ऐसे भी हैं पतिदेव!

हर नौजवान की ख्वाहिश होती है कि उन्हें पढ़ी-लिखी पत्नी मिले। सर्विस में हो, तो और भी अच्छा, लेकिन कुछ ऐसे भी दकियानूसी नौजवान हैं, जो पढ़ी-लिखी पत्नी, तो चाहते हैं, लेकिन अपने से कम या बराबर। ज्यादा कतई नहीं। ऐसा ही एक मामला बरेली कॉलेज में तब सामने आया जब एक युवक ने एडमिशन कंट्रोलर से अनुरोध किया कि उसकी पत्नी को एमए में दाखिला न दिया जाए। वजह पूछने पर कहा कि पत्नी उससे ज्यादा पढ़-लिख जाएगी, तो वह उसके हाथ से निकल जाएगी। उसकी बात नहीं सुनेगी।

मामला यूं है। 12 जुलाई को दोपहर का वक्त था। यह युवक बरेली कॉलेज में एडमिशन कंट्रोलर डॉ. आरिफ से मिला। उसने एमए इतिहास में एडमिशन के बारे में जानकारी चाही, तो एडमिशन कंट्रोलर ने उससे पूछ लिया, क्या उसका नाम मेरिट लिस्ट में है? जवाब में युवक ने कहा कि उसका नहीं, बल्कि उसकी पत्नी का है। लिस्ट देखी गई, तो उसकी पत्नी का नाम पहली मेरिट लिस्ट में मिला। एडमिशन कंट्रोलर अगला सवाल करते उससे पहले ही युवक ने तपाक से उनसे अनुरोध किया कि उसकी पत्नी को दाखिला न दिया जाए। उसके अनुरोध पर चौंके एडमिशन कंट्रोलर ने इसकी वजह पूछी, तो युवक का कहना था कि वह और उसकी पत्नी दोनों बीए हैं।

अगर पत्नी एमए कर लेगी, तो वह उसके हाथ से निकल जाएगी। उसकी बात नहीं सुनेगी। साथ ही यह भी बताया कि उसकी मां का भी कहना है कि बहू को खुद से ज्यादा मत पढ़ाना वरना पछताएगा। पत्नी के कहने पर फार्म भरवाने वाले इस युवक ने कहा कि मां की इस बात से उसकी आंख खुल गई है। इसलिए चाहता हूं कि पत्नी को दाखिला न दिया जाए। इस पर एडमिशन कंट्रोलर ने युवक से जब यह पूछा कि उसे यह कैसे मालूम हुआ कि मेरिट लिस्ट में उसकी पत्नी का नाम है, तो उसने बताया कि फॉर्म में उसने अपना फोन नम्बर डाला था।

उसके नम्बर पर ही यह सूचना मिली कि दाखिले के लिए पत्नी को कॉल किया गया है। सारी बातें जान लेने के बाद युवक को एडमिशन कंट्रोलर ने समझाया कि महिलाएं पढ़-लिख लेंगी, तो आत्मनिर्भर बनेंगी। इसलिए अपनी पत्नी का एडमीशन उसे करा देना चाहिए।

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