कम बारिश होने से बुन्देलखण्ड में बने सूखे के हालात

कानपुर: जुलाई माह का दूसरा पखवारा बीत चुका है। इन्द्र देवता की नाराजगी बराबर जारी है। मई माह से अब तक हुई बारिश औसत से काफी कम है। वहीं सूखे खेतों में किसान आसमान के काले बादलों का इंतजार कर रहा है। लेकिन जिस प्रकार से मौसम का पूर्वानुमान है उससे अब कानपुर बुन्देलखण्ड में सूखे जैसे हालात बनते दिख रहे हैं। अगर आगामी एक सप्ताह तक कुछ बारिश हो भी जाती है तो भी किसानों को होने वाली फसलें लाभ का फायदा नहीं साबित हो सकेगीं।

मौसम विभाग ने इस वर्ष पूर्वानुमान जारी किया था कि बारिश सामान्य से कम नहीं होगी। लेकिन मानसूनी बारिश का प्रमुख माह आषाढ़ अब समाप्त होने की ओर है और आसमान में छाये काले बदरा बरसने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। जिसकी वजह से कानपुर मण्डल में सामान्य से करीब 65 फीसदी बारिश कम हो सकी। वहीं बुन्देलखण्ड के हालात तो बहुत ही चिंताजनक है यहां पर करीब 25 फीसदी ही बारिश हो पायी है। जिससे सूखों खेतों में किसान आसमान की ओर निहारने को मजबूर है।

बुन्देलखण्ड के हालातों का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शायद ही कोई तालाब हो जिसकी तलहटी में एक दो सेंटीमीटर पानी भरा हो। तो वहीं खेतों में दरारें पड़ी हुई हैं और जिन्होंने हल्की बारिश में खेतों की जुताई भी कर दी है उन खेतों से धूल उड़ रही है। ऐसे में कानपुर बुन्देलखण्ड के क्षेत्र में सूखे जैसे हालात बनते दिखाई दे रहे हैं। जिसमें बुन्देलखण्ड के किसानों के लिए एक बार फिर खरीफ की फसल खेतों में लहलहाती नहीं दिखेगी। जबकि खरीफ फसल की बुआई जिसमें मूंग, उड़द, अरहर, बाजरा, तिल, सोयाबीन आदि की अब तक लगभग कम से कम 85 फीसदी हो जानी चाहिये थी। अगर एक सप्ताह के अंदर बारिश भी होती है तो खेतों में इन बीजों के बोने के बाद भी फसल सही से उत्पादन देने में सक्षम नहीं होगी।

मौसम विभाग के मुताबिक एक सप्ताह तक स्थानीय स्तर को छोड़कर मानसूनी बारिश के आसार कम ही है। चन्द्रशेखर आजाद कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कृषि मौसम वैज्ञानिक डा. नौशाद खान ने बताया कि मानसूनी बारिश के लिये जरूरी पूर्वी हवाएं चल रही हैं पर कानपुर बुन्देलखण्ड में मानसून सक्रिय नहीं हो पा रहा है। जबकि उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल के क्षेत्रों में बिहार में बने मानसून के जोन से बारिश हो रही है। बताया कि खासकर बुन्देलखण्ड के क्षेत्र में खरीफ की फसलों में दलहनी और तिलहनी फसलों की अधिक मात्रा में बुआई होती है और बारिश न होने से एक दो फीसदी को छोड़कर किसानों के घरों से बीज ही नहीं निकल पाया है। रही बात धान की फसल की तो जिन्होंने नर्सरी भी तैयार कर ली है तो भी ऐसे मौसम में पानी का स्वयं का साधन होने के बावजूद उत्पादन बेहतर नहीं ले पायेगें। क्योंकि धान की फसल के अच्छे उत्पादन के लिये मानसूनी बारिश बहुत जरूरी होती है। कहा, पानी का स्वयं के साधन वाले किसान अब बारिश की प्रतीक्षा न करें और धान की रोपाई शुरू कर दें और समय-समय पर पानी देते रहें।

इन-इन माह में इतनी हुई बारिश

कृषि मौसम वैज्ञानिक ने बताया कि उत्तर प्रदेश में मई माह में सामान्य तौर पर 14.4 मिलीमीटर बारिश होती है उसके सापेक्ष इस वर्ष आठ मिलीमीटर ही बारिश हो सकी। इसी तरह जून माह में 84.2 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिये पर 63.4 मिलीमीटर बारिश हुई। इसी तरह जुलाई माह में हवाओं की दिशायें पूर्वी होने के चलते भी 83.6 मिलीमीटर के सापेक्ष 33.2 मिलीमीटर बारिश हो सकी। कुल मिलाकर 57 फीसदी बारिश हुई यानी 43 फीसदी बारिश कम हुई। कहा कि यह आंकड़े 11 जुलाई तक के हैं और इसके बाद नाममात्र की हुई बारिश के चलते इन आंकड़ों पर इजाफा होना तय है।

किसानों को सलाह देते हुये डा. खान ने कहा कि धान की रोपाई के दौरान किसान इस बात अब विशेष ख्याल रखें के पौध की संख्या एक से बढ़ाकर दो कर दें। इसके साथ ही रोपाई के समय पौधों का एक तिहाई हिस्सा ऊपर से काट दें। ऐसा इसलिये कर दें कि तैयार हुई नर्सरी समय से नहीं लग सकी जिससे उसका ग्रोथ अधिक हो गया है। इसके अलावा खेतों में नमी बरकरार रखने के लिये बराबर सिंचाई करते रहें।

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