एमपी में 82 आरक्षित सीटों पर नजर गड़ाए बैठी है बीएसपी

दिल्ली ब्यूरो: मध्य प्रदेश में भले ही लड़ाई कांग्रेस और बीजेपी के बीच है लेकिन बसपा जिस तरह से घेराबंदी कर रही है उससे कांग्रेस और बीजेपी किपरेशानि बढ़ सकती है। प्रदेश की कुल 230 सीटों में 148 सीटें सामान्य हैं। जबकि 35 अनुसूचित जाति के आरक्षित हैं और 47 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। ऐसे मायावती और उनकी पार्टी के समर्थक अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति की 82 सीटों पर पूरे दमखम के साथ चुनाव प्रचार में लगे हैं।मायावती खुले तौर अनुसूचित जाति और दबे-कुचैलों की राजनीति करने की पक्षधर हैं। ऐसे में इन 82 सीटों पर बीएसपी भले जिताऊं उम्मीदवार ना खड़े पाए लेकिन ऐसे प्रत्याशी मैदान में उतार ले गई जो निर्णायक वोट खींचने में सफल हो गए तो प्रदेश की राजनीति का सिरा ही बदल जाएगा।

बता दें कि साल 2013 मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कुल 66 पार्टियों ने उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। जबकि निर्दलीय और नोटा को जोड़ दें तो मतदाताओं के पास कुल 68 विकल्प थे, लेकिन मतदाताओं ने तीसरी बार शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई वाली भारतीय जनता पार्टी को बहुमत से जिताया। बीजेपी ने कुल 165 सीटों पर धुआंधार जीत दर्ज की थी।इसके बाद नंबर था कांग्रेस का, जिसे कुल 58 सीटों पर जीत मिली थी। लेकिन 66 पार्टियों में अगर इन दो पार्टियों के अलावा किसी पार्टी के उम्मीदवार जीत दर्ज करने में सफल हुए तो वो बीएसपी है। बीएसपी को तब कुल 4 सीटों पर जीत मिली थी। इसके अलावा 3 निर्दलीय उम्मीदवार भी जीत थे।

साल 2013 के चुनाव में बीएसपी की भले ही 194 सीटों पर जमानत जब्त हो गई हो, पर 50 से ज्यादा सीटों पर बीएसपी तीसरे नंबर काबिज थी। जबकि करीब 100 सीटों पर टॉप 5 पार्टी में शामिल थी।ऐसे में जिन सीटों पर कांग्रेस और बीजेपी के उम्मीदवारों में जीत-हार का अंतर कम होगा, वहां बीएसपी उम्मदवार कुछ वोट निकालने में सफल हुआ तो बाजी चित से पट और पट से चित हो सकती है।बता दें कि बीएसपी के पास मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस की तुलना में कार्यकर्ताओं की संख्या कम है। लेकिन मायावती का माइक्रो मैनजेमेंट सिस्‍ट तगड़ा है। पार्टी सोशल मीडिया से लोगों लुभाने के बजाए लोगों से सीधे सम्पर्क में विश्वास रखती है।

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