कर्नाटक में राज्यसभा चुनाव के लिए BJP प्रत्याशियों ने भी भरा पर्चा

नई दिल्ली: कर्नाटक में राज्यसभा की चार सीटों पर 19 जून को होने वाले चुनाव के लिए मंगलवार को पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा व भाजपा के दोनों प्रत्याशियों इरन्ना कदाडी तथा अशोक गस्ती ने नामांकन दाखिल किया। देवेगौड़ा के साथ उनके बेटे और कर्नाटक के पूर्व सीएम एचडी कुमारस्वामी तो भाजपा प्रत्याशियों के नामांकन के दौरान मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा, उपमुख्यमंत्री लक्ष्मण सावदी एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नलिन कुमार कटील उपस्थित थे।

कांग्रेस प्रत्याशी मल्लिकार्जुन खड़गे सोमवार को ही नामांकन दाखिल कर चुके हैं। उधर, अरुणाचल प्रदेश की एक मात्र राज्यसभा सीट के लिए भाजपा प्रत्याशी नबाम रेबिआ सोमवार को ही नामांकन पत्र दाखिल कर चुके हैं। नामांकन के अंतिम दिन मंगलवार तक अन्य किसी ने पर्चा दाखिल नहीं किया है। कर्नाटक में किसी प्रत्याशी को जीत के लिए कम से कम 45 मत हासिल करना होगा। विधानसभा अध्यक्ष सहित भाजपा के विधायकों की संख्या 117 है, जबकि कांग्रेस के पास 68 व जदएस के पास 34 विधायक हैं। इस प्रकार भाजपा दो सीटों, कांग्रेस एक व कांग्रेस के सहयोग से जदएस एक सीट पर आसानी से जीत सकती है। हालांकि, नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन तक चार सीटों के लिए पांच प्रत्याशी मैदान में आ चुके हैं। एक निर्दलीय उम्मीदवार संगमेश चिकनकरगुंडा ने भी नामांकन किया है।

मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने प्रत्याशियों के नामांकन के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने नामों को अंतिम रूप देने से पहले उनसे बातचीत की थी। उन्होंने कहा, ‘प्रदेश की कोर कमेटी की तरफ से हमने कुछ नाम भेजे थे। भाजपा अध्यक्ष ने मुझसे बात की और कहा कि पार्टी ने आम कार्यकर्ताओं को टिकट देने का फैसला किया है। कदाडी लिंगायत समुदाय से हैं। गस्ती सविता समाज (नाई समाज) से आते हैं।’

कांग्रेस नेता व कर्नाटक से राज्यसभा प्रत्याशी मल्लिकार्जुन खड़गे व उनके बेटे प्रियंक को फोन पर धमकी मिली है। खड़गे को लैंडलाइन पर रविवार की सुबह धमकी मिली, जबकि प्रियंक को उनके मोबाइल पर धमकी मिली है। प्रियंक ने ट्विटर के जरिये इसकी शिकायत डीजीपी से की है। कडाडी (Eranna Kadadi) और गस्ती (Ashok Gasti) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पृष्ठभूमि से हैं। कडाडी बेलगावी जबकि गस्ती रायचूर से ताल्लुक रखते हैं। 54 एरन्ना कडाडी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत साल 1989 में की थी। उन्‍होंने साल 1994 में भाजपा के टिकट पर अर्भावी निर्वाचन क्षेत्र से विधानसभा का चुनाव लड़ा था लेकिन हार गए थे। वह साल 2010 में बेलगावी जिला पंचायत अध्यक्ष भी रहे। वह भाजपा के राज्य सचिव भी रह चुके हैं। वहीं गस्ती सविता समाज से हैं और पेशे से वकील हैं। गस्ती (Ashok Gasti) भाजपा के ओबीसी प्रकोष्ठ के महासचिव भी रह चुके हैं।

अशोक गस्ती पिछड़ी जाति विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष भी रहे हैं। बताया जाता है कि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व उक्‍त दोनों उम्‍मीदवारों के नामों पर मुहर लगाई है। केंद्रीय नेतृत्‍व का मानना है कि जमीनी स्तर के प्रतिबद्ध कार्यकर्ताओं को आगे लाना चाहिए जिन्होंने कभी पार्टी के सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह पहली बार है जब सविता समाज से कोई राज्‍यसभा जा रहा है। कर्नाटक से राज्यसभा की चार सीटों के लिए चुनाव होना है जो कांग्रेस के राजीव गौड़ा और बीके हरिप्रसाद जबकि भाजपा के प्रभाकर कोरे और जद (एस) केडी कुपेंद्र रेड्डी की 25 जून को रिटायर होने से खाली हो रही हैं।

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