ओबामा केयर की तरह मोदी केयर के जरिए भारत को मोदीमय करने का खेल

अखिलेश अखिल


लखनऊ ट्रिब्यून दिल्ली ब्यूरो: इस बात में कोई शक नहीं की जेटली का यह बजट भारत को लुभा रहा है और इंडिया को रुला रहा है। मोदी सरकार ने अपने इस आखिरी पूर्ण बजट के जरिये ग्रामीण भारत को पूरी तरह से मोदीमय करने का नया जाल फेका है। जाल अगर निशाने पर टिक गया और घोषित योजनाएं भारत को लाभान्वित करने लगी तो तय मानिये अगला चुनाव फिर से मोदीमय होगा और बीजेपी की जीत बड़े स्तर पर होगी। भारत को समर्पित जेटली का यह बजट आजाद भारत में पहली बार घोषणा करता दिख रहा है जिसमे आंकड़े नहीं है। लेकिन घोषणाओं से डर भी लगता है। पूर्व में की गयी तमाम घोषणाएं जुमले जो साबित हो गए थे। जेटली का यह बजट कृषि और ग्रामीण क्षेत्र के विकास के लिए अपनी प्रतिबद्धता दर्शाता है।ग्रामीण भारत के लिए, गरीब परिवारों के स्वास्थ्य के लिए, राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए और कृषि क्षेत्र के लिए यह बजट बहुत शानदार है।

लगता है ओबामा केयर की तर्ज पर अब तक की सबसे बड़ी राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना ‘आयुष्मान भारत’ योजना को भारत के दस करोड़ गरीब परिवारों के लिए एक ‘मोदी केयर’ योजना माना जा सकता है। भारत में ऐसी योजना की जरूरत भी है। यह योजना अगर सफल हो जाय तो भारत को बड़ा लाभ होगा ,ग्रामीण भारत की तक़दीर बदल जायेगी। इस योजना के तहत 50 करोड़ लोगों को हर साल पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा मिलेगा। इसका अर्थ यह है कि यह बजट ग्रामीण वोट का बैंक बैलेंस बढ़ानेवाला बजट है।

जिस तरह से यूपीए सरकार का ‘मनरेगा’ एक बहुत बड़ी योजना थी, जिसने ग्रामीण भारत को सशक्त करने में एक बड़ी भूमिका निभायी थी, ठीक उसी तरह से ‘आयुष्मान भारत’ भी एक बड़ी स्वास्थ्य योजना है। ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों के स्वास्थ्य के लिए यह बहुत जरूरी था, क्योंकि गरीब लोग महंगे इलाज के चलते एक तो इलाज नहीं करा पाते, या फिर इलाज कराकर और गरीब होते रहते हैं। ग्रामीण भारत की हालत को देखते हुए छोटे उद्योगों के लिए कॉरपोरेट टैक्स को 30 प्रतिशत से कम करके 25 प्रतिशत कर दिया है. यानी 250 करोड़ से कम टर्नओवर वाली कंपनियों अब 25 प्रतिशत टैक्स देना होगा। इसका अर्थ यह है कि कृषि और ग्रामीण केंद्रित कंपनियों के लिए यह बहुत फायदेमंद होगा।

आज भी साठ प्रतिशत लोग गांवों में रहते हैं और सत्तर प्रतिशत लोग कृषि से जुड़े रोजगार से जुड़े हुए हैं। ग्रामीण योजनाएं जो जेटली ने घोषणा की है अगर लागू हो जाए तो देश बदल जाएगा। ऑपरेशन ग्रीन, फूड प्रोसेसिंग, ऑर्गेनिक खेती, किसान क्रेडिट कार्ड, कृषि ऋण को 10 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 11 लाख करोड़ रुपये किया जाना, ये सारे कदम अपनी जगह बहुत सही हैं, लेकिन सरकार को यह भी सोचना चाहिए था कि देश में एक बड़ा मध्य वर्ग है और टैक्स देनेवाले लोग भी हैं, जो बढ़ रहे हैं, इनके लिए भी कुछ किये जाने की जरूरत थी। इस बार इस वर्ग के बजाय ग्रामीण भारत को लुभाया गया है। गांवों में इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए बजट में 14.34 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, यह बहुत शानदार आवंटन है, जो अगर सही से क्रियान्वयन हो गया, तो गांवों की तस्वीर बदल सकती है। इससे गांवों में जीविका के ढेर सारे साधन भी बनेंगे।

अब बजट पेश होने के बाद उसको अमल में लाने की बारी है। यह बजट भारत के नाम है और भारत को इसका लाभ मिलना चाहिए। जिस तरह कांग्रेस मनरेगा के जरिये सत्ता में 10 साल तक रही ठीक उसी तरह अगर मोदी केयर यह ग्रामीण योजनाएं ठीक से लागू हो गयी तो बीजेपी की राजनीती मजबूत हो जायेगी।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
Loading...
E-Paper