कविता की धाक

बाराबंकी जिले की रामसनेहीघाट तहसील का गांव दुलहदेपुर अब एक निरक्षर किसान परिवार की बिटिया कविता यादव की मेहनत और लगन से मिली सफलता के चलते श्रीलंका तक अपनी धाक जमाएगा। दरअसल, लखनऊ के स्पोट्र्स हॉस्टल में रहकर एथलेटिक्स का ककहरा सीखकर नेशनल लेवल पर नाम रोशन करने वाली कविता श्रीलंका में होने वाली दक्षिण एशियाई क्रासकंट्री चैंपियनशिप में भारत की तरफ से दौड़ लगाएंगी।

तीन बहनों व एक भाई में कविता दूसरे नंबर पर है। पिता राजकरन यादव पांच बीघे के काश्तकार हैं और मां भी उनका हाथ बंटाती हैं। निरक्षर माता-पिता ने अपने चार बच्चों को बेहद गरीबी में पाल-पोसकर बड़ा किया। कविता के भाई आशीष की जब सेना में नौकरी लग गई, तब बेटियों के पढऩे का सिलसिला शुरू हुआ। भाई ने अपनी दो बहनों कविता व ललिता को लखनऊ पढऩे भेजा।

इसी दौरान रेलवे स्टेडियम के एथलीट कोच दान बहादुर यादव ने कविता को दौडऩे के लिए प्रेरित किया। इसके बाद तो कविता के मानों पंख लग गए। वर्ष 2012 में कविता को केडी सिंह बाबू स्टेडियम में प्रवेश मिला, जहां हॉस्टल में रहने के दौरान कविता ने ठान लिया था कि अब देश के लिए दौडऩा है।

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