कठुआ गैंग रेपिस्ट के समर्थन वाली रैली और राममाधव का कनेक्शन !

अखिलेश अखिल

गजब की राजनीति है। फसाद करके चूहा निगल जाने की करामात। कठुआ गैंग रेप और हत्या की कहानी बहुत कुछ कहती है और बहुत सारे नेताओं की चाल से भी पर्दा उठाती है। कठुआ गैंग रेप और हत्या की शिकार हो चुकी आसिफा तो अब अहमारे बीच नहीं लौट पाएगी लेकिन जिस तरह से आसिफा की मौत का जश्न बीजेपी समर्थित लोगों, नेताओं,मंत्रियों ने हत्यारों के समर्थन में रैली निकाल कर मनाया, मानवता को भी कलंकित कर गया। आज से पहले ऐसा खेल कभी देखने को नहीं मिला था।

विरोध के बाद रेपिस्टों और हत्यारों के समर्थन में रैली में शामिल बीजेपी के दोनों मंत्रियों ने अपना इस्तीफा दे दिया है और चैन की नींद सो रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ऐसे नेता,मंत्री के खिलाफ कार्रवाई नहीं जानी चाहिए। क्या उनसे जांच एजेंसियों को पूछताछ नहीं करनी चाहिए। जब रेपिस्ट और हत्यारे के खिलाफ जांच चल रही है तो क्या उनके समर्थकों के खिलाफ जांच नहीं होनी चाहिए। और यह जांच तब और भी होनी चाहिए जब समर्थन देने वाले कोई मामूली आदमी नहीं वल्कि प्रदेश सरकार के मंत्री रहे हैं। जाहिर है यह सारा खेल हिन्दू -मुसलमान की बुनियाद पर रचा गया था। हिन्दू -मुसलमान के खेल में आसिफा चली गयी।

लेकिन अब जो कहानी छानकर सामने आ रही है उससे पता चलता है कि बीजेपी के जिन दो मंत्रियों चौधरी लाल सिंह और चंद्र प्रकाश गंगा हत्यारों के समर्थन के आयोजित रैली में हिस्सा लेने गए थे, पार्टी महासचिव राममाधव के कहने पर गए थे। अब मंत्री के समर्थक कहने लगे हैं कि यह सारा खेल राममाधव के कहने पर हुआ था। लेकिन राममाधव के विरोध में बोले कौन ? राममाधव का विरोध मोदी -शाह का विरोध है और संघ का भी। फिर इनका विरोध करके बीजेपी की राजनीति भला कौन कर सकता है ? यही वजह है कि राममाधव के खेल को छुपाकर इल्जाम प्रदेश पार्टी अध्यक्ष सत शर्मा पर लगा दिया गया।

तो ऐसे में भी सवाल है कि क्या सत शर्मा के खिलाफ पार्टी या जांच एजेंसी कोई काम कर करती दिख रही है ? कोई जबाब नहीं है। क्या उस हिन्दू एकता मंच के खिलाफ कोई कार्यवाई हो रही है जिसने हत्यारो के समर्थन में रैली निकाली और जिसमे मंत्री ,नेता शामिल हुए। कोई जबाब नहीं है। बता दें कि अब जबकि दोनों आरोपी मंत्री चौधरी लाल सिंह और चंद्र प्रकाश गंगा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है तब उनके समर्थक कहने लगे हैं कि ये सिर्फ शिकार हैं, जो दबाब में भाजपा ने किए हैं, लेकिन असल मास्टरमाइंड संघ के पूर्व पदाधिकारी और भाजपा महासचिव राम माधव हैं, जिनको बचाने की कोशिश में भाजपा ने दोनों मंत्रियों से इस्तीफा लिया है।’

गौरतलब है कि राम माधव वह नेता हैं जिन्होंने जम्मू—कश्मीर में 25 सीटें दिलवाई हैं। बीजेपी के लिए राममाधव वहाँ किसी भगवान् से कम नहीं। पार्टी अध्यक्ष कहने के लिए कोई हो ,सारे विधायक और मंत्री जाकर शरणागत होते हैं राममाधव के सामने। इस्तीफा दे चुके मंत्री चौधरी लाल सिंह के समर्थक समझाते हैं, अखबारों के संदर्भ बताते हैं और राम माधव के बदले बयानों को एक—एक कर दिखाते हैं। वे बार—बार अपनी मजबूरियां कहते हैं कि हम अपने नाम से कुछ भी नहीं बोल सकते पर आप घटनाक्रम पर ध्यान दें तो साफ हो जाएगा कि पार्टी इसके पीछे थी।लाल सिंह का समर्थक कहता है, ‘पूरी पार्टी में विरोध में बोलने का चलन नहीं रह गया है। जो बोलने वाले थे वे साइड लाइन हैं और चुप रह सकते हैं या मोदी और अमित शाह की जो भेड़ें बन सकते हैं, वे पार्टी में हैं।’

