कर्नाटक चुनाव: दक्षिण के इस गढ़ को बचाना कांग्रेस की चुनौती, बीजेपी भी मुश्किल में

चुनाव आयोग ने जैसे ही कर्नाटक विधानसभा चुनाव की तारीख का ऐलान किया बीजेपी और कांग्रेस चुनावी तैयारी को लेकर अपनी सेनाएं सजाने लगी है। बीजेपी जहां येदुरप्पा के सहारे चुनाव जितने के फिराक में हैं वही कांग्रेस वर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के चेहरे पर चुनाव लड़ रही है। बीजेपी किसी भी सूरत में कांग्रेस सरकार को हटाने के फिराक में है ताकि कांग्रेस मुख्त भारत का सपना पूरा हो सके जबकि कांग्रेस कमिसि भी हाल में अपनी सरकार बचाने को तैयार है। कांग्रेस के लिए अपनी सरकार बचाना नाक का सवाल हो गया है।

अगर कांग्रेस कर्नाटक को देती है तो दक्षिण भारत से भी उसके पैर उखड जाएंगे। उत्तर भारत से पहले ही कांग्रेस अपना जनाधार खो चुकी है। बता दें कि कर्नाटक में 12 मई को एक ही चरण में चुनाव होंगे जबकि परिणाम 15 मई को घोषित किये जाएंगे। बता दें कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव में दोनों राष्ट्रीय पार्टी भाजपा व कांग्रेस के अध्यक्ष क्रमश: अमित शाह व राहुल गांधी ने पूरी ताकत लगा दी है। कांग्रेस ने सबसे बड़े मतदाता वर्ग लिंगायत के वोटों पर पकड़ बनाने के लिए उन्हें अलग धर्म का दर्जा देने की सिफारिश कर दी है, वहीं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह राज्य में लिंगायत व दलित मठों का दौरा कर इस वर्ग से भाजपा के जुड़ाव को दिखा रहे हैं। अमित शाह व राहुल गांधी लगातार कर्नाटक का दौरा कर रहे हैं। वहीं, भाजपा के सर्वोच्च नेता व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कर्नाटक का दौर कर चुके हैं। मोदी ने अपनी जनसभाओं में भ्रष्टाचार को प्रमुख मुद्दा बनाया है।

2013 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 122 सीटों हासिल की थी, जबकि भाजपा को 40 सीटें मिली थीं। जेडीएस को भी भाजपा के बराबर 40 सीटें ही मिली थी। इस चुनाव में केजेपी ने छह व अन्य ने 16 सीटें पायी थीं। 2013 के चुनाव में भाजपा अपने अंतरविरोधों के कारण हार गयी थी, जबकि इससे पूर्व के चुनाव में पहली बार कर्नाटक के रूप में भाजपा ने किसी दक्षिणी राज्य में सरकार बनायी थी। अब भाजपा एक बार ऐसा करना चाहती है। राहुल गांधी एचडी देवेगौड़ा की पार्टी जेडीएस पर हमलावर हैं और उसके विधायक भी टूटे हैं इससे दोनों दलों क दूरी समझी जा सकती है।

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने कर्नाटक की 28 सीटों में 17 जीत ली थी। जबकि कांग्रेस ने नौ व अन्य ने दो सीटें पायी थी। इस चुनाव में भाजपा की दो सीटें घटी थी, जबकि कांग्रेस की तीन सीटें बढ़ी थी। सिद्धरमैया को कांग्रेस का मजबूत क्षत्रप माना जाता है जो पिछड़ा वर्ग की कुरुबा जाति से आते हैं, वहीं येदुरप्पा लिंगायत समुदाय से आते हैं जिनका वोट सबसे अधिक है। लिंगायत को अगड़ा वर्ग का दर्जा हासिल है। कुरुबा जाति की आबादी राज्य में तीसरे स्थान पर है, जबकि वाेक्कालिगा की आबादी दूसरे स्थान पर है।

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