किसी उड़ते हुए ताबुत से कम नहीं है फाइटर मिग -21

दिल्ली ब्यूरो: भारतीय वायु सेना का जांबाज फाइटर मिग 21 वैसे तो अब रिटायर होने के कगार पर है क्योंकि भारतीय वायु सेना अब इसे हटाने की तैयारी कर रही है। लेकिन जाते जाते इसने फिर से पाकिस्तानी एफ 16 को मात दिया और अपना दबदबा बनाये रखा। ताकत की तुलना करें तो पाकिस्तान वायु सेना के एफ -16 के सामने मिग बेहद कमजोर नजर आता है लेकिन इसी मिग-21 ने पाकिस्तानी एफ -16 को मार गिराया ,खुद भी ध्वस्त हुआ और विंग कमांडर अभिनन्दन पकिस्तान के कब्जे में चला गया था।

भारतीय वायु सेना ने तीन साल की अवधि में 29 लड़ाकू विमान खो दिए जिसमें 12 मिग-21 भी शामिल थे। इन दुर्घटनाओं में छह पायलटों की जान चली गई। भारतीय आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, 1970 के बाद से मिग-21 दुर्घटनाओं में 170 से अधिक भारतीय वायुसेना के पायलट मारे गए हैं, जो एक बड़ा आंकड़ा है।

एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में रूसी राजदूत अलेक्जेंडर कदाकिन का कहना है कि वायुसेना द्वारा अधिग्रहित मिग-21 के स्पेयर पार्ट्स नकली थे। उन्होंने कहा मिग और अन्य विमानों के लिए आपको प्रामाणिक पार्ट्स की आवश्यकता होती है और फिर आप आश्चर्यचकित हैं कि आपके विमान क्यों गिरते हैं क्योंकि स्पेयर पार्ट्स अनधिकृत स्रोतों से खरीदे जाते हैं। ”

बता दें कि पूर्व भारतीय रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने संसद को सूचित किया था कि पिछले 40 वर्षों में भारत ने 872 विमानों के अपने मिग लड़ाकू बेड़े के आधे से अधिक को खो दिया है। मंत्री ने खुलासा किया था कि 482 मिग विमान दुर्घटनाएं 19 अप्रैल 2012 तक हुई थीं। एंटनी ने यह भी खुलासा किया था कि इन दुर्घटनाओं के कारण 171 पायलटों, 39 नागरिकों की जान चली गई थी। भारत को 2002 में सुखोई का प्रारंभिक बैच प्राप्त हुआ। इनमें से पहला विमान 2009 में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और तब से कम से कम पांच और दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। जानकारों की माने तो घटिया रखरखाव भी एक कारण है। मिग को उडाता हुआ ताबूत भी कहा जाने लगा है।

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