एक जंगल में हम दो टाइगर

ज्योतिरादित्य सिंधिया की एक खासियत है। गुस्से में वह कुछ ऐसा कह गुजरते हैं, जिसके बाद उनके उसे कर गुजरने से जोड़ा जा सकता है। याद करेंगे वो समय जब कांतिलाल भूरिया प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष थे। सिंधिया कांग्रेस के नेता के तौर पर भोपाल आए। पत्रकारों से उनकी बातचीत के दौरान पार्टी के एक गुट ने नारेबाजी शुरू कर दी। सिंधिया ने गुस्से में जो कुछ कहा, उसका सार यही था कि वह सब देख रहे हैं। इसके बाद ज्योतिरादित्य ने मध्यप्रदेश कांग्रेस संगठन को जिस तरह ‘देखना’ शुरू किया, उससे भूरिया एंड कंपनी की नींद उड़ गयी थी। फिर ‘सड़क पर उतरूंगा’ और ‘तो उतर जाएं’ वाले राजनीतिक मुकाबले का नतीजा तो सब देख ही रहे है। तो गुरूवार को शिवराज मंत्रिमंडल के शपथ समारोह में आए सिंधिया ने ‘टाइगर अभी जिंदा है’ कहकर नए सियासी कयासों को जन्म दे दिया

उन्होंने यह बात तब कही, जब विधिवत रूप से राज्य मंत्रिमंडल का वह विस्तार हो गया, जिसमें सिंधिया भारी भरकम तरीके से हावी रहे। गौरतलब बात यह कि सिंधिया ने जो कुछ कहा, शिवराज खुद की ताकत के प्रदर्शन के लिहाज से वो पहले कई मौकों पर कह चुके हैं। भाजपा की दलील है कि सिंधिया का वाक्य कांग्रेस के लिए चुनौती थी। लेकिन क्या केवल ऐसा है? सिंधिया ने अब जवाब देने की राजनीति में भी महारत हासिल कर ली है। कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को वह करारा उत्तर दे चुके हैं। और अब, जब उन्होंने नयी गर्जना की है, वह तब हुआ, जब कहा जा रहा है कि शिवराज ने ज्योतिरादित्य से दुखी होकर ही रहजन वाला ट्वीट किया है। इसलिए इसे केवल कांग्रेस के लिए चुनौती कहना शायद अधूरे सत्य को सामने लाने की तरह ही होगा। यह भी ध्यान रखना होगा कि सिंधिया ने आज ही अपने समर्थक विधायकों से वन टू वन बात भी की। यानी यह जता दिया कि उनका मिशन अभी पूरा नहीं हुआ है।

वह सरकार में अपने लोगों के परफॉरमेंस पर बारीकी से नजर रखेंगे। यह उनके लिए जरूरी भी है। आने वाले दो दर्जन सीटों के उपचुनाव में सिंधिया समूह की ही प्रतिष्ठा अधिक रूप से दांव पर लगी हुई उनके समर्थक विधायकों के मंत्री बनने के बाद उन्हें विधानसभा का उपचुनाव लड़ना है। सीधी सी बात है कि इसके चलते जिन भाजपाइयों का पत्ता कटा है, वह तन और मन दोनों रूप से कामना करेंगे कि उपचुनाव में सिंधिया का खेमा कमजोर होकर सामने आए। ऐसे में ज्योतिरादित्य की शिवराज संग मिलकर ली गयी अपने विधायकों की बैठक की गंभीरता का महत्व और बढ़ गया है। मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर जमकर खींचतान चली। अंत तक शिवराज की कोशिश रही कि इस प्रोसेस में उनका बड़ा दखल रहे। लेकिन इस बार ऐसा हुआ नहीं।

और जिस समय यह साफ होता दिख रहा था कि सिंधिया के दबाव के आगे शिवराज की बात को अधिक तवज्जो नहीं दी जा रही है, तब ही मुख्यमंत्री ने मंगलवार को एक अर्थपूर्ण ट्वीट किया था। इसमें उन्होंने लिखा, ”आये थे आप हमदर्द बनकर, रह गये केवल राहजन बनकर।’ अब हमदर्द बनकर तो सिंधिया ही आए थे शिवराज के लिए। लेकिन बाद में क्या वाकई ऐसा हो गया कि मामला रहजन वाला हो चला। शेरो-शायरी में भले ही रहजन कुछ अपनेपन से भरी शिकायत वाला मामला लगे, लेकिन इसका शाब्दिक अर्थ तो लुटेरा होता है। तो यहां यह फर्क करना बहुत जरूरी हो जाता है कि यह ट्वीट करते समय शिवराज शायर मिजाज के हो गए थे या फिर उनकी मंशा राहजन शब्द के मूल अर्थ वाली ही थी।

अब किसी के मन के भीतर जाकर तो वहां की बात सामने ला पाना संभव है नहीं, लेकिन यदि शिवराज के ट्वीट को उनकी वर्तमान स्थितियों के तराजू में रखकर तौला जाए तो यह साफ कहा जा सकता है कि वे अपने स्वभाव के विपरीत कुछ गुस्सा तो दिखा ही रहे हैं। और यदि मौजूदा हालात के ही माइक्रोस्कोप के नीचे सिंधिया के टाइगर वाले भाव की पड़ताल करें तो कहना गलत नहीं होगा कि यह उनके बढे हुए आत्मविश्वास की गवाही दे रहा है। बात कुछ अलग नजरिए से भी समझने की कोशिश की जा सकती है। एक फिल्म ‘सौदागर’ में ‘इस जंगल में हम दो शेर’ वाला गाना था। इसी गाने में ‘इमली खट्टी, मीठे बेर’ वाली बात कही गयी थी। मध्यप्रदेश में पंद्रह महीने के कमलनाथ सरकार के बाद राजनीतिक सौदागरों ने पूरा का पूरा सीन ही पलटकर रख दिया। अब जो हो रहा है, उसमें शिवराज को खट्टी इमली को भी मीठा समझकर गले के नीचे उतारना पड़ा है।

इधर सिंधिया के लिए कांग्रेस से बैर बहुत मीठा साबित हुआ है। एक जंगल में दो शेर वाली यह जोड़ी प्रदेश सरकार से लिए आने वाले चौबीस सीटों के विधानसभा उपचुनाव के लिहाज से बहुत जरूरी भी हो गयी दिखती है। लेकिन, बाघ तो जंगल में अपनी-अपनी टेरिटरी याने इलाकों के लिए आपस में संघर्ष भी करते रहते हैं। शेर झुंड में रह लेता है लेकिन टाइगर नहीं। तो क्या दो दर्जन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के बाद प्रदेश के सियासी अभयारण्य में भी टाइगर बनाम टाइगर वाला संघर्ष देखने को मिलेगा। इसका जवाब समय ही देगा।

प्रकाश भटनागर/webkhabar से साभार

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