कब थमेगा अपराध का राजनीतिक गठजोड़

यूपी के गैंगस्टर विकास दुबे के हालिया घटनाक्रम ने एक बार फिर अपराध के राजनीतिक गठजोड़ को उजागर किया है। विगत दो दशकों से जिस तरह से अपराध का राजनीतिककरण हो रहा है वह भारतीय लोकतंत्र के लिये एक बड़ा खतरा है। इससे तो भारतीय लोकतंत्र की आत्मा को खत्म होने में समय नहीं लगेगा। जिस भारतीय लोकतंत्र की सुचिता और वैभव को बचाने के लिये हमने 73 साल पहले अपने खून पसीने को एक कर दिया था। इसके लिये जान की बाजी लगाने से भी गुरेज नहीं किया था, उसे क्या इसी राजनीतिक गठजोड़ की बलिबेदी पर कुर्बान होते देखते रहें। यूपी के गैंगस्टर विकास दुबे का मामला कोई नया नहीं है। इससे पहले भी कई मामले सामने आते रहे हैं। अपराधियों को संरक्षण देने के राजनेताआों के इस सियासी दोगलेपन पर अब जनता को ही लगाम लगानी होगी, अन्यथा घालमेल की यह सियासत अनवरत चलती रहेगी।

हलाकि लगभग दो दशक पहले जातियों के नाम पर शुरु हुए क्षेत्रीय दलों ने सत्ता पाने की हवस में अपराधियों के राजनीतिक प्रवेश का जो सिलसिला शुरु किया था उसके लालन-पालन में कांग्रेस-भाजपा जैसे बड़े राजनीतिक दलों ने कोई कसर नहीं छोड़ा। नतीजन आज हर बड़े राजनेता के वरहदस्त में विकास दुबे जैसे न जाने कितने गैंगस्टर, अड़ीबाज, कुख्यात अपराधी अभी भी फलफूल रहे हैं। राजधानी भोपाल सहित लगभग पूरे प्रदेश और अन्य राज्यों में नजर दौड़ाई जाए तो साफतौर पर दिखाई देता है कि कई विधायक और सांसद इन्हीं अपराधियों के बलबूते सत्ता की सीढ़ी चढ़ रहे हैं। अपने अनापशनाप कार्यों के लिये उनका इस्तेमाल कर रहे हैं। यही वजह है कि इस बेमेल गठजोड़ का असर समाज और राष्ट्र में पड़ रहा है। गैंगस्टर विकास दुबे का पूरे क्षेत्र में आतंक था। उसके मारे जाने के बाद बिकरू गांव से करीब ढाई किमी दूर शिवली कस्बे में जश्न का माहौल है।

यहां लल्लन बाजपेयी की अगुवाई में लोगों ने विकास दुबे की मौत पर खुशियां मनाई। वहीं कानपुर शहर में लोगों ने पुलिस वालों का सम्मान किया है। यह खुशी बताती है कि अब समय आ गया कि हमे सजगता से इसे तोड़ना होगा। ऐसे राजनेताओं को चिन्हित कर उन्हें अब बताना होगा कि स्वस्थ राजनति का विकल्प हम तैयार करेंगे। तभी यह सिलसिला रुकेगा, अन्यथा ऐसे ही सियासी विकास पैदा होते रहेंगे और हम ढाक के तीन पात की तरह आरोप-प्रत्यारोप की गुगली का शिकार बनते रहेंगे। विकास दुबे जैसे खूंखार अपराधी की गिरफ्तारी पर जिस तरह सवाल उठे थे, उसी तरह उसके एनकाउंटर पर भी उठेंगे। लेकिन कभी शांति का टापू कहे जाने वाले हमारे ह्रदय प्रदेश मध्यप्रदेश में जिस तरह सियासी गठजोड़ के चलते अपराध को सरकारी संरक्षण देने का कार्यक्रम बनाया था, उस पर पानी फेर यूपी की योगी सरकार ने फैसला ऑन द स्पॉट की तर्ज पर त्वरित न्याय का जो फार्मूला ईजाद किया है वह सच में काबिले तारीफ है।

यह निर्णय इसलिए भी नजीर के लायक है कि दिल्ली के निर्भया कांड के दरिन्दों की करतूत तो पूरी दुनिया ने देखी थी। इसके बाद भी वह सालों जिंदा रहे। इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट के फांसी देने के निर्णय का महीनों तक उन अपराधियों ने जो मजाक बनाया था हम सब के सामने है। हम देश की न्याय व्यवस्था पर सवाल नहीं उठा रहे, पर जब कई बार कानून न्याय के आड़े आये तो ऐसे ही फैंसला सुना देना चाहिए।

संदीप सिंह गहरवार

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