कभी लड़के उड़ाते थे मजाक, आज हेवी लाइसेंस वाहन सड़को पर दौड़ा किया माँ का सिर गर्व से ऊँचा

बदलते युग के इस समाज में महिलाये हर जगह पुरुषो से कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। हर फिल्ड में ना सिर्फ पुरुषों की बराबरी कर रही है बल्कि उनसे आगे भी निकल रही हैं। आपने अक्सर समाज को कहते हुए देखा ही होगा, कि महिलाये बहुत सारे काम कर सकती है मगर ड्राइविंग के मामले में मात खा जाती है। लेकिन आज हम आपको ऐसी ही दो सगी बहनो से मिलवाने जा रहे है, जिन्होंने अपने दम पर साबित कर दिखाया- कि ‘म्हारी छोरियां छोरों से कम सैं के।’

हरियाणा राज्य की इन दो होनहार छोरियो ने बह कर दिखाया, जो ज्यादातर लड़को के बस की भी बात नहीं होती है। अरे… बस से याद आया यंहा हम बस की ही तो बात कर रहे है। ये कहानी है, रोहतक में एकता कॉलोनी की दो सगी बहनों मीना हुड्डा और रीना हुड्डा की। यह दोनों सगी बहनें इन दिनों हैवी लाइसेंस लेकर बसें चला रही हैं। तो हुई न बस की बात।

कभी लड़के उड़ाते थे मजाक, आज हेवी लाइसेंस वाहन सड़को पर दौड़ा किया माँ का सिर गर्व से ऊँचा
जंहा एक तरफ रूढ़िवादी समाज महिलाओ की स्कूटी बाली ड्राइविंग पर भी सवाल उठा देता है। वंही इन दोनों सगी बहनो ने बस चलाकर कइयों के मुंह बंद कर दिये। और दुनिया को बता दिया कि महिलाओं को किसी भी रूप से हलके में लेने की न सोचे।

महिला सशक्तिकरण की प्रेरणा बनी दोनों बहने
हरियाणा के रोहतक के एकता कालोनी में रहने वाली बहनें रीना हुड्डा और मीना हुड्डा लोगो के लिए महिला सशक्तिकरण की प्रेरणा बनी हुई हैं। उनकी मेहनत और लगन की आज हर कोई तारीफ़ करता दिख रहा है। लेकिन ये सब हासिल करना इतना आसान नहीं था, इसके लिए दोनों बहनो को बाकायदा परिवार, मोहल्ला और समाज से दो-दो हाँथ करने पड़े। आइये नीचे जानते है, कि कैसे दोनों सगी बहनो ने समाज को आईना दिखाने का काम किया।

कुछ इस तरह संघर्षो से लड़ प्रतिभा को निखारा
अभी इस दुनिया में दोनों बहनो ने सही से जीना सीखा भी नहीं था, कि पिता का साया सर से उठ गया। पिता का साया सिर से उठने के बाद, मां इंद्रवती ने दो बहनों और भाईयों को कड़ी मेहनत से पाला। आर्थिक तंगी से भाईयों को बहुत कम उम्र से ही घर की जिम्मेदार उठानी पड़ी। बेटियों को सशक्त बनाने के लिए मां ने उन्हें शिक्षित किया। उन्हें मालूम था, कि समाज में लड़ने के लिए सबसे बड़ा हथियार एक मात्र शिक्षा होती है।

माँ ने पैसों के आभाव में एमटीएफसी संस्था में दाखिला कराया। यह फैसला दोनों के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ है। संस्था से जुडने के बाद, दोनों बहनो ने स्कूल की पढ़ाई करने के साथ ही स्कूटी, बाइक और कार चलानी सीखी।

रोहतक की पहली महिला ड्राइवर
एमटीएफसी संस्था व अध्यापकों के द्वारा प्रेरित करने पर छोटी बहन मीना ने हरियाणा रोडवेज के रोहतक प्रशिक्षण केंद्र पर हैवी व्हीकल लाइसेंस के लिए आवेदन किया। तकरीवन एक माह के प्रशिक्षण के बाद अप्रैल 2018 में लाइसेंस प्राप्त किया। ऐसा करने वाली वह रोहतक की पहली महिला बन गयी। वहीं बड़ी बहन रीना को रोहतक में 3 महीने का वेटिंग पीरियड होने की वजह से बहादुरगढ़ के प्रशिक्षण केंद्र से हैवी लाइसेंस हेतु आवेदन करना पड़ा। रीना को भी ये लाइसेंस प्राप्त हुआ और वो ऐसा करने वाली बहादुरगढ़ की पहली महिला बन गई। रीना और मीना की इस उपलब्धि पर माँ को गर्व हैं।

लड़के उड़ाते थे मजाक
बस चलाने के प्रशिक्षण के बैच में करीब 100 लड़कों में वह अकेली लड़की थी। लड़के अक्सर मजाक उड़ाया करते थे। हालांकि, प्रशिक्षण के बाद होने वाले जरूरी ट्रायल में पहली ही बार में पास हुई। उन्होंने बताया कि झुग्गी-झोपडिय़ों में रहने बाले बच्चों को पढ़ाने के लिए ऑटो रिक्शा से लाना व वापस छोडऩा पड़ता था। संस्था के प्रयासों को देखते हुए समाजसेवी राजेश जैन ने बस भेंट की।

परिवार ने हमेशा बढ़ाया हौसला
रीना व मीना का कहना है कि मां और दोनों भाईयों ने हमेशा उनका साथ दिया। बस चलाने की इच्छा जब जाहिर की तो भाईयों ने समर्थन किया। परिवार के हौसला बढ़ाने पर हमारी भी झिझक कम हुई। रीना और मीना की मां कहती है उन्‍हें गर्व है कि उनकी ऐसी बेटियां हैं। दोनों बहनो के अनुसार, माता और भाइयों के अतिरिक्त वे इस चीज का श्रेय एमटीएफसी के संचालक नरेश ढल, तस्वीर हुड्डा, मनीषा अग्रवाल को भी देती हैं।

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