कांग्रेस में सीएम पद के चेहरे के लिए घमासान

भोपाल: मध्य प्रदेश में इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले मुख्यमंत्री पद के लिए चेहरा पेश करने को लेकर कांग्रेस में गंभीर मतभेद सामने आ रहे हैं। पिछले दिनों कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि पार्टी को मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री पद के लिए चेहरा पेश करना चाहिए। लेकिन उनके इस सुझाव से प्रदेश के दूसरे वरिष्ठ नेता सहमत नहीं हैं। इन नेताओं का मानना है कि कांग्रेस में इस तरह की परंपरा नहीं रही है। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस में चुनावों के पहले मुख्यमंत्री पद के लिए चेहरा पेश करने की परंपरा नहीं है।

राज्य में कोलारस और मुंगावली विधानसभा क्षेत्र में हो रहे उप चुनाव में प्रचार के लिए पहुंचे अजय सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, पंजाब को छोड़ किसी भी राज्य में कांग्रेस ने चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद के दावेदार की घोषणा नहीं की। राजस्थान, छत्तीसगढ, दिल्ली या किसी दूसरे राज्य में कभी भी कांग्रेस ने सीएम पद के लिए दावेदार घोषित कर चुनाव नहीं लड़ा है। दो दिन पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने भी इस सुझाव को खारिज कर दिया था। यादव का भी यही कहना था कि कांग्रेस में चुनाव से पहले चेहरा घोषित करने की परंपरा नहीं है।

उपचुनाव में प्रचार अभियान के बीच सिंधिया ने एक बार फिर कहा, मैं तो मानता हूं जरूरत है और मध्य प्रदेश में आपके पास चेहरे हैं। उन्होंने कहा, संसद या विधानसभा चुनाव ही नहीं, आज तो पार्षद या जिला परिषद के चुनाव में जनता चेहरा देखना चाहती है। ये तो वास्तविकता बन गई है, पूरे देश में। हां, हर पार्टी की नीति हर राज्य के लिए अलग होती है। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि हर राज्य में आपको चेहरा देना पड़ेगा, लेकिन जिन राज्यों में आपके पास चेहरे हैं, वहां तो आपको चेहरा देना ही होगा। उन्होंने हालांकि स्पष्ट किया कि वह चुनावों से पहले मुख्यमंत्री पद के लिए चेहरा पेश करने की बात सिर्फ मध्य प्रदेश नहीं, बल्कि पूरे देश और राज्यों के संदर्भ में कह रहे हैं।

कांग्रेस मध्य प्रदेश में 2003 से सत्ता से बाहर है। राजनीतिक विश्लेष्क मानते हैं कि कांग्रेस की लगातार हार का एक कारण पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में एकजुटता का अभाव होना भी है। प्रदेश कांग्रेस का एक खेमा मानता है कि मुख्यमंत्री पद के लिए चेहरा पेश करने से भाजपा के खिलाफ लडाई आसान होगी। जबकि एक खेमा संयुक्त नेतृत्व की वकालत कर रहा है।

सिंधिया ने कहा, न तो भाजपा हर राज्य में चेहरा देती है और न कांग्रेस। लेकिन यह जरूर है कि जहां चेहरे हैं, वहां चेहरों का इस्तेमाल आपको करना चाहिए। समय के साथ आपको कांग्रेस पार्टी को बदलना होगा। सिंधिया के गुना लोकसभा क्षेत्र के मुंगावली और कोलारस विधानसभा क्षेत्र में 24 फरवरी को उप चुनाव के लिए मतदान होना है। सिंधिया समर्थक मान रहे हैं कि उप चुनावों के परिणाम यदि कांग्रेस के पक्ष में आते हैं तो सिंधिया को मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित करने के लिए आलाकमान पर दबाव बनेगा। उनके समर्थक इन चुनावों को सिंधिया बनाम शिवराज बता रहे हैं। अजय सिंह इससे भी सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा, यह किसी नेता की लडाई नहीं है, बल्कि लड़ाई भाजपा और कांग्रेस के बीच की है।

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