ऐसा हो बच्चों का कमरा तो भविष्य सुनहरा

नई दिल्ली: हर कोई चाहता है कि उसका बच्चा जीवन में खूब तरक्की करे और नाम कमाए, लेकिन सभी की मंशा पूरी नहीं हो पाती। आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? दरअसल, वास्तु दोष के कारण भी बच्चे व सफलता नहीं हासिल कर पाते, जो उन्हें मिलनी चाहिए। ऐसे में आप सिर्फ बच्चे का कमरा वास्तु के अनुरूप करके परिस्थितियां ठीक कर सकते हैं। वास्तु अनुरूप परिवर्तन से बच्चे के मानसिक विकास एवं उसकी ग्रहण क्षमता में शुभ परिवर्तन नजर आएगा। इस वास्तु परिवर्तन के पश्चात बच्चा मन लगाकर पढ़ेगा तथा उसका स्वास्थ्य भी अनुकूल रहेगा।

– घर में बच्चों का कमरा पूर्व, उत्तर, पश्चिम या वायव्य में होना चाहिए। दक्षिण, नैऋत्य या आग्नेय में कमरा नहीं होना चाहिए।
– कमरे का रंग-रोगन पूर्ण रूप से बच्चे के शुभ रंग के अनुसार होना चाहिए।
– गृह स्वामी को अपने घर के संपूर्ण वास्तु-विचार के साथ अपने बच्चों के कमरे के वास्तु का भी ध्यान रखना चाहिए। बच्चों की उन्नति के लिए उनका वास्तु अनुकूल कमरे में निवास करना आवश्यक है।
– यदि बच्चे एक या उससे अधिक हों तो जो बच्चा बड़ा हो तथा महत्वपूर्ण विद्यार्जन कर रहा हो, उसके अनुसार दीवारों का रंग होना चाहिए।
– यदि दोनों बच्चे हमउम्र हों तो उनके कमरे में दो भिन्न-भिन्न शुभ रंगों का प्रयोग किया जा सकता है।
– पर्दों का रंग दीवार के रंग से थोड़ा गहरा होना चाहिए।
– बच्चों का पलंग अधिक ऊंचा नहीं होना चाहिए और वह इस तरह से रखा जाए कि बच्चों का सिरहाना पूर्व दिशा की ओर हो तथा पैर पश्चिम की ओर रहें।
– बिस्तर के उत्तर दिशा की ओर मेज और कुर्सी होनी चाहिए।
– पढ़ते समय बच्चे का मुंह पूर्व दिशा की ओर तथा पीठ पश्चिम दिशा की ओर होनी चाहिए।
– यदि कम्प्यूटर भी बच्चे के कमरे में रखना हो तो पलंग से दक्षिण दिशा की ओर आग्नेय कोण में कम्प्यूटर रखा जा सकता है।
-यदि बच्चे के कमरे का दरवाजा ही पूर्व दिशा में हो तो पलंग दक्षिण से उत्तर की ओर होना चाहिए। सिरहाना दक्षिण में तथा पैर उत्तर में।
– ऐसी स्थिति में कम्प्यूटर टेबल के पास ही पूर्व की ओर स्टडी टेबल स्थित होनी चाहिए।
– नैऋत्य कोण में बच्चों की पुस्तकों की रैक तथा उनके कपड़ों वाली अलमारी होनी चाहिए।
– यदि कमरे से अटैच बाथरूम हो तो पश्चिम अथवा वायव्य दिशा में हो सकता है।
– बच्चों के कमरे में पर्याप्त रोशनी आनी चाहिए। व्यवस्था ऐसी हो कि दिन में पढ़ते समय उन्हें कृत्रिम रोशनी की आवश्यकता ही न हो।
– जहां तक संभव हो बच्चों के कमरे की उत्तर दिशा बिलकुल खाली रखना चाहिए।
– किताबों की रैक नैऋत्य कोण में स्थित हो सकती है।
– खिड़की, एसी और कूलर उत्तर दिशा की ओर हो।
– बच्चों के कमरे में स्थित चित्र एवं पेंटिंग की स्थिति उनके विचारों को प्रभावित करती है इसलिए हिंसात्मक, फूहड़ एवं भड़काऊ पेंटिंग्स एवं चित्र कमरे में कभी नहीं होना चाहिए।
– महापुरुषों के चित्र, पालतू जानवरों के चित्र, प्राकृतिक सौंदर्य वाले चित्र तथा पेंटिंग्स बच्चों के कमरे में हो सकती हैं।
– भगवान गणेश और सरस्वतीजी का चित्र कमरे के पूर्वी भाग की ओर होना चाहिए। इन दोनों की देवी-देवताओं को बुद्धिदाता माना जाता है।
– आपका बच्चा जिस क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देख रहा है, उस करियर में उच्च सफलता प्राप्त व्यक्तियों के चित्र अथवा पेंटिंग भी आप अपने बच्चों के कमरे में लगा सकते हैं।
– यदि बच्चा छोटा हो, तो कार्टून आदि की पेंटिंग लगाई जा सकती है।

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