आसिफा के बलात्कारियों के समर्थन में जम्मू रैली में पहुंचे भाजपा कोटे से जम्मू—कश्मीर सरकार के दोनों मंत्रियों चौधरी लाल सिंह और चंद्र प्रकाश गंगा के समर्थक सबसे पहले मोबाइल से एक अखवार में छपी खबर दिखाते हैं, जिसमें राम माधव ने दोनों मंत्रियों के रैली में शामिल को लेकर बचाव किया है। ये खबर तमाम अखबारों में 14 अप्रैल को छपी है। जम्मू पहुंचे राम माधव 14 अप्रैल को बलात्कार के समर्थन में रैली निकाले दोनों मंत्रियों को साथ लेकर मीडिया को संबोधित करते हैं। यह सब इसलिए कि मंत्री कही उनका नाम ना लेले।

स्थानीय लोग कहते हैं कि ‘कठुआ में एक—दो दशक पहले तक मुस्लिम बहुत कम थी, लेकिन अब 22 फीसदी यहां बकरेवाल हैं। आरएसएस और हिंदू एकता मंच जैसे तमाम संगठन लगातार इस कोशिश में हैं कि इन्हें यहां से उजाड़ दिया जाए। लेकिन जबसे पीडीपी ने बकरेवालों को वन भूमि में बसने आदेश दिया है, अब वह स्थाई आवास बनाने लगे हैं, जबकि भाजपा और उसके समर्थक संगठन कठुआ को हिंदू स्थान ही बनाए रखना चाहते हैं। यह लड़ाई दोनों पार्टियों की ओर से लड़ी जा रही है। भाजपा के लिए बड़ी मुश्किल यह है कि उसे अगली विधानसभा में जीतने की कोई वजह नहीं मिल पा रही, क्योंकि उसने सरकार में रहते ऐसा कोई काम नहीं किया।’ बहुत साफ है कि भाजपा के दोनों मंत्री रैली में क्यों पहुंचे थे? क्यों दोनों मंत्रियों के समर्थक कह रहे हैं कि ये लोग राम माधव के निर्देश पर ही रैली में शामिल हुए थे, क्यों कह रहे हैं पार्टी को लंबे समय से ऐसे किसी मुद्दे की तलाश है जिसमें भाजपा राज्य में उभर कर आए और राज्यभर में गिरता ग्राफ ऊपर आए।’

मामला बिगड़ते देख राम माधव सीधे जम्मू पहुंचे और पहले मंत्रियों को भरोसे में लिया, उनको मासूम और अनजान बताया, जिससे कि वे राम माधव का नाम न जुबान ला दें और बाद में जनदबाव बनते ही मंत्रियों से पलटी मार गए और कह दिया कि नहीं जी, उनका शामिल होना ठीक नहीं है। पार्टी उनके साथ नहीं है, इस्तीफे का स्वागत है। कोई लेकिन न रह जाए इसके लिए प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा का नाम भी मंत्रियों के हवाले से मीडिया में चलवा दिया कि उन्हीं के कहने पर वे बलात्कारियों—हत्यारों के समर्थक बने थे।

इस्तीफा दे चुके पूर्व मंत्री लाल सिंह के समर्थक कहते हैं, ‘यह लाल सिंह नहीं बोल रहे कि जम्मू—कश्मीर भाजपा अध्यक्ष सत शर्मा के कहने पर बलात्कारियों के समर्थन में निकली रैली में गए थे, बल्कि यह पार्टी की तैयारी थी, जिसका डायग्राम राम माधव द्वारा दिया गया है। मंत्री नाम सत शर्मा का इसलिए ले रहे क्योंकि ऐसा ही करने को राम माधव ने कहा है, क्योंकि राम माधव का नाम आते ही पार्टी की छवि को बड़ा नुकसान होगा। और उससे बड़ा नुकसान संघ समर्थकों का होगा कि जो राम माधव वर्षों तक संघ के कार्यकर्ता और पदाधिकारी रहे, वे वोट के लिए इतना नीचे गिरकर रणनीति लागू कराते हैं। और रही बात प्रदेश अध्यक्ष की तो विधायक और कार्यकर्ता नहीं सुनते, मंत्री क्यों सुनने लगे, सीधे सबकी राम माधव सुनते हैं और राम माधव की सब सुनते हैं।’

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