कहिये किसान भाई ! सुना है सरकार ने आपको मालामाल कर दिया

अखिलेश अखिल

लखनऊ ट्रिब्यून दिल्ली ब्यूरो: बजट के बाद तो ऐसा ही लगा था कि देश का अन्नदाता अब भूखा नहीं रहेगा ,ऋण मुक्त हो जाएगा ,फांसी के फंदे से बच जाएगा और सबसे बड़ी बात कि अपनी बेटी के हाथ को पीला करने में अब कोई कसर नहीं रहेगी। चारो तरफ धूम मची थी कि मोदी सरकार ने किसानो को मालामाल कर दिया। ग्रामीण भारत की तक़दीर बदल गयी और किसान भाई देखते देखते लखपति हो जायेंगे। अन्नदाता की ऐसी बदलती सूरत पर पुरे देश को गुमान हुआ और मोदी सरकार का इकबाल बुलंद रहे इसकी जयकारा लगाई गयी। लेकिन अब जब बजट को समझा जा रहा है तो कहानी कुछ और ही सामने आ रही है। सच तो यही है कि इस बजट में किसानो की कोई दशा नहीं बढ़ने जा रही है। किसानो के हित में ऐसा कुछ भी नहीं है जिस पर गुमान किया जाय।

बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सरकार रबी पर न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी लागत से डेढ़ गुना दे रही है और 2018-19 में भी इतना ही दिया जाएगा। अगर आकड़ों को देखा जाए तो ये झूठ है। सरासर झूठ। सरकार के ही आकड़ों के मुताबिक, 2014-15 में गेहूं की लागत 1056.1 रुपये प्रति क्विंटल थी और एमएसपी मिला 1400 रुपये प्रति क्विंटल। 2016-17 के लिए गेहूं की प्रति क्विंटल लागत 2345 रुपये थी मगर सरकार ने एमएसपी दिया 1525 रुपये। भारतीय खाद्य निगम की वेबसाइट पर 2017-18 के लिए प्रति क्विंटल गेहूं की लागत 2408.67 रुपये है और एमएसपी 1625 रुपये। इन आंकड़ों को देखने से तो पता चलता है कि जो सरकार डेढ़ गुना देने की बात कर रही है ,वह कहा है ? सी 2 फसल की वो कीमत होती है जिसमें किसान की लागत भी जोड़ी जाती है। उसमें 50% एमएसपी जोड़ा जाता है लेकिन सरकार उससे कम दे रही है।

अब ज़रा किसानो की आय का जायजा ले ली जाय। सरकार किसानो की आय के बारे में भी बहुत कुछ बोल रही है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने घोषणा की है कि 2022 तक किसानों की आय दोगुनी कर दी जाएगी। ये दावा सुनने में बहुत अच्छा लगता है लेकिन इसकों ज़मीन पर उतारना मुश्किल है। नेशनल सर्वे के मुताबिक, देश में औसतन किसान की आय 2 हज़ार रुपये प्रतिमाह है। तो अगर उसकी आय 2022 तक दुगुनी होती है तो भी 4 हज़ार प्रतिमाह होगी। जबकि वर्तमान स्तिथि ये है कि देश में औसतन किसान को 33 से 34 हज़ार सालाना लोन चुकाना होता है। फिर एक किसान की आय 2 हजार से बढ़कर 4 हजार हो भी जाए तो क्या बदलने वाला है। सच तो यही है कि किसान की आय दुगुनी करना समस्या का समाधान नहीं है। सरकार अगर किसानों का जीवन स्तर सुधारना चाहती है तो उसे किसान की आय उसके ऋण से ज़्यादा करनी होगी। अगर 2022 तक सरकार किसानों की आय दुगुनी करना चाहती है तो उसे कृषि विकास दर लगभग 12% की दर से लगातार बढ़ानी होगी। जबकि अभी कृषि विकास दर 2 फीसदी के बराबर है। इससे पहले यह दर 4.9% था।

मामला यही तक नहीं है। बजट के दौरान वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि किसानों की सुविधा के लिए गावों में 22 हज़ार कृषि बाज़ार बनाए जाएँगे। इसके लिए 2 हज़ार करोड़ रुपये आवंटित किये गए हैं। अगर हिसाब लगाया जाए तो 2 हज़ार करोड़ रुपियें में 22,000 कृषि बाज़ार बनाने के लिए एक बाज़ार को लगभग 9 लाख रूपए मिल पाएँगे। क्या 9 लाख रुपये में एक कृषि बाज़ार बनाया जा सकता है? आगे की कहानी देखनी होगी। जहां तक किसानो के ऋण देने की बात है बजट में सरकार ने 10 लाख करोड़ का क्रेडिट दिया गया है। लेकिन किसान जो पहले से ही लोन के नीचे दबा है वो और अधिक लोन क्यों लेगा। किसानों की मांग है कि या तो उनके वर्तमान लोन को माफ़ किया जाए या फिर उनकी आय इतनी बढ़ाई जाए कि वो लोन को वापस कर सके। जाहिर है इस बारे में सरकार चुप है। ऊपर से देखने में सब खुशनुमा लग रहा है लेकिन निचे से इसमें कोई जान नजर नहीं आती। इसलिए सच तो यही है कि किसानो की दशा नहीं बदल रही है।

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