एससी-एसटी एक्ट का दुरुपयोग रोकने के विरोध में वकीलों ने सड़क जाम कर किया प्रदर्शन

नई दिल्ली: एससी-एसटी एक्ट का दुरुपयोग रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के विरोध में दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट में वकीलों ने सड़क जाम कर दी। वकीलों के मुताबिक अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के खिलाफ हो रहे अत्याचारों को रोकने के लिए बनाए गए इस कानून को कमजोर करने के दूरगामी परिणाम होंगे। इन वकीलों ने सोमवार को कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर में नारेबाजी की और कोर्ट के सामने मुख्य सड़क पर जाम लगाया। ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन की दिल्ली के एडिशनल सेक्रेटरी सुनील कुमार भी आंदोलन को समर्थन देने के लिए खुद वकीलों के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले 20 मार्च को लोकसेवकों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट का दुरुपयोग रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि लोकसेवक को गिरफ्तार करने से पहले सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेना जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत देने पर कोई रोक नहीं है। निचली अदालत इस मामले में अग्रिम जमानत भी दे सकती है। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस यूयू ललित की बेंच ने इस सवाल की पड़ताल की थी कि क्या अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) (एससी-एसटी एक्ट) 1989 के प्रावधानों का दुरुपयोग रोकने के लिए सुरक्षात्मक उपाय जारी किए जा सकते हैं ।

कोर्ट ने निर्देश देते हुए कहा था कि अत्याचार अधिनियम के तहत अपराधों के संबंध में गिरफ्तारी के लिए किसी भी अन्य स्वतंत्र अपराध के अभाव में, यदि कोई आरोपी सार्वजनिक कर्मचारी है तो नियुक्ति प्राधिकारी की लिखित अनुमति के बिना और अगर कोई आरोपी एक सार्वजनिक कर्मचारी नहीं है तो जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की लिखित अनुमति के बिना गिरफ्तारी नहीं हो सकती है। ऐसी अनुमतियों के लिए किए जाने वाले कारणों को दर्ज किया जाना चाहिए और संबंधित कोर्ट में पेश किया जाना चाहिए। मजिस्ट्रेट को दर्ज कारणों पर अपना दिमाग लागू करना चाहिए और आगे हिरासत में रखने की अनुमति केवल तभी दी जानी चाहिए जब दर्ज किए गए कारण मान्य हैं।

कोर्ट ने निर्देश दिए थे कि निर्दोष को झूठी शिकायत से बचाने के लिए संबंधित डीएसपी प्रारंभिक जांच करेंगे और पता लगाएंगे कि आरोपों में अत्याचार अधिनियम के तहत आरोप तुच्छ या प्रेरित नहीं हैं। कोर्ट ने कहा कि एससी-एसटी एक्ट के तहत मामलों में अगर प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता या जहां न्यायिक जांच की जा रही है और पहली नजर में शिकायत झूठी या जानबूझकर दर्ज पाई गई तो अग्रिम जमानत देने पर कोई रोक नहीं है। केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की पार्टी लोकजनशक्ति पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल की है।

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