत्रकारों की भीड़ देखी, वहां जाकर बैठ गए और लगे गुफ्तगूं करने। जाहिर है चर्चा राजनीति की हो रही थी, तो वहीं बैठे एक वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि आप सब कुछ बांटने और किसानों के कर्ज माफी की बातें कर रहे हैं। यह तरीका ठीक लगता है आपको, राहुल ने एक मिनट उनकी ओर देखा और कहा अपनी घड़ी देंगे क्या, सवाल पूछने वाले पत्रकार ने हैरान होकर घड़ी उतारी और राहुल की तरफ बढ़ा दी। राहुल ने घड़ी उलटी-पलटी और लौटाते हुए कहा- अच्छी घड़ी है, रख लीजिए। टेबल पर बैठे लोग भी हैरान थे कि जवाब देने की जगह राहुल यह घड़ी की बात बीच में क्यों ले आए? सबको हैरान देख राहुल ने कहा, ‘यही हाल है। आपका पैसा है, किसानों का पैसा है, आपको ही वापस कर रहे हैं।’

कुछ और हल्के-फुल्के सवाल-जवाब होते रहे। राहुल, जो टेबल पर बैठकर छोटे सवालों के लंबे-लंबे जवाब दे रहे थे, जब उनको लगा कि बाकी लोग अपनी टेबिल पर आने की बारी के इंतजार में बोर हो रहे हैं तो वह अचानक माइक लेकर खड़े हो गए। और फिर सबकी तरफ देखकर सवालों के जवाब देने लगे। एमपी की राजनीति पर हुए प्रश्नों पर जब वह उलझ जाते, तो कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया को पास बुलाकर अपना माइक थमाकर जवाब देने को कहते और उनकी बातें ध्यान से सुनते। करीब 90 पत्रकार और अकेले राहुल, मामला दिलचस्प होता जा रहा था। मगर राहुल के बेबाक और बेफिक्री भरे अंदाज और हाजिरजवाबी से हॉल के लोग प्रभावित हो रहे थे। कुछ राहुल की फोटो खींच रहे थे, तो कुछ वीडियो बना रहे थे। हांलाकि राहुल के सिक्युरिटी और स्टाफ के लोग मोबाइल से वीडियो बनाने को मना कर रहे थे, मगर यदि किसी की बात मान गए तो फिर भला कैसे पत्रकार। तमाम मनाही के बावजूद छिपकर फोटो ओर रिकाॄडग जारी रही। इसी बीच राहुल ने उस सवाल का जवाब दे दिया, जो अगली सुबह अखबारों की सुर्खियां बना। राहुल ने शिवराज सिंह के बेटे कार्तिकेय का नाम पनामा पेपर में होने का बयान झाबुआ की सभा में दिया था। इसके बाद से शिवराज उबले हुए थे। ऐसे में राहुल ने कह दिया कि इतने सारे घोटाले भाजपा राज्यों में होते हैं कि मैं कन्फ्यूज हो गया। छत्तीसगढ़ में कही जाने वाली बात मध्यप्रदेश में कह दी। बस फिर क्या था, खबर तो मिल गई थी।

इसी बीच इंदौर के एक पत्रकार ने कहा कि राहुल जी आपकी बातें सुन अच्छा लग रहा है। आप बहुत समझदारी वाली बातें कह रहे हैं, लेकिन फिर भी आपको ‘पप्पू’ कहा जाता है। कैसा लगता है यह संबोधन? राहुल के आसपास खड़े मध्यप्रदेश कांग्रेस के नेता भी अवाक रह गए, यह सवाल सुनकर। माइक रखे राहुल उन पत्रकार के करीब गए। थोड़ा संभले, मुस्कुराए और कहा- भैया मैं तो शिवभक्त हूं और क्या-क्या नाम हैं शिवजी के जरा बताइए। जवाब आया- भोलेनाथ। राहुल ने कहा- भोलेनाथ क्यों, इसलिए कि वह भले हैं, भोले हैं। मैं भी तो भला हूं। मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता कि कोई मेरे बारे में क्या कह रहा है। मैं तो यह समझने की कोशिश करता हूं कि कोई मुझसे इतनी नफरत क्यों कर रहा है? नफरत नहीं, प्रेम की राजनीति मुझे करनी है और मैं करता रहूंगा, जिसको जो बोलना हो बोले। बस फिर क्या था इस जवाब के बाद राहुल के मीडिया मैनेजरों और नेताओं की जान मे जान आई। मगर हम सब भी राहुल से यह जवाब सुनकर मुरीद हो गए, राहुल और पत्रकार महोदय दोनों के। कठिन सवाल पूछना पत्रकार का हक है और उसके बेहतर जवाब देना नेता के।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
Loading...
E-Paper