ऐ मेरे वतन के लोगों…

बॉलीवुड में जंग-ए-आजादी की याद दिलाने वाली ऐसी कई देशभक्ति फिल्में बनी हैं, जो हमारी आजादी के संघर्ष की गाथा को बखूबी बयान करती हैं और देशभक्ति का जज्बा जगाती हैं। ये फिल्में उस दर्द को हम सबके सामने लाईं जिसे शायद ही हम कभी महसूस कर पाते। फिल्म ‘उपकार’ का गीत ‘मेरे देश की धरती सोना उगले…’ आपको याद ही होगा, जो किसी भी दर्शक की आंखें नम करने के लिए काफी है। इसके अलावा स्वर कोकिला लता मंगेशकर का गाया गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी…’ जिसे सुनकर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की आंखें भी भीग गई थीं, आज भी लोगों को भाव-विभोर कर देता है।

इसके अलावा भी कई फिल्में हैं, जिन्हें देख कर हम देश के प्रति अपने प्रेम भाव को व्यक्त करने के लिए मजबूर हो जाते हैं। इस साल हम अपनी आजादी के 71 साल पूरे कर रहे हैं, लेकिन हमारे जोश और जज्बे में कोई कमी नहीं है। बॉलीवुड ने भी आजादी के मतवालों को श्रद्धांजलि देते हुए समय-समय पर फिल्में बनाई हैं। उनमें से कुछ इतनी जीवंत और यादगार हैं कि उनको देखते वक्त लगता है कि हम उसी काल में पहुंच गए हैं। आज हम उन्हीं फिल्मों के बारे में बात करेंगे जो स्वतंत्रता संग्राम के महान नायकों के अविस्मरणीय योगदान को समॢपत हैं।

‘शहीद भगत सिंह’ पर बनी फिल्में : बॉलीवुड में अगर किसी क्रांतिकारी योद्धा पर सबसे ज्यादा फिल्में बनी हैं, तो वह हैं शहीद भगत सिंह। उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर सबसे पहली फिल्म बनी 1954 में- ‘शहीद-ए-आजम भगत सिंह’। इस फिल्म में प्रेम अदीब, स्मृति विश्वास और जॉनी वॉकर लीड रोल में थे। उसके बाद 1965 में आई फिल्म ‘शहीद’। इस फिल्म में भगत सिंह का रोल मनोज कुमार ने किया था। कहानी स्वयं भगत सिंह के साथी बटुकेश्वर दत्त ने लिखी थी। फिल्म में अमर शहीद राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ के गीत थे। स्वतंत्रता संग्राम पर आधारित यह अब तक की सर्वश्रेष्ठ प्रामाणिक फिल्म है।

फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। केवल कश्यप इसके निर्माता थे। डायरेक्शन एस.राम शर्मा का था। इसके बाद 1974 में आई फिल्म ‘अमर शहीद भगत सिंह’। चौथी फिल्म बनी ‘द लीजेंड ऑफ भगत सिंह’, जो साल 2002 में आई थी। फिल्म के साथ-साथ गाने भी हिट हुए थे। राजकुमार संतोषी इसके डायरेक्टर थे। इसमें अजय देवगन, सुशांत सिंह, अमृता राव, राज बब्बर और फरीदा जलाल थीं। इसी साल एक और फिल्म बनी, ‘मार्च 1931- शहीद’। इस फिल्म में बॉबी देओल, सनी देओल, सुरेश ओबरॉय, अमृता भसह, राहुल देव ने काम किया था।

सरदार वल्लभभाई पटेल पर बनी फिल्म : लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन पर बनी फिल्म ‘सरदार’ 1994 में रिलीज हुई थी। इसमें स्वतंत्रता की लड़ाई से लेकर अखंड भारत के उनके प्रयासों को दिखाया गया था। परेश रावल ने इसमें मुख्य भूमिका निभाई थी, जो काबिलेतारीफ थी। जाने-माने नाटककार विजय तेंदुलकर ने इसकी स्क्रिप्ट लिखी थी, जबकि निर्देशन केतन मेहता का था।

