एम्बुलेंस का दरवाजा नहीं खुलने से गई मासूम की जान, शव ले जाने के लिए भी नहीं मिला वाहन

रायपुर। एक तरफ जहां 108 संजीवनी एक्सप्रेस के अस्थाई कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर इस एम्बुलेंस सेवा से जुड़ा एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है। दिल में छेद की बीमारी से पीड़ित दो माह के बच्चे को रायपुर के अंबेडकर अस्पताल लाया गया लेकिन अस्पताल पहुंचने पर 108 एम्बुलेंस का दरवाजा लॉक होने के चलते बच्चे का दम घुट गया। करीब ढाई घंटे तक बच्चा एम्बुलेंस में बंद रहा और इस दौरान एम्बुलेंस में ऑक्सीजन गैस भी खत्म हो गई।

दिल्ली से एक मासूम बच्चे को लेकर उसके माता-पिता इलाज के लिए मंगलवार सुबह रायपुर पहुंचे। मूलत: बिहार राज्य के गया के निवासी अंबिका अपने दो माह के बच्चे का इलाज नया रायपुर स्थित सत्यसाईं हार्ट सेंटर में कराने के लिए यहां पहुंचे थे। रायपुर रेलवे स्टेशन पर उन्होंने 108 एम्बुलेंस ली। यहां से सत्यसाईं हार्ट सेंटर करीब 40 किमी. दूर है। 108 एम्बुलेंस से नियमतः किसी भी बीमार को पहले सरकारी अस्पताल लाया जाता है और फिर किसी दूसरे अस्पताल में रेफर कराने का नियम है।

इसलिए रायपुर स्टेशन से बच्चे को 108 एम्बुलेंस से पहले अंबेडकर अस्पताल (मेकाहारा) लाया गया। अस्पताल पहुंचने पर एम्बुलेंस का दरवाजा लॉक हो गया। काफी मशक्कत के बावजूद एम्बुलेंस का दरवाजा नहीं खुला और इस बीच एम्बुलेंस में आॅक्सीजन गैस भी ख़त्म हो गई। आॅक्सीजन की कमी से मासूम बच्चे ने एम्बुलेंस के भीतर ही दम तोड़ दिया।

मासूम की मौत के बाद शव को श्मशान घाट ले जाने के लिए अस्पताल प्रशासन की तरफ से शव वाहन भी उपलब्ध नहीं कराया गया। हालांकि बाद में पूर्व विधायक कुलदीप जुनेजा के साथ ऑटो से बच्चे का शव श्मशान घाट लाया जा सका। इस दर्दनाक हादसे के बाद बच्चे के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। फिलहाल इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं।

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