कुशीनगर हवाई अड्डे से उड़ान भरने के लिये अभी करना होगा इंतजार

कुशीनगर: उत्तर प्रदेश में भगवान गौतम बुद्ध की निर्वाण स्थली कुशीनगर को अंतर्राष्ट्रीय हवाई क्षेत्र से जुड़ने के लिये अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। वजह यह है कि कुछ बिल्डिंग की अभी नींव ही नहीं खुदी है, तो एटीसी बिल्डिंग की अंतिम दो मंजिलों के डिजाइन परिवर्तन को लेकर पेच फंस गया है। कार्यदाई संस्था राइट्स ने कई अधूरे कार्यों का जिम्मा जिस नीरज कंस्ट्रक्शन कंपनी को सौंपा है। वह भी कार्य में तेजी नहीं ला पा रही है।

आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि कुशीनगर के इंटरनेशनल एयरपोर्ट निर्माण का पूरा अधिकार राइट्स कंपनी को मिला है। राइट्स कंपनी ने सिर्फ रनवे व एप्रन तैयार कर शेष काम नीरज कंस्ट्रक्शन कंपनी को दे दिया था। अगस्त 2017 में नीरज कंस्ट्रक्शन कंपनी के साथ हुए समझौते में एटीसी बिल्डिंग, फायर बिल्डिंग, अधूरी बाउंड्रीवाल, पंप हाउस, पुलिस स्टेशन, यूजी टैंक, गार्ड रूम आदि का निर्माण नीरज कंस्ट्रक्शन को करना था।

उन्होने बताया कि पहले चरण में राइट्स ने नीरज कंस्ट्रक्शन कंपनी को सिर्फ एटीसी बिल्डिंग और फायर बिल्डिंग निर्माण का कार्य सौंपा था। जिसमें से फायर बिल्डिंग का काम पूरा हो चुका है, लेकिन एटीसी बिल्डिंग का अभी छह फ्लोर ही बन पाया है जबकि ग्राउंड फ्लोर सहित आठ मंजिल का बनना है। नीरज कंस्ट्रक्शन कंपनी के अफसरों का कहना है कि राइट्स ने उपर के दो मंजिल के डिजाइन में परिवर्तन को लेकर बीते 10 अक्तूबर को कार्य रोक दिया था लेकिन संशोधित डिजाइन नहीं मिलने से अब तक काम चालू नहीं हो पाया है।

इसके अलावा राइटस ने शेष बचे कार्य पर काम चालू कराने की अनुमति बीते अगस्त में दी थी, लेकिन बारिश के चलते काम प्रभावित हो गया। दिसंबर के अंत तक भी अभी कार्य की प्रगति बेहद सुस्त है। नीरज कंस्ट्रक्शन कंपनी के अभियंताओं का कहना है कि फाउंडेशन के लिए पांच फुट गहरा गड्ढा खोदना है, जबकि ढाई से तीन फुट नीचे पानी मिलने से कार्य धीमा हो गया है। जबकि राइट्स व नीरज कंस्ट्रक्शन के बीच जो अनुबंध था वह 31 दिसंबर को समाप्त हो रहा है।

नीरज कंस्ट्रक्शन कंपनी के साइड इंचार्ज अनिल तिवारी का कहना है कि 31 दिसंबर तक के लिए राइट्स के साथ हुआ समझौता हुआ था लिहाजा उनकी कंपनी काम समेट रही है। वहीं राइटस के प्रोजेक्ट मैनेजर विमल कुमार का कहना है कि एटीसी बिल्डिंग का निर्माण नीरज कंस्ट्रक्शन को ही पूरा करना है लेकिन ऊपरी मंजिल का परिवर्तित नक्शा अभी हेड आफिस दिल्ली से नहीं मिला है। जिसके चलते देरी हुई है। अधूरे निर्माण को पूरा कराने के लिए विचार चल रहा है।

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