नेताजी पर बनी फिल्म : डायरेक्टर श्याम बेनेगल ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जिंदगी पर आधारित एक फिल्म बनाई थी- ‘बोस : द फॉरगॉटन हीरो’। यह फिल्म 2004 में आई थी। इस फिल्म में नेताजी की भूमिका निभाई सचिन खेडेकर ने।
इस फिल्म को नरगिस दत्त नेशनल अवॉर्ड के लिए चुना गया था। इस फिल्म में देश को आजाद कराने के लिए नेताजी के संघर्ष को बखूबी दिखाया गया है।

मंगल पांडे फिल्म में आमिर खान : अंग्रेजी हुकूमत की चूलें हिला देने वाले पहले भारतीय नायक मंगल पांडे द्वारा शुरू किया गया विद्रोह पूरे देश में आग की तरह फैल गया था। देश के इस महान क्रांतिकारी पर बॉलीवुड डायरेक्टर केतन मेहता ने फिल्म ‘मंगल पांडे- द राइजिंग’ बनाई। इसमें मंगल पांडे का किरदार आमिर खान ने निभाया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ा धमाल तो नहीं कर पाई, लेकिन फिल्म में कई ऐसी खूबियां थी जिसने दर्शकों का दिल जीत लिया था।

और भी हैं फिल्में

वर्ष 1952 में आई फिल्म ‘आनंद मठ’ बंकिम चंद्र चटर्जी के नॉवल पर आधारित थी। फिल्म संन्यासी क्रांतिकारियों की आजादी की लड़ाई की कहानी थी, जो 18वीं शताब्दी में अंग्रेजों के खिलाफ हुई थी। इस फिल्म में ‘वंदे मातरम’ गीत का भी इस्तेमाल किया गया था। 1997 में आई फिल्म ‘बॉर्डर’ 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध पर आधारित थी। इस फिल्म की कहानी एक सत्य घटना से प्रेरित थी। इस फिल्म में भारत-पाक युद्ध के समय लड़े गए लोंगेवाला युद्ध को विस्तार से समझाया गया है। 2012 में आई फिल्म ‘चिटगॉन्ग’ 1930 की कम चॢचत घटना पर आधारित थी, जिसमें एक स्कूल मास्टर (मनोज वाजपेयी) की अगुवाई में स्कूल के बच्चे और औरतें अंग्रेजी हुकूमत से भिड़ जाते हैं। ‘गांधी’ 1982 में बनी मोहनदास करमचंद गांधी के वास्तविक जीवन पर आधारित फिल्म थी।

फिल्म का निर्देशन रिचर्ड एटनबरो ने किया था और इसमें बेन ङ्क्षकग्सले गांधी की भूमिका में थे। इस फिल्म के लिए दोनों को अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 1964 में आई फिल्म ‘हकीकत’ ऐसे सैनिकों की टुकड़ी की कहानी थी, जो लद्दाख में भारत-चीन युद्ध के दौरान सोचते हैं कि उनकी मौत निश्चित है, लेकिन उनमें से कुछ सैनिकों को कैप्टन बहादुर सिंह (धर्मेंद्र) बचाने में सफल हुए थे। 1967 में आई फिल्म ‘उपकार’ देशभक्ति से ओतप्रोत फिल्म है, जिसे बनाने का उद्देश्य था ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा बुलंद करना। ‘लक्ष्य’ 2004 में बनी हिंदी भाषा की फरहान अख्तर द्वारा निर्देशित बॉलीवुड फिल्म थी। इसके अभिनेता ऋतिक रोशन, प्रीति जिंटा, अमिताभ बच्चन, ओम पुरी और बोमन ईरानी हैं। यह 1999 के करगिल युद्ध के संघर्ष की ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित एक काल्पनिक कहानी थी।

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