कांग्रेसियों को मूर्छा से उबारने में राहुल सफल

लखनऊ: राजा-रंक को एकाकार करने वाले मकर संक्रांति पर्व पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी उत्तर प्रदेश में मूर्छा की हालत में पड़े कांग्रेसियों के लिए संजीवनी बन गये। इस महापर्व पर उनके लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट पर उतरते ही कांग्रेसियों में जीवन संचार की नसें उभरने लगी थीं। राहुल ने सनातन धर्मानुरूप जीवन शैली में रायबरेली और अमेठी में दो दिन उनके बीच गुजारे, तो हर कांग्रेसी ऊर्जा से लबालब हो गया। सभी के चेहरे पर मुस्कान थिरक रही थी।

राहुल उपाध्यक्ष रहते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं में इस कदर जोश भरने में कभी कामयाब नहीं दिखे थे। अध्यक्ष बनकर पहली बार उनके बीच क्या पहुंचे कि निराशा की जगह आशा ने स्थान ग्रहण कर लिया। इस आशा के बीज का रोपण, यूं तो गुजरात चुनाव के दौरान ही राहुल ने पहले भगवान, फिर राजनीति का रोपण करके कर चुके थे। उन्होंने जब महापर्व मकर संक्रांति पर अपने और अपनी मां सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र क्रमश: अमेठी और रायबरेली में अपने आगमन का कार्यक्रम बनाया था, तभी से कांग्रेसजन उत्साहित होकर उनकी राह ताक रहे थे। राहुल ने उनके उत्साह में बढ़ोतरी करने में भी कोई कमी नहीं छोड़ी। लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट पर उतरते ही उन्होंने स्वागत में कतारबद्ध खड़े सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं से हाथ मिलाकर उन्हें गदगद कर दिया। फिर काफिले संग चले, तो बीच रास्ते में चाय-पान कर-कराकर उनके दिलों को जीत लिया।

कांग्रेसियों के रोम-रोम तब पुलकित हो गये जब उन्होंने इच्छा जाहिर कि वे रायबरेली रूट पर स्थित चुरुवा मंदिर में बल, बुद्धि, ज्ञान के देवता संकट मोचक हनुमान जी का दर्शन करना चाहते हैं। थोड़ी देर में काफिल मंदिर के सामने पहुंच गया। राहुल वहां उतरे और मस्तक झुकाकर मंदिर में गये। वहां पर वह भगवान श्रीराम के सबसे प्रिय भक्त हनुमान जी के चरणों में बैठ गये। १‚ मिनट तक पूजन-अर्चन करने के बाद पुरोहित से तिलक लगवाकर गंतव्य की ओर रवाना हुए। सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों पर इस बाबत तस्वीर संग खबरें तैरीं, तो स्वागत में पांवड़े बिछाये कांग्रेसी रहे हों या वे कहीं और जगह रहे हों, सबके सब मचल उठे। सब में एक ही सोच थी कि अगर भगवा पार्टी से दो-दो हाथ करनी है, तो राजनीति में पूजा-अर्चन की घोल जरूरी है।

वैसे तो राहुल गांधी मंदिरों में पहले भी देवों के पूजन-अर्चन करते रहे हैं। चाहे वाराणसी में भगवान भोले नाथ की पूजा-अर्चना रही हो या बाबरी विध्वंस के बाद पहली बार ९ सितम्बर, २‚१६ को अयोध्या स्थित हनुमान गढ़ी में माथा टेकने की, लेकिन गुजरात में मंदिर-मंदिर दर्शन-पूजन का फल उन्हें गुजरात विधानसभा चुनाव में मिला। इसी ने कांग्रेसियों में भी जोश भरा। राहुल धर्म आधारित इस तरह के और कदम उठाएंगे, जो जनप्रिय हों और साथ ही कार्यकर्ताओं को पसंद हों, यह बात उन्होंने तब साबित कर दी, जब वह परम्परागत तरीके से खिचड़ी दान करने बैठ गये। वह मकर संक्रांति पर सलोन कस्बे में न केवल खिचड़ी भोज में शामिल हुए बल्कि मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन भी किया। कलवा बंधाया। पांच ब्राह्मणों को खिचड़ी दान की। साथ में जनेऊ और पंचांग भी भेंट किए।

राहुल गांधी के खिचड़ी दान की भी खबर फैली, तो यह लोगों और कांग्रेसियों को खिचड़ी में डाली गई घी सरीखी स्वादिस्ट लगी। कांग्रेस अध्यक्ष के हनुमान जी के दर्शन-पूजन और खिचड़ी दान की जगह-जगह चर्चा होने लगी। कुल मिलाकर राहुल के इन दोनों कदमों ने कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को घोर निराश से निकाल लिया। समूचा वातावरण कांग्रेस मय हो गया। हालांकि रायबरेली और अमेठी में कहीं-कहीं पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी के प्रति लापता सांसद का स्वागत नामक पोस्टर लगाकर कांग्रेस के जोश से भरे खुशनुमा माहौल को खटास में बदलने की कोशिश की, लेकिन उत्साह से लबरेज कांग्रेसियों ने उनसे पंगा लेकर अपनी बढ़त बनाये रखी।

राहुल ने अपनी इस यात्रा के दौरान पहले की तरह ही मोदी सरकार और यूपी की योगी सरकार पर भी निशाने साधे। सलोन की सभा में बेरोगारी का मुद्दा उठाया। हमलावर मुद्गा में कहा कि मोदी सरकार बेरोजगारी दूर करने में नाकाम रही है। उदाहरण दिया, चीन की सरकार २४ घंटे में ५‚ हजार युवाओं को रोजगार देती है जबकि इसके मुकाबले मोदी की सरकार सिर्फ ४५‚ युवाओं को ही रोजगार देती है। आलू किसानों की समस्या को उभारते हुए योगी सरकार को भी आड़े हाथ लिया। कहा, आलू का वाजिब मूल्य किसानों को नहीं मिल रहा है। सियासत नहीं होनी चाहिए। किसानों को वाजिब दाम मिलना चाहिए। उनका यह भी कहना था कि यूपीए सरकार ने अमेठी में आलू और अन्य किसानों की सुविधा के लिए फूड पार्क बनाने का फैसला किया था, लेकिन मोदी की सरकार ने विद्बेष की राजनीति में उस योजना को ही रद्द कर दिया।

अमेठी में फूड पार्क बन गया होता, तो पांच हजार लोगों को रोजगार मिलता ही, सैकड़ों किसानों को भी आलू का वाजिब दाम भी मिलता। यह आश्वासन भी दिया कि कांग्रेस पार्टी की सरकार आएगी, तो अमेठी में फूड पार्क जरूर बनेगा। आखिर में लोगों के बीच सवाल छोड़ा कि वे मोदी और योगी सरकार से पूछें कि अमेठी और देश के लिए उनकी सरकारों ने क्या किया है। यात्रा के वक्त राहुल गांधी की एक खासियत यह दिखी कि वे अपने साथ चल रहे प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर, राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी, पार्टी प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह व एमएलसी दीपक सिंह आदि से प्रदेश के राजनीतिक हालात की जानकारी लेते रहे।

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