एससी-एसटी एक्ट पर पुनर्विचार के लिए शीर्ष कोर्ट का रुख करेंगे मप्र, छग और राजस्थान

नई दिल्ली: एससी-एसटी एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था का मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे भाजपा शासित राज्यों पर कोई असर नहीं पड़े, इसके लिए ये राज्य सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने पर विचार कर रहे हैं। इस राज्यों में जल्दी ही विधानसभा चुनाव होने हैं, और सत्तारूढ़ भाजपा सरकारों को डर है कि सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा प्रावधानों का चुनाव परिणामों पर असर पड़ सकता है। केंद्र सरकार ने पहले ही इस संबंध में याचिका दाखिल कर पुनर्विचार की मांग कर चुकी है।

यही वजह है कि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की सहमति से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान सरकारें इस मामले में पार्टी बनने वाली हैं। राज्य सरकारें अपनी याचिका में कहेंगी कि एससी-एसटी एक्ट पर अदालत के फैसले से इसका उद्देश्य कमजोर हुआ है, ऐसे में इस पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। दलित और आदिवासी समाज में गुस्से और विपक्ष के हमलावर रुख को देखते हुए तीनों चुनावी राज्यों ने याचिका दाखिल करने का फैसला लिया है। इनके अलावा तमिलनाडु ने भी इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का फैसला किया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि राज्य भी इस फैसले पर पुनर्विचार के पक्ष में हैं।

उल्लेखनीय है कि इन तीनों ही राज्यों में अनुसूचित जातियों और जनजातियों की बड़ी आबादी है। ऐसे में भाजपा को अंदेशा है कि यदि एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जनता में गलत संदेश गया तो फिर उसकी चुनावी संभावनाओं पर असर पड़ सकता है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा काफी समय से सत्ता में है। भाजपा शासित राज्यों ने यह फैसला ऐसे वक्त में लिया है, जबकि केंद्र सरकार इसे लेकर अध्यादेश लाने की भी तैयारी में है। केंद्र की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उसने अपने फैसले में एक्ट के किसी भी प्रावधान को कमजोर नहीं किया है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि कानून अन्यायपूर्ण नहीं होना चाहिए और निर्दोष व्यक्ति को न्याय मिलना चाहिए। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों से इस मुद्दे पर बात की है और उन्हें कोर्ट में जाने की अनुमति दी है। आदिवासी बहुल राज्य छत्तीसगढ़ के सीएम रमन सिंह ने कहा कि उन्होंने पुलिस विभाग को 20 मार्च के आदेश को लेकर जारी सर्कुलर को वापस लेने को कहा है।

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