एमपी की तीन नई पार्टियां कांग्रेस और बीजेपी के लिए खतरा

दिल्ली ब्यूरो: मध्यप्रदेश में बीजेपी को हारने के लिए कांग्रेस ने जो सोंचा था वह नहीं हुआ। मायावती और अखिलेश कांग्रेस के साथ नहीं आये। कांग्रेस को इन दोनों दलों ने सम्मानित किया या फिर अपमानित अभी यह कोई नहीं जानता। चुनाव के बाद ही इस खेल का पर्दा उठेगा। लेकिन यह तो साफ़ है कि अगर कांग्रेस ,बसपा और सपा मिलकर चुनाव लड़ते तो बीजेपी की परेशानी बढ़ती। लेकिन अब बीजेपी और कांग्रेस आमने सामने हैं और बाकी पार्टियां कांग्रेस और बीजेपी को भ्रमित किये है। इस बीच राज्य में तीन नये राजनीतिक दलों का गठन किया गया है। जिस पर कोई चर्चा नहीं हो रही है। पहला अगड़ी जातियों के लोगों के द्वारा, दूसरा आदिवासी नेताओं द्वारा और तीसरा पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव द्वारा। कुछ पार्टियों ने आपस में मोर्चेबंदी भी कर ली है। इसलिए यह भविष्यवाणी करना मुश्किल है कि इन नई पार्टियों से भाजपा को कितना नुकसान होगा और कांग्रेस को कितना नुकसान होगा। लेकिन इतना तय है कि ये पार्टियां खेल करेगी।

सामान्य वर्ग पिछड़ा अल्पसंख्यक कल्याण समिति आरक्षण और एससी-एसटी रोकथाम अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही है। इसने अधिनियम के खिलाफ अपने विरोध जाहिर करने के लिए राज्य में कई रैलियों का आयोजन किया। अब इसने खुद को एक राजनीतिक दल में बदलने का फैसला किया है। इस संगठन में ज्यादातर नौकरशाहों और पेशेवरों का समावेशन है। यह नई राजनीतिक पार्टी सपक्स समाज पार्टी के रूप में जानी जाएगी। पूर्व आईएएस अधिकारी हीरालाल त्रिवेदी इसके अध्यक्ष हैं। सेवानिवृत्त महिला आईएएस अधिकारी वीना घनेकर को उपाध्यक्ष बनाया गया है। दोनों की आवाजे प्रदेश की जनता खूब सुन रही है। साथ भी दे रही है और भीड़ भी जुट रही है।

नई पार्टी की अध्यक्षता स्वीकार करने के बाद त्रिवेदी ने सभी 230 सीटों पर चुनाव लड़ने की पार्टी की योजना की घोषणा की। आरक्षण और एससी-एसटी अत्याचार अधिनियम में संशोधन के विरोध में रैलियों में भारी भीड़ से उत्साहित, सपक्स समाज पार्टी राज्य के दोनों प्रमुख खिलाड़ियों को चुनौती देगी। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पदाधिकारियों की घोषणा और अपने कार्यालय में पार्टी ध्वज जारी करते हुए त्रिवेदी ने कहा कि सपक्स समाज के सभी सदस्य पार्टी कार्यकर्ता बन सकते हैं बशर्ते उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड न हो। त्रिवेदी ने कहा कि उनकी पार्टी बहुमत प्राप्त करेगी। जब पूछा गया कि वह किस आधार पर इनता बड़ा दावा कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि समाज यही चाहता है और हम राज्य में यात्रा करते समय लोगों की नाड़ी महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी भी नई थी, लेकिन गठन के तुरंत बाद हुए चुनाव में सफल होकर उसने अपनी सरकार बना ली थी।

आदिवासियों के प्रतिनिधियों द्वारा गठित संगठन से बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए एक और चुनौती आई है। इस संगठन को जय युवा आदिवासी संघ के रूप में जाना जाता है। संगठन ने कुक्षी में एक सम्मेलन आयोजित किया। आश्चर्यजनक रूप से प्रसिद्ध अभिनेता गोविंदा ने सम्मेलन में भाग लिया और आदिवासियों से उनकी ताकत का एहसास करने के लिए कहा। सम्मेलन में धार, रतलाम, झाबुआ, अलीरागपुर, बदवानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, बेतुल और देवास के युवा जनजातीय नेताओं ने भाग लिया था। गुजरात और महाराष्ट्र से प्रतिनिधि भी आए। अधिकांश प्रतिभागी जनजातीय युवा थे। संगठन के अध्यक्ष डॉ हीरलाल ने घोषणा की कि वे 80 जनजातीय वर्चस्व वाली सीटों में उम्मीदवार खड़े करेंगे। उनका नारा होगा अगला मुख्यमंत्री आदिवासी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल ने आदिवासियों के कल्याण की परवाह नहीं की है, इसलिए समय आ गया है जब हमें अपने हितों का ख्याल रखना चाहिए। जब उनके पास शक्ति होगी तो यह संभव होगा।

शरद यादव ने एक और मोर्चे की घोषणा की है। इस मोर्चे में लोकतंत्रिक जनता दल, एसपी, सीपीआई, सीपीएम, बहुजन संघर्ष दल, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, राष्ट्रीय समता दल और प्रजातंत्रिक समाधान पार्टी शामिल हैं। इस मोर्चा के साथ भी जनता है। भीड़ भी जुट रही है और दावे भी कम नहीं है। बता दें कि जिस तरह से आदिवासी युवा और सपक्स समाज पार्टी जनता के बीच काम करती दिख रही है उससे लगने लगा है कि मध्यप्रदेश का चुनावी खेल इस बार कुछ और ही होनेवाला है। शायद ही किसी को बहुमत मिल सके। कुल मिलकर दर्जन भर पार्टियां चुनावी मैदान में हैं लेकिन आदिवासियों की पार्टी बहुत कुछ कहती दिख रही है।

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