कई संस्थान इस बार पिछड़े, QS रैंकिंग में भारत के ये विश्वविद्यालय रहे श्रेष्ठ

नई दिल्ली: QS ग्लोबल रैंकिंग में शीर्ष 1000 में भारत के 21 उच्च शिक्षण संस्थानों को इस साल महत्वपूर्ण स्थान मिला है. लेकिन इस साल क्वैक्लेरेली साइमंड्स (QS) वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग (WUR) के नवीनतम संस्करण में कई भारतीय शिक्षण संस्थान कई पायदान नीचे फिसल गए हैं, जिसमें कम से कम 10 ऐसे नाम हैं जिन्हें सरकार द्वारा इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस (IoE) के तहत चिह्नित किया गया था.

पिछले 12 महीनों में रैंक में जो संस्थान पिछड़े हैं उनमें आईआईटी-दिल्ली, आईआईटी-मद्रास, आईआईटी-खड़गपुर, आईआईएससी-बैंगलोर, दिल्ली विश्वविद्यालय, हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय, मणिपाल उच्च शिक्षा अकादमी (एमएएचई), बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के नाम शामिल हैं. वहीं विज्ञान में पिलानी (बिट्स-पिलानी), अन्ना विश्वविद्यालय और वेल्लोर प्रौद्योगिकी संस्थान (वीआईटी) भी पिछड़े हैं.

कुल मिलाकर, 21 भारतीय विश्वविद्यालयों और संस्थानों ने इस साल दुनिया के शीर्ष 1,000 में स्थान पाया है जबकि पिछले साल ये संख्या 25 थी. रैंकिंग में आईआईटी-बॉम्बे देश के शीर्ष विश्वविद्यालय के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखे हुए है, इसके बाद आईआईएससी-बैंगलोर, आईआईटी-दिल्ली, आईआईटी-मद्रास, आईआईटी-खड़गपुर, आईआईटी-कानपुर, आईआईटी-रुड़की, आईआईटी-गुवाहाटी, दिल्ली विश्वविद्यालय और आईआईटी-हैदराबाद भी इसमें शामिल हैं.

इस सूची में मद्रास यूनिवर्सिटी को 275वीं, खड़गपुर यूनिवर्सिटी को 314वीं, कानपुर यूनिवर्सिटी को 350वीं, रुड़की को 383वीं और गुवाहाटी को 470वीं रैंक मिली है. रैंकिंग में दुनिया की अन्य यूनिवर्सिटीज की तुलना में भारतीय संस्थान पढ़ाई की क्षमता और वैश्विक स्तर को ज्यादा आगे ले जाने में असफल रहे हैं. QS के बेन सॉटर ने कहा कि इस सूची में भारतीय यूनिवर्सिटीज की रैंकिंग गिरी है, लेकिन उसकी वजह ये है कि इस दौरान दुनिया की अन्य यूनिवर्सिटीज ने अपने स्तर को उठाने के लिए ज्यादा प्रयास किए हैं.

मैसाचुसेट्स है विश्व में नंबर वन

ग्लोबल रैंकिंग में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट आफ टेक्नॉलजी इस साल भी नंबर वन रहा है. टॉप थ्री में अमेरिका के विश्वविद्यालय हैं जिसमें दूसरे नंबर पर स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और तीसरे स्थान पर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी है. बता दें कि QS विश्व यूनिवर्सिटी रैंकिंग के लिए मुख्य रूप से छह बिंदुओं शैक्षणिक प्रतिष्ठा, नियोक्ता प्रतिष्ठा, साइटेशंस प्रति फैकल्टी, फैकल्टी/छात्र अनुपात, अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी अनुपात और अंतरराष्ट्रीय छात्र अनुपात को शामिल किया जाता है.

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