एक साथ चुनाव वाले मोदी की आइडिया पर पानी फेरते नीतीश कुमार

अखिलेश अखिल

नई दिल्ली: बजट सत्र का उद्घाटन करते हुए महामहिम रामनाथ कोविंद ने पीएम मोदी की एक साथ चुनाव कराने की आइडिया को आगे बढ़ाने की बात कही है। राष्ट्रपति का मानना है कि इसके लिए सभी दलों को एक साथ बैठकर बात करनी चाहिए ताकि इस आइडिया पर अमल की जा सके। आपको बता दें कि काफी समय से पीएम मोदी इस आइडिया को लेकर काम करते रहे हैं और नीति आयोग से लेकर चुनाव आयोग तक इस पर बात को रखा गया है।

माना जा रहा है कि एक साथ चुनाव कराने से बार बार चुनाव के झंझट से बचा जा सकता है और इसमें चुनावी खर्च भी कम लगेगा। देखा जाय तो यह आइडिया ख़राब नहीं है लेकिन जिस तरह की राजनीति हमारे देश में चल रही है और जिस तरह क्षेत्रीय दलों का कई राज्यों में वर्चस्व है ,ऐसे में एक साथ चुनाव कराने की कहानी जमीन पर उतरती नहीं दिख रही। आगे इस पर क्या बात होती है इसे देखना पडेगा।

उधर एक साथ चुनाव कराने को लेकर बीजेपी की सहयोगी पार्टी जदयू के मुखिया और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कुछ अलग ही विचार रख रहे हैं। वे मोदी की आइडिया से सहमत नहीं दीखते। नीतीश कुमार का कहना है कि राज्य चुनाव और लोकसभा चुनाव एक साथ होने की कोई संभावना नहीं है। गुजरात और कर्नाटका जैसे राज्यों के लिए एक साथ होने वाले चुनाव संभव नहीं है।

ऐसे में कहा जा सकता है कि नीतीश कुमार की इस बात से ऐसा लगता है कि वे विपक्ष के साथ खड़े हैं जिनके साथ उन्होंने महागठबंधन की सरकार तोड़कर बीजेपी से गठबंधन कर नई सरकार बना ली थी। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों और लोकसभा चुनाव एक साथ करने का आइडिया दिया था।

प्रधानमंत्री के इस आइडिया का विपक्ष निरंतर विरोध कर रहा है। पटना में आयोजित पार्टी की इंटरनल कांफ्रेंस के दौरान नीतीश कुमार ने कहा “बिहार विधानसभा चुनाव अपने समय पर साल 2020 में अक्टूबर-नवंबर में ही होंगे और जैसा कि मीडिया में अफवाह है कि अगले साल चुनाव आयोजित किए जाएंगे तो ऐसा नहीं होगा।” इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर वे एक साथ चुनाव करने के आइडिया का समर्थन करते हैं तो यह संभव नहीं होगा। नीतीश ने कहा “क्या आप यह सोच सकते हैं कि जहां गुजरात में अभी चुनाव हुए हैं, वहां पर अगले साल फिर से चुनाव हों, या कर्नाटका मे जहां कुछ ही महीनों में चुनाव हैं वहां फिर से अगले साल चुनाव कैसे संभव है।

आपको बता दें कि आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और लेफ्ट जैसी पार्टियां काफी समय से एक साथ सभी चुनाव के आइडिया को लेकर बीजेपी से सवाल कर रही हैं। इतना ही नहीं विपक्षी पार्टियों का यह भी कहना है कि अगर एक साथ चुनाव होते हैं तो यह संघीय सिद्धांतों के खिलाफ होगा। लेकिन अब जबकि राष्ट्रपति ने भी एक साथ चुनाव कराने को लेकर आपसी सहमति बनाने की बात कही है तो लगता है कि आज नहीं तो कल इस दिशा में कदम उठेंगे ही।

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