कब्ज से रहें दूर

कब्ज एक आम गड़बड़ी है, जिससे देश की बड़ी आबादी पीडि़त है। बॉलीवुड ने तो इस बीमारी को टार्गेट कर ‘पीकूÓ नामक फिल्म ही बना दी, जिसमें अमिताभ बच्चन ने कब्ज पीडि़त का रोल किया था। अगर आप भी कब्ज की समस्या से पीडि़त हैं, तो तुरंत सावधान हो जाइए, क्योंकि इसका केवल नाम ही छोटा है, बीमारी बहुत बड़ी है।

कब्ज एक ऐसी समस्या है जिससे पीडि़त हर घर में कोई न कोई मिल ही जाता है। यह परेशानी किसी भी उम्र में किसी को भी हो सकती है। विश्व में कब्ज से पीडि़त पुरुष और महिलाओ की संख्या एक जैसी ही है। देखने में तो कब्ज की परेशानी बहुत छोटी ही लगती है। जिससे लोग अक्सर इसे नजरअंदाज करते हैं। हालांकि पेट से जुड़ी यह समस्या कभी भी गंभीर रूप ले सकती है। दरअसल स्वास्थ्य की नजर से देखें, तो कब्ज आंतों की समस्या है जिसमें खासकर बड़ी आंत नियमित रूप से अपना काम नहीं करती और कभी करती भी है, तो पूरी तरह साफ नहीं हो पाती। कब्ज ऐसी समस्या है जो अपने साथ और भी कई बीमारियों को समेट लाती है।

अपेंडिसाइटिस, गठियावात, हाई ब्लड प्रेशर, मोतियाबिंद जैसी बीमारियों की पृष्ठभूमि में कई बार कब्ज को जिम्मेदार पाया गया है। लंबे समय तक किसी को यह समस्या रहे, तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी घट जाती है। दरअसल, कब्ज का सबसे आम लक्षण मल त्याग में परेशानी और मल का सख्त होना है। इसके दूसरे लक्षण भी हैं जैसे जीभ पर सफेद परत जमना, मुंह से बदबू आना, भूख न लगना, सिरदर्द, चक्कर, आंखों के आसपास गहरे काले घेरे, मानसिक अवसाद, जी मिचलाना, चेहरे पर मुहांसे आना, मुंह में छाले पडऩा, पेट लगातार भरा लगना, कमर के निचले हिस्से में दर्द रहना, एसिडिटी, गले और सीने के ऊपरी हिस्से में जलन, नींद न आना।

कब्ज होने का सबसे बड़ा कारण है भोजन संबंधी गलत आदतें और लाइफस्टाइल। दरअसल, हमारे खान-पान में रिफाइंड चीजों ने तेजी से अपना स्थान बना लिया है, जो स्वाद में तो अच्छी होती हैं, लेकिन आंतों के लिए खराब होती है। बड़ी कंपनियों का आटा, मैदा, पॉलिश किया चावल ही मुख्य आहार हो गया है। इसके अलावा आजकल घी, तेल से भरपूर भोजन भी लोग खूब करते हैं। चाय या कॉफी का सेवन दिन में कई बार किया जाता है, जबकि पानी कम पीते हैं। कब्ज से अगर छुटकारा पाना है, तो सही लाइफस्टाइल अपनानी ही होगी।

– इसके लिए सबसे पहले भोजन में छिलका सहित अनाज, शहद, शीरा, मूंग, मसूर, हरी और पत्तेदार सब्जियां, खासकर पालक टमाटर, सलाद के पत्ते, प्याज, पत्तागोभी, फूलगोभी, शलगम, कद्दू, मटर, चुकंदर, गाजर, मौसमी फल, किशमिश, अखरोट, खजूर जैसे सूखे मेवे और घी, मक्खन, क्रीम जैसे दूध से बने पदार्थ शामिल करें।
– बचपन में सिखाया जाता है कि भोजन को खूब अच्छे से चबाकर खाएं। इस सलाह पर सख्ती से अमल का समय अब है।
– चीनी और इससे बनी चीजों से परहेज से करें। चीनी से परहेज केवल डायबिटीज के कारण नहीं, बल्कि इसलिए भी जरूरी है क्योंकि चीनी से बनी चीजें शरीर में विटामिंस की कमी कर देती हैं। विटामिंस आंतों के सही तरीके से काम करने के लिए जरूरी हैं।
– मैदा से बने स्वादिस्ट कुकीज जीभ को तो पसंद आते हैं, लेकिन आंतों को नहीं भाते। इसलिए केक, पेस्ट्रीज, बिस्कुट से दूर रहें।
– बहुत अधिक पनीर, मांसाहार, उबले हुए अंडों की ज्यादा संख्या भी कब्ज को बढ़ाने में मददगार होते हैं। इसलिए इन चीजों का नियमित रूप से सेवन न करें।
– पानी हमारे शरीर के लिए बहुत ही जरूरी है। सिर्फ कब्ज से छुटकारा पाने के लिए ही नहीं, बल्कि शरीर के विषैले तत्वों को दूर करने के लिए भी जरूरी है कि दिन में छह से आठ ग्लास तक पानी पीएं।
– पानी को कभी भी भोजन के साथ न पीएं। या तो खाना खाने से आधा घंटा पहले या फिर खाना खाने के एक घंटा बाद पानी पीना चाहिए। दरअसल खाना खाने के बाद पाचक रस यानी एंजाइम्स सक्रिय होते हैं, जो भोजन को सही तरीके से पचाते हैं। अगर खाने के साथ पानी पीते हैं, तो पानी पाचक रसों में मिलकर उसे पतला कर देता है और भोजन पचने में परेशानी होती है।
– सोने से पहले शरीर को कूल्हों तक बारी-बारी से गर्म और ठंडे पानी में डुबोकर किया गया स्नान भी कब्ज से छुटकारा दिलाता है।
– रोजाना ताजी हवा में टहलने से कब्ज से निपटने में सहायता मिलती है।
– कम से कम सप्ताह में 4 दिन एक्सरसाइज तो करनी ही चाहिए। इससे शरीर का पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है। नियमित व्यायाम नहीं करने से शरीर का मेटाबोलिज्म बिगड़ जाता है और इससे खाए हुए भोजन को पचा पाने में शरीर असमर्थ हो जाता है। और कब्ज की परेशानी होने लगती है।
– लोग अक्सर किसी भी प्रकार के दर्द के लिए पेन किलर बाजार से खरीद कर खा लेते हैं जिससे कब्जियत होने लगती है। कुछ विटामिंस और आयरन की दवाओं को खाने से भी शरीर में समस्या उत्पन्न हो जाती है।

कब्ज से लगभग हर 10वां व्यक्ति परेशान है। लगभग हर घर में कोई न कोई इसका मरीज जरूर मिल जाएगा। विश्वभर में 10 फीसदी लोग कब्ज से दुखी हैं, जबकि 14 फीसदी शहरों में रहने वाले लोग कब्ज के मरीज हैं। लगभग 20 फीसदी 45 से 65 साल की उम्र वाले लोग इससे त्रस्त हैं। 80 फीसदी लोगों में जब यह बीमारी बहुत अधिक बढ़ जाती है तब इसके इलाज के लिए जाते हैं। 60 फीसदी लोग घरेलू उपाय पर निर्भर रहते हैं।

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