और जब लालू ने कहा अब तो रहम किया जाय हुजूर !

अखिलेश अखिल

संत -सन्यासियों के अपने अखाड़े होते हैं और उसी अखाड़े से संतों की पहचान जुडी होती है। कहने के लिए सारे अखाड़े से संत जुड़े होते हैं लेकिन दूसरा सत्य यह भी है कि हर अखाड़े की धार्मिक और राजनीतिक मान्यताएं अलग अलग है। एक अखाड़ा मौक़ा पाकर दूसरे पर तंज कसने में देरी नहीं करता। अखाड़े भी राजनीति के चक्कर लगाते हैं और राजनीति में जीते हैं। धार्मिक अखाड़ों की तरह ही राजनीतिक अखाड़े हैं। देश में जितनी पार्टियां राजनीति करते आप देख रहे हैं वह भी किसी अखाड़े से कम नहीं।

लोकतंत्र की रक्षा और जनता का कल्याण करने के उद्देश्य तो सभी के हैं लेकिन कोई भी राजनीतिक अखाड़ा रूपी दल किसी पार्टी को देखना तक नहीं चाहती। इसीलिए देश में कई अखाड़े हैं। जो अखाड़े की शुरुआत करते हैं वे महंथ होते हैं। राजनीतिक महंथ भी देश में कम नहीं है। दर्जनों राजनीतिक महंथ हमारे देश में बिराजमान हैं लेकिन लालू प्रसाद की महंथी कुछ अलग ही है। चारा घोटाला मामले में दोषी करार दिए गए लालू प्रसाद इन दिनों रांची जेल में बंद हैं। कई और मामले की सुनवाई चल रही है और लालू प्रसाद कोर्ट जाकर अपनी दलीलें देते फिर रहे हैं। गुरुवार को भी लालू प्रसाद कोर्ट में हाजिर हुए और जज से बातचीत की। यहां पेश है जज और लालू के बीच बातचीत के अंश –

चारा घोटाला के दो अलग-अलग मामलों में गुरुवार को सीबीआई के दो स्पेशल जज की अदालत में सुनवाई हुई। लालू के वकील चितरंजन प्रसाद ने बहस के दौरान कोर्ट को बताया कि पेश दस्तावेज में कहीं ऐसा सबूत नहीं आया है कि दुमका ट्रेजरी से एक ही दिन में 50.56 लाख की अवैध निकासी में उनके क्लाइंट लालू प्रसाद का हाथ है। इस दौरान मामले में सीबीआई की ओर से पेश गवाह दुमका के तत्कालीन डीसी अंजनी कुमार सिंह की गवाही की ओर कोर्ट का ध्यान दिलाया गया। स्पेशल जज शिवपाल सिंह ने पूछा कि उस समय दुमका के डीसी कौन थे और अभी वे कहां पोस्टेड हैं? तो लालू के वकील ने उन्हें बताया कि दुमका में 1991 से 1996 तक अंजनी कुमार सिंह डीसी की पोस्ट पर थे। वे अभी बिहार में चीफ सेक्रेटरी हैं। इस पर कोर्ट ने ताज्जुब जाहिर करते हुए कहा कि सीबीआई ने उन्हें इस मामले में अारोपी क्यों नहीं बनाया?

इसी दौरान आरोपी लालू प्रसाद मुस्कुराते हुए खड़े हुए और कहा- “सब सिस्टम का पार्ट है हुजूर… देख लिया जाए।” कोर्ट ने कहा- “आपकी गलती यही है कि आपने अपने आसपास अच्छे अफसरों का चुनाव नहीं किया था।” इस पर लालू ने कहा, “सब उस समय एक जैसा था। हुजूर, अभी आपका बहुत नाम हो रहा है। सब लोग आपको जान गए हैं।” इस पर कोर्ट ने कहा, “नहीं-नहीं, मेरा नाम नहीं हुआ है। मेरा नाम तो लालू प्रसाद की वजह से हुआ है।” इस पर लालू ने हंसते हुए कहा, “अब तो रहम किया जाए हुजूर।”

बहस के दौरान चारा घोटाले के एक अन्य मामले आरसी 20 से जुड़े दस्तावेज भी पढ़ा जा रहा था। पढ़ने में कठिनाई आ रही थी। तभी लालू प्रसाद ने हाथ जोड़ते हुए जज से कहा, “हुजूर आरसी 20 में जो फैसला आया था, वह बहुत ही हड़बड़ी में दिया गया था। इसमें बहुत ही गड़बड़ है।” इसी बीच लालू प्रसाद के वकील ने कोर्ट से रिक्वेस्ट की कि बहस के लिए एक दिन और समय दी जाए। इस पर कोर्ट ने कहा, “आपका क्लाइंट मामले में जल्दी फैसला चाहता है और और आप रोज समय ले रहे हैं।” इस पर लालू ने कोर्ट से कहा, ” हां, हुजूर.. इस मामले में जल्दी फैसला कर दिया जाए। होली से पहले कर दिया जाए, ताकि हमलोग होली प्रेम से खेल सके।” कोर्ट ने कहा, “उसकी चिंता मत कीजिए। होली से पहले हम फैसला कर देंगे।” इसके बाद लालू प्रसाद ने हाथ जोड़ते हुए कोर्ट से बाहर जाने की इजाजत ले ली।

कोर्ट से बाहर आते ही लालू को मीडिया ने घेर लिया और बिहार में होने वाले बायइलेक्शन पर सवाल पूछा। लालू ने कहा कि बिहार में यूपीए एक साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। दो सीट हमारी है। भभुआ की सीट कांग्रेस को दे दी गई है। सीबीआई द्वारा मामले में गवाही दिए जाने पर लालू ने कहा, “सीबीआई को डोरंडा ट्रेजरी मामले में गवाह नहीं मिल रहा है। सीबीआई वाले गवाह को कहीं-कहीं से उठा कर ले आते हैं।”

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