कांग्रेस का तीन दिवसीय महाधिवेशन शुरू, लगातार हार पर होगा मंथन

उत्तर प्रदेश के दो लोकसभा उपचुनाव के नतीजे से बदले राजनीतिक माहौल के बीच शुक्रवार से कांग्रेस महाधिवेशन करने जा रही है। यह अधिवेशन तीन दिनों तक चलेगा। अधिवेशन का मुख्य फोकस पार्टी की लगातार हार पर केंद्रित है। इस अधिवेशन में पार्टी को यह तय करना है कि बदलते राजनीतिक परिवेश में उसे एकला चलो की राजनीति को आगे बढ़ाना है या बीजेपी की विस्तारवादी राजनीति को रोकने के लिए क्षेत्रीय दलों को साथ लेकर आगे बढ़ना है।

माना जा रहा है कि इस अधिवेशन में पार्टी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रस्ताव भी लाएगी इसके साथ अगले चुनाव को देखते हुए विजन डकुमेंट भी पेश करेगी। गठबंधन की राजनीति पर भी चर्चा की जायेगी और पार्टी संगठन को मजबूत करने की रणनीति भी इस अधिवेशन में बनेगी। कुल मिलाकर कांग्रेस को कैसे मजबूत किया जाय और जनता की उम्मीदों पर खड़ा उतरा जाय ,इस अधिवेशन का मुख्य अजेंडा है।

बता दें कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से लगातार हार पार्टी के लिये चिंता का विषय है और इस मसले पर अधिवेशन में विस्तार से चर्चा होगी। दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में होने वाले तीन दिन के इस अधिवेशन में 15000 प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। सत्र के पहले दिन 16 मार्च को पदाधिकारियों की बैठक होगी और दूसरे दिन 17 मार्च को राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक तथा अन्य प्रस्ताव पारित किए जाएंगे तथा 18 को महा अधिवेशन का समापन होगा। राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार हो रहे इस अधिवेशन का महत्त्व काफी बढ़ जाता है। तीन दिवसीय इस अधिवेशन में पार्टी विभिन्न प्रस्तावों के जरिये राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर अपने विचार स्पष्ट करेगी और उन पर आगे बढऩे तथा उनके क्रियान्वयन का रास्ता तय करेगी।

यह अधिवेशन इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि हाल ही में यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने विपक्ष को एकजुट करने के लिए रात्रि भोज का आयोजन किया था। जिसमें 20 दलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। इस डिनर डिप्लोमेसी में हुई चर्चा को कांग्रेस महाअधिवेशन में विस्तार देगी। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के मिलकर भाजपा को पटकनी देने के बाद कांग्रेस के इस अधिवेशन का महत्व और बढ़ गया है। सबकी नजर अब इस बात पर होगी कि पार्टी भाजपा विरोधी ताकतों को साथ लेने के लिये क्या रास्ता अपनायेगी।

पार्टी सूत्रों के अनुसार राहुल देश की राजनीतिक स्थिति पर दृष्टि पत्र पेश कर सकते हैं जिसमें आगे की रणनीति विशेषकर अगले वर्ष होने वाले आम चुनाव में भाजपा को पराजित करने की रणनीति के बारे में विस्तार से जानकारी होगी। किसानों, बेरोजगारों तथा गरीबों के मुद्दे पर इस अधिवेशन में विशेष रूप से चर्चा होगी तथा इस संबंध में प्रस्ताव भी पारित किये जायेंगे। इन मुद्दों पर पार्टी सरकार को लगातार घेरती रही है और अगले चुनाव में वह इन्हें बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार महा अधिवेशन में राजनीति प्रस्ताव 2019 के आम चुनाव पर केंद्रित होगा। राजनीतिक प्रस्ताव में पार्टी मोदी सरकार की नाकामियों को सामने लाने और उसके अनुरूप आम चुनाव में अपनी जीत और भाजपा की हार सुनिश्चित करने के लिए रोड मैप तैयार करेगी।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper