कहीं आपके कान पर ऐसा छेद तो नहीं

आम तौर पर शरीर की बनावट सभी की एक जैसी होती है लेकिन कुछ बच्चों का जब जन्म होता है तो उनमें कुछ असामान्य भी नजर आता है। दुनिया में जन्म लेने वाले कई लोग थोड़ा हटकर पैदा होते हैं। उनमें कुछ विशेष होता है। जैसे किसी का सिर बड़ा होता है तो किसी के हाथों की उंगलियां ज्यादा होती है। किसी हाथ पैर असामान्य पैदा होते हैं। कई बार दो सिर के बच्चे पैदा होते हैं। कई बार तीन पैर या तीन हाथ का भी बच्चा पैदा होता है।

ऐसी असामान्य परिस्थितियां चिकित्सकों के सामने आती रहती हैं। इनमें से ज्यादातर में तो चिकित्सक सर्जरी के जरिए स्थिति सामान्य बना लेते हैं तो कई बार बच्चों की मौत भी हो जाती है। आज हम आपको जिस समस्या के बारे में बता रहे हैं कई बार तो लोग इससे अनजान भी रहते हैं कि उनके साथ भी ऐसा हुआ है। क्योंकि इससे उन्हें कोई दिक्कत नहीं होती है लेकिन उनका कान असामान्य रहता है और दूसरों से अलग रहता है।

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कान में छेद

कई बच्चे ऐसे होते हैं जिनके कान में एक छेद होता है। ये छेद सामान्य तौर पर दिखाई नहीं देता है।मुश्किल से नजर आता है। ब्रिटेन में ये केवल एक फीसदी लोगों को होता है। अमेरिका में यह दर और भी कम है जबकि एशिया और अफ्रीकी देशों में इससे प्रभावित ज्यादा लोग हैं। करीब चार से दस फीसदी यहां की दर है। ये छेद ग्रंथि, खरोंच या डिंपद जैसा होता है। ये उन जगहों पर होता है जहां कान की हडडी नरम होती है। इसे प्रीयूरीक्यूलर साइनस कहते हैं।

आनुवंशिक डिफेक्ट

इसे आनुवंशिक डिफेक्ट माना जाता है। वैज्ञानिक वेन हेसिंगर ने 1964 में सबसे पहले इसे बताया था। उन्होंने एक कान में ये छेद पाया था। कई लोगों को ये दोनों कानों में भी पाया जाता है। दुनिया भर में ऐसे लोग करीब एक फीसदी ही पाए जाते हैं। ये कोई बड़ी समस्या नहीं है। इसे इलाज के जरिए खत्म भी किया जा सकता है। इसके लिए एंटीबायोटिक्स की मदद ली जाती है। कई बार इस साइनस को खत्म करने के लिए सर्जरी की भी जरूरत पड़ती है।

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