कृषि कार्य में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को अपनाने के साथ साथ पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप को भी बड़ावा देना होगा : डी0 जी0, आई सी ए आर

बरेली: कृषि कार्य में परम्पागत और आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को अपनाने के साथ-साथ पब्लिक प्राइवेट पाटनर्रशिप को भी बढ़ावा देना होगा। उक्त विचार भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक तथा सचिव कृषि अनसंधान एवं शिक्षा विभाग, नई दिल्ली   डा. हिमांशु पाठक ने भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर के स्वामी विवेकानन्द सभागार में आईवीआरआई एवं सीएआरआई के वैज्ञानिकों, अधिकारियों, एवं छात्रों के साथ बैठक में साझा किये। इस अवसर पर डा. बी.एन. त्रिपाठी, उपमहानिदेशक (पशु विज्ञान), संस्थान के निदेशक डा. त्रिवेणी दत्त तथा केन्द्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान के निदेशक डा. अशोक कुमार तिवारी उपस्थित रहे। इससे पूर्व डा. हिमांशु पाठक ने भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के सरस्वती एवं गोविन्द हास्टल का उद्घाटन किया।

डा. हिमांशु पाठक ने कहा कि सरकार कृषि क्षेत्र में व्यापक प्लानिंग के साथ कार्य कर रही है जिसके अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं उन्होंने कहा कि भारत ने कोविड काल में 50 मिलियन टन अनाज से अन्य देशों की सहायता की। उन्होंने कहा कि हमें चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर का डेटा बेस तैयार किये जा रहे हैं जिसमें भूमि, कृषि, सहकारी, एग्रीटेक, डेयरी, जल निकाय आदि डेटा शामिल हैं जिसका लाभ संबंधित क्षेत्रों को मिलेगा। उन्होंने निजी और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ सक्रिय सहयोग की आवश्यकता बतायी।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उपमहानिदेशक (पशु विज्ञान), डा. भूपेन्द्र नाथ त्रिपाठी ने कहा कि आईवीआरआई का एक गौरवशाली इतिहास रहा है इस संस्थान ने पशु रोग के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने कहा कि देश टेक्नोलॉजी और नैदानिक विकसित करने होंगे तथा उद्यमिता विकास को बड़ावा देना होगा। आईवीआरआई के निदेशक डा. त्रिवेणी दत्त ने संस्थान के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह संस्थान पशु रोग शोध, शिक्षा  के क्षेत्र मे उल्लेखनीय योगदान से लगातार राष्ट्रं की सेवा कर रहा है। उन्होंने कहा कि यहां के विद्यार्थियों का अच्छा प्लेसमेंट रहा है। संस्थान उभरती हुयी बीमारियों की निगरानी तथा पशु रोग से सम्बन्धित आउटब्रेक अटेंड करने के साथ-साथ वन्य प्राणी केन्दों को स्वास्थ्य सेवायें भी प्रदान करता है। संस्थान ने कई प्रौद्योगिकी को विकसित कर उसका वाणिज्यकरण किया है।

बरेली से ए सी सक्सेना ।

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