कांची मठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती हुए ब्रह्मलीन

कांचीपुरम। कांचीपुरम मठ के 69वें शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती का बुधवार को यहां के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। 82 वर्षीय सरस्वती कुछ समय से बीमार थे। उन्हें बुधवार तड़के ही निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरस्वती के निधन पर शोक व्यक्त किया है। मोदी ने कहा कि वह कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य के निधन से दुखी हैं। मोदी ने शंकराचार्य के साथ अपनी एक तस्वीर साझा करते हुए ट्वीट कर कहा, वह अपनी अनुकरणीय सेवा और नेक विचारों की वजह से लाखों भक्तों के दिलों-दिमाग में जीवित रहेंगे। उनकी आत्मा को शांति मिले।
मोदी ने कहा कि वह असंख्य सामुदायिक अभियानों के अगुवा थे। उन्होंने गरीबों और वंचितों के जीवन में बदलाव लाने वाले संस्थानों का विकास किया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से जारी एक शोक संदेश में कहा गया है कि शंकराचार्य के निधन से समाज को अपूरणीय क्षति हुई है।
उन्होंने कहा है कि ब्रह्मलीन शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती प्रकांड विद्बान थे। वे वेदों सहित अनेक धार्मिक ग्रंथों के ज्ञाता थे। शंकराचार्य के समृद्ध आध्यात्मिक और सामाजिक योगदान के लिए उन्हें सदैव याद किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति की कामना भी की है।शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती का दिल का दौरा पड़ने के बाद बुधवार को निधन हो गया। हालांकि, वह लंबे समय से बीमार थे और उन्हें पिछले महीने भी सांस की बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। जयेंद्र सरस्वती देश के सबसे पुराने मठों में से एक के प्रमुख थे और वह काफी लंबे समय से इस पद पर आसीन थे।

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