कसमें… वादे…. प्यार… वफा सब बाते हैं बातों का क्या?

कसमें…वादे….प्यार…वफा सब बातें हैं बातों का क्या?’ एक पुरानी फिल्म का यह प्रसिद्ध गाना इन दिनों राजनीति में भी सटीक होता नजर आ रहा है। कसमों और वायदों का कोई अर्थ नहीं बचा है। आजकल पलक झपकते ही यह बातें हैं बातों का क्या की तरह ही बदल जाते हैं। यह बात अलग है की यह सब समझते हुए भी नेता भरोसा कर लेते हैं और कुछ समय के लिए बेफिक्र हो जाते हैं। कांग्रेस को इन दिनों यही चिंता सता रही है कि कहीं एक बार फिर उसके कुछ विधायकों के पाला बदलने का दौर चालू ना हो जाए। भाजपा ने कांग्रेस के विधायक प्रधुम्न सिंह लोधी को विधानसभा से इस्तीफा दिलाने और भाजपा में शामिल होने के कुछ ही घंटों के बाद नागरिक आपूर्ति निगम का अध्यक्ष बना दिया और साथ में कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दे दिया।

क्रिकेट की भाषा में कहें तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती की इस गुगली के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ का चौंक जाना स्वाभाविक था और उन्होंने इसकी आगे पुनरावृत्ति ना हो इसके लिए विधायकों से संपर्क प्रारंभ कर दिया है। चर्चा यह है कि कांग्रेस के लगभग 4 और विधायकों पर भाजपा की नजर है। कमलनाथ भी यह समझ चुके हैं कि यदि यह सिलसिला चल निकला तो फिर उपचुनाव में कांग्रेस को बहुत अधिक परेशानी होगी। वैसे कांग्रेस से भाजपा में आकर मंत्री बने ऐदल सिंह कंसाना दावा कर चुके हैं कि कांग्रेस के लगभग एक दर्जन विधायक उनके संपर्क में हैं और जब भाजपा आलाकमान अनुमति दे देगा तो उन्हें भाजपा में शामिल करा देंगे। राजनीति में दावे तो बढ़-चढ़ कर किए जाते हैं पर इस समय जो हालात हैं उसमें किसी भी संभावना को नकारा नहीं जा सकता। जिस प्रकार लोधी के साथ हुआ उसको देखते हुए अब कोई भी फिसल सकता है। इसका कारण है कि अब सिद्धांत और प्रतिबद्धता के मायने ही बदल गए हैं और सुविधा और निजी हानि लाभ ही सब कुछ हो गया हैं। उमा भारती की अचानक प्रदेश में सक्रियता बढ़ गई है इसलिए कांग्रेस के लोधी विधायक दल बदल सकते हैं ऐसी चर्चा तेज है। दमोह के कांग्रेस के विधायक राहुल लोधी और बंडा के तरबर लोधी को कमलनाथ ने अपने घर बुलाकर उनसे लगभग दो घंटे बात की। दोनों ने कांग्रेस में ही रहने का वायदा किया है। कांग्रेस छोड़ भाजपा में गए प्रधुम्न सिंह लोधी और राहुल लोधी आपस में रिश्तेदार हैं इसलिए उन्होंने भी अपनी स्थिति कमलनाथ के सामने भी साफ की, राहुल पहले ही सफाई दे चुके थे।

कांग्रेस छोड़ने वाले 22 विधायकों की तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ से यह एक मुख्य शिकायत थी कि उनके पास विधायकों से मिलने का समय नहीं है। दूध का जला छांछ फूंक- फूंक कर पीता है। शायद इसलिए अब कमलनाथ बदले-बदले नजर आ रहे हैं और विधायकों के मन की बात भी सुन रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष ने उन्हें पार्टी छोड़कर ना जाने की सलाह दी। इन विधायकों ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि भाजपा नेता हमें पार्टी में शामिल कराने की कोशिश कर रहे और ऑफर दे रहे हैं। हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप भाजपा पर लग रहे हैं और इन दो विधायकों ने भी अपनी पार्टी के प्रति आस्था बताते हुए ऐसा ही आरोप जड़ दिया किंतु उन्होंने किसी नेता का नाम नहीं लिया। यह जरूर कहा कि हमारा जन्म कांग्रेस में हुआ है और मौत भी यहीं होगी।अब अपनी बात पर यह कितना टिकते हैं इसका उत्तर तो भविष्य के गर्भ में है और देखने वाली बात यही होगी कि अपनी बात पर टिके रहेंगे या फिसलपट्टी बन चुकी राजनीति की डगर पर आगे चल कर फिसल जाएंगे। कमलनाथ के हनुमान की भूमिका में नजर आ रहें पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा का कहना है कि दोनों ही विधायक पार्टी के साथ हैं और लोधी बाहुल्य सीटों पर कांग्रेस के लिए प्रचार करेंगे। कांग्रेस में कुछ और विधायक दल छोड़ सकते हैं, ऐसा संशय का वातावरण बना रहे प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सांसद विष्णु दत्त शर्मा का यह कथन काफी है कि यदि कोई कांग्रेस की नीतियों से परेशान होकर भाजपा में आता है तो हम स्वागत करते हैं। लगता है अजय विश्‍नोई और जयभान सिंह पवैया जैसे नेताओं की पीड़ा और सलाह से बेपरवाह भाजपा कांग्रेस मुक्त भारत की परिकल्पना को मूर्त रूप देने में कतई हिचकिचाने वाली नहीं है। उसे इस बात का पक्का भरोसा है कि उसके कार्यकर्ता समर्पित हैं और कहें कुछ भी पर टस से मस नहीं होंगे जब पार्टी हित की बात आएगी। सवाल यही है की ताजे आश्‍वासन के बाद कांग्रेस कितनी बेफिक्र होती है क्योंकि जो प्रधुम्न सिंह लोधी भाजपा में चले गए हैं वे उस दिन फूट-फूट कर रोए थे जब कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था।

ट्वीट के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव ने विभाग वितरण के बाद मीडिया रिपोर्ट पर तंज कसते हुए लिखा है कि नव- विस्तारित मंत्रिमंडल के सदस्यों को विभाग वितरण के पश्‍चात दो दिन से अखबार और चैनल पर देख रहा हूं कि भाजपा कोटे से इतने मंत्री सिंधिया कोटे से तथा कितनों को ’मालदार विभाग ’। मालदार शब्द भी पहली बार इस नए दौर की राजनीति में प्रविष्ट हुआ है। क्योंकि अब सभी भाजपा में शामिल हो गए इसलिए सिंधिया कोटे शब्द पर भाजपा नेताओं को ऐतराज है। मालदार शब्द का अर्थ भार्गव को पूर्व या वर्तमान वे मंत्री आसानी से समझा सकते हैं जिनके पास हमेशा सूखे विभाग रहे हैं। 20 जुलाई से प्रारंभ हो रहे विधानसभा सत्र में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ बतौर नेता प्रतिपक्ष एक दूसरे पर आरोप- प्रत्यारोप की झड़ी लगाते नजर आएंगे। प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रभारी तथा कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा है कि कमलनाथ नेता प्रतिपक्ष होंगे इस संबंध में औपचारिक पत्र भी विधानसभा सचिवालय को पार्टी भेज रही है। शिवराज और कमलनाथ दोनों उपचुनाव के मोड में आ गए हैं इसलिए कोई किसी को घेरने का अवसर हाथ से नहीं जाने देगा। इस सत्र के हंगामाखेज होने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता है।

और अंत में……….!
सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से खबरें फैलती हैं और अफवाह फैलाने का भी कभी-कभी यह माध्यम बन जाता है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहाकि विभिन्न सोशल मीडिया माध्यमों में खबर चल रही है कि मध्यप्रदेश में कल से लॉकडाउन लगाया जा रहा है। यह खबर पूर्णतः निराधार है। राज्य में लॉकडाउन को लेकर मध्यप्रदेश शासन द्वारा ऐसा कोई भी निर्णय नहीं लिया गया है। हालाँकि, सभी नागरिकों से मैं यह आग्रह ज़रूर करूंगा कि सावधानी का पालन करते रहें, चेहरे पर मास्क लगाएँ, हाथ अच्छे से धोएँ और आवश्यक कार्य के लिए ही घर से बाहर जाएँ। इस पर चल रही बातों पर ध्यान ना दें। प्रदेश के गृह एवं जेल मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा का राजनैतिक मामलों और खासकर कांग्रेस पर तंज कसने में कोई मुकाबला नहीं है, राजस्थान के सियासी ड्रामे पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक डूबता हुआ जहाज है और उभरते युवा को राहुल गांधी कांग्रेस में आगे नहीं बढ़ने देते। यह बात उन्होंने सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री तथा राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाने के संदर्भ में कही। उन्होंने कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह को भी चुनौती दी कि यदि उनके पास किसी के खिलाफ भ्रष्टाचार के सुबूत हैं तो सार्वजनिक करें क्योंकि तथ्य छिपाना भी गलती है। इसके साथ ही उन्होंने सलाह भी दी कि अपने बड़े भाई (दिग्विजय सिंह) की तरह हवाई बयान ना दें । लक्ष्मण सिंह ने आरोप लगाया था की सिंधिया समर्थक जो मंत्री बने हैं उनके भ्रष्टाचार के सबूत उनके पास है और उसकी भी सीबीआई से जांच कराना चाहिए।

अरुण पटेल /सुबह सबेरे से साभार

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