कहानी: अनोखा उपहार

भटनागर साहब के घर आज खूब चहल-पहल थी। उनके लाड़ले बेटे का जन्मदिन जो था। भटनागर साहब व उनकी पत्नी ने तो आर्यन से कहा था कि शाम को होटल में डिनर करने चलेंगे। लेकिन आर्यन की जिद थी कि बर्थ-डे पार्टी घर पर ही हो, ताकि वह अपने दोस्तों को भी बुला सके और सब मिलकर खूब मस्ती कर सकें। मम्मी-पापा को उसकी बात माननी पड़ी तथा घर पर ही आयोजन की तैयारी होने लगी।

आर्यन बेहद खुश एवं उत्साहित था। बच्चों के लिए उनके जन्मदिन से बड़ा कोई पर्व नहीं होता। उनका बस चले, तो साल में दो-तीन बार अपना जन्मदिन मना लें। आर्यन और उसका बड़ा भाई पार्थ भी अपने स्तर पर अपनी तैयारियों में लगे हुए थे। मम्मी रसोई में लगी हुई थीं, क्योंकि बहुत सारे व्यंजन बनाने थे। वैसे पार्टी में अधिक लोगों को नहीं बुलाया गया था। आर्यन के दोस्तों के अतिरिक्त भटनागर साहब ने अपने परिचित दो-तीन परिवारों को आमंत्रित किया था।

इस सबके बीच मिसिज भटनागर के दिमाग में एक समस्या चल रही थी और वह थी आर्यन के लिए गिफ्ट। अभी तक पति-पत्नी दोनों उसके गिफ्ट के विषय में निर्णय नहीं ले पाए थे। नौ वर्षीय आर्यन के पास सभी चीजें थीं, इसलिए मम्मी-पापा असमंजस में थे। आखिर उन्होंने निश्चय किया कि क्यों न आर्यन से ही उसकी पसंद पूछी जाए।

काम से थोड़ी फुर्सत मिलते ही मम्मी ने आर्यन को अपने पास बुलाया और प्यार से पूछा-बेटा! बताओ, तुम्हें आज गिफ्ट में क्या चाहिए। हम तुम्हारी पसंद की वस्तु देना चाहते हैं। मम्मी की बात सुनकर आर्यन सोच में पड़ गया, क्योंकि उसे किसी चीज की आवश्यकता नहीं थी। थोड़ी देर बाद वह एकदम उछल कर बोला-मम्मी! क्या सचमुच मुझे आप मेरी पसंद का गिफ्ट देना चाहती हो?

-हां बेटे! बोलो तुम्हें क्या चाहिए? हम अवश्य ही तुम्हारी फरमाइश पूरी करेंगे।
-मम्मी! मुझे कुछ नहीं चाहिए। बस आज आप मुझे अपने साथ सुलाकर एक प्यारी-सी कहानी सुना दीजिए। यह मेरे लिए सबसे बड़ा गिफ्ट होगा। बताइए, देंगी न आप मुझे यह अनोखा उपहार?
मम्मी ने बेटे को छाती से चिपका लिया। उनकी आंखें सजल हो उठीं। मासूम के मन की पीड़ा से उनका मन आकुल हो उठा। वह जोर से उसे गले लगाकर बोली-हां बेटे हां, तुझे यह तोहफा अवश्य मिलेगा।

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