कुशीनगर में गिद्ध की पीठ पर चिप देखकर डर गए ग्रामीण, हर तरफ हो रही है इसकी चर्चा

कुशीनगर: कुशीनगर के बरवापट्टी थाने के रामपुर बरहन के बकुलहवा गांव में गन्ने के खेत में कोडिंग और बड़ा चिप लगा गिद्ध मिला। इसकी सूचना मिलते ही मौके पर ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी और तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई। वहीं सूचना पर एसओ अरविंद कुमार भी फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने आते ही गिद्ध को कब्जे में लेकर वन विभाग को सौंप दिया। तमकुही रेंज के वन क्षेत्राधिकारी नृपेंद्र कुमार चतुर्वेदी के अनुसार, यह पक्षी गिद्ध है, जिसपर किसी शोध संस्था ने अपना कोडिंग और लोकेशन ट्रेस करने के लिए चिप लगा रखा है।

उन्होंने कहा कि प्रायः विलुप्त हो रहे पशु पक्षियों के लिए उसके अस्तित्व को जानने के उद्देश्य से टैगिंग किया जाता है लेकिन अभी बहुत कुछ स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। इसके लिए डीएफओ कुशीनगर को अवगत कराया गया है। फिलहाल वह भूखा है, इसलिए उसके मांसाहारी भोजन का प्रबंध किया जा रहा है।

एसपी विनोद कुमार मिश्र ने बताया कि ग्राम खानगी टोला बकुलहवां थाना बरवापट्टी में एक गिद्ध पक्षी जमीन पर पड़ा हुआ था, जिसे ग्रामीणों के द्वारा पकड़कर वन विभाग रेंज दुदही को दिया गया। गिद्ध के दोनो पंख पर टैग (C3) पीले रंग के व जीपीएस टैकर लगा हुआ है।

गिद्ध प्रजनन एवं संरक्षण केंद्र से संबंधित है। इस गिद्ध को प्रजनन एवं संरक्षण केंद्र द्वारा संरक्षित करते हुए टैग व जीपीएस लगाकर छोड़ा गया है। जीपीएस ट्रैकर के माध्यम सें उसकी लोकेशन व गतिविधियों की जानकारी कर डाटा तैयार किया जाता है। इसका संबंध किसी जासूसी या किसी संदिग्ध कार्यवाही से संबंधित नहीं है

शुक्रवार को गांववालों ने गिद्ध को पड़ा हुआ देखा तो इसकी सूचना वनाधिकारियों को दी। डीएफओ के निर्देश पर तमकुही रेंज के वन क्षेत्राधिकारी नृपेंद्र द्विवेदी ने मौके पर वनकर्मियों को भेजा। गिद्ध को उठाकर सरगटिया करनपट्टी स्थित वन विभाग के कार्यालय पर लाया गया है। डीएफओ ने बताया कि नेपाल के चितवन में बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) के कोलैबोरेशन से वल्चर ब्रीडिंग पर रिसर्च चल रहा है।

यह व्हाइट रंम्प्ड (जिप्स बेंगेंसिस) प्रजाति का है। मुंबई की यह संस्था कई वर्षों से इस पर रिसर्च कर रही है। डीएफओ ने बताया कि गिद्ध या तो लंबी उड़ान से थक गया होगा या बीमार होगा। इसलिए यहां गिर गया था। रिसर्च के लिए संरक्षित प्रजाति के इन गिद्धों को छोड़ा जाता है और ट्रैकिंग की जाती है।